New Zealand Politics: न्यूज़ीलैंड में आम चुनाव से ठीक तीन महीने पहले एक बड़े सियासी उलटफेर में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे हैं. रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री को सीधी चुनौती दी थी. बुधवार को वेलिंगटन संसद में लक्सन की सेंटर-राइट नेशनल पार्टी के सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई.
गुप्त मतदान में जीता विश्वास
बंद दरवाजों के पीछे तीन घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में लक्सन के नेतृत्व पर विश्वास मत हुआ. यह गुप्त मतदान उनके रक्षा मंत्री क्रिस पेनक द्वारा दी गई सीधी चुनौती के बाद कराया गया था. चुनौती को मात देकर बाहर आए प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा कि कॉकस का उन्हें पूरा समर्थन हासिल है और पूरी पार्टी आगामी चुनाव जीतने के लिए पूरी तरह एकजुट है. हालांकि, उन्होंने वोटों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया. इसके कुछ घंटों बाद कार्रवाई करते हुए लक्सन ने रक्षा मंत्री क्रिस पेनक को उनके सभी मंत्री पदों और विभागों से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया.
लक्सन के लिए यह दूसरा विश्वास मत था
अप्रैल के बाद से लक्सन की लीडरशिप पर यह दूसरा वोट था. 7 नवंबर को होने वाले चुनाव के इतने करीब होने के कारण इस वोट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.अप्रैल में हुआ वोट ‘नेशनल’ पार्टी की गिरती लोकप्रियता के बाद हुआ था, जबकि इस हफ़्ते का वोट लक्सन के हालिया बयानों के बाद हुआ है. उन्होंने कई मुद्दों पर ऐसी बातें कहीं जिन्हें उनकी पार्टी के कुछ लोगों ने गलतियां माना. मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दुर्लभ कदम उठाते हुए बताया कि उनकी लीडरशिप को लेकर फिर से असंतोष की बातें हो रही हैं. साथ ही उन्होंने घोषणा की कि इस मामले को सुलझाने के लिए वे बुधवार को अपने सांसदों की बैठक बुलाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरा पक्का मानना है कि चुनाव में सिर्फ़ 90 दिन बचे होने पर आपसी मतभेद और फूट ध्यान भटकाने वाली बड़ी बातें हैं. लक्सन 2020 में संसद पहुंचे थे और 2021 से पार्टी की कमान संभाले हुए हैं.
यूनिलीवर में एग्जीक्यूटिव थे PM
हाल ही में लीडरशिप को लेकर फिर से चर्चा शुरू होने की एक वजह लक्सन की वे बातें थीं जो उन्होंने इस महीने की शुरुआत में बिज़नेस से जुड़े लोगों के सामने कही थीं. उन्होंने कहा था कि देश के कुछ बिज़नेस लीडर्स की सोच माता-पिता और बच्चे जैसी है और वे अक्सर दिशा-निर्देश के लिए सरकार की ओर देखते हैं. लक्सन, जो कभी अमेरिका में रहने के दौरान यूनिलीवर में एग्जीक्यूटिव थे, ने हमेशा खुद को एक बिज़नेस एक्सपर्ट के तौर पर पेश किया है और कई बार बताया है कि उन्हें कहां लगता है कि न्यूज़ीलैंड ग्लोबल ट्रेंड्स के मुकाबले पीछे है.
चुने जाने पर उन्होंने वादा किया था कि वे अपने अनुभव का इस्तेमाल करके हाल के वर्षों में न्यूज़ीलैंड की आर्थिक मुश्किलों को दूर करेंगे. इस महीने की उनकी बातों की कड़ी आलोचना हुई, जिसमें उनकी अपनी पार्टी के कुछ लोग भी शामिल थे. लोगों का कहना था कि जब अर्थव्यवस्था सुस्त चल रही है, तब उनकी बातें ज़मीनी हकीकत से दूर थीं. बाद में उन्होंने अपनी बातों के लिए माफ़ी मांगी.
जनमत संग्रह वाले बयान पर सांसद भी चौंके
लक्सन ने इस महीने अपने सांसदों को भी चौंका दिया जब उन्होंने वादा किया कि अगर वे दोबारा चुने जाते हैं तो न्यूज़ीलैंड की चुनावी व्यवस्था पर जनमत संग्रह कराएंगे. ज़ाहिर है कि उन्होंने ऐसा करने से पहले अपनी पार्टी के सांसदों (कॉकस) को नहीं बताया था. उनकी पार्टी के कुछ लोगों ने इन घटनाओं को चुनाव से पहले ध्यान भटकाने वाली और लक्सन के राजनीतिक अनुभव की कमी को उजागर करने वाली घटना के तौर पर देखा.
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News Source: PTI
