Bastar Project: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का गढ़ रहे बस्तर में जल्द ही ट्रेनें दौड़ेंगी. इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वालों को आवागमन में काफी सहूलियत होगी. ट्रेनों के शुरू होने से रेल कनेक्टिविटी के साथ-साथ क्षेत्र में रोजगार के भी अवसर खुलेंगे. रेल अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को नक्सली खतरों से बचाने के लिए एक दशक से भी ज़्यादा समय तक सशस्त्र सीमा बल (SSB) की दो बटालियनें खास तौर पर तैनात की गई थीं. छत्तीसगढ़ में 95 किलोमीटर लंबे दल्लीराजहरा-रावघाट रेल प्रोजेक्ट का काम पूरा हो गया है. इसके तहत तडोकी और रावघाट के बीच आखिरी 17.5 किलोमीटर के हिस्से में पटरियां बिछा दी गई हैं.
एक दशक तक सुरक्षा में तैनात रहीं SSB की दो बटालियनें
उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट दूर-दराज के इलाकों में यात्रियों के लिए रेल कनेक्टिविटी देगा और उत्तरी बस्तर में रावघाट खदानों से लौह अयस्क के ट्रांसपोर्टेशन में मदद करेगा. रावघाट खदानें पहले माओवादियों का गढ़ हुआ करती थीं. अधिकारियों ने बताया कि नक्सली खतरों से इस प्रोजेक्ट को बचाने के लिए एक दशक से भी ज़्यादा समय तक सशस्त्र सीमा बल (SSB) की दो बटालियनें खास तौर पर तैनात की गई थीं. रायपुर रेलवे डिवीज़न के एक अधिकारी ने बताया कि 95 किलोमीटर लंबे दल्लीराजहरा-रावघाट रूट पर तडोकी से रावघाट तक का आखिरी 17.5 किलोमीटर का हिस्सा पूरा हो गया है. 22 सितंबर को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) ने इसका निरीक्षण और स्पीड ट्रायल किया था.
2010-11 में शुरू हुआ था इसका निर्माण
उन्होंने कहा कि अभी दल्लीराजहरा और तडोकी के बीच पैसेंजर ट्रेन चल रही है, जो रूट का 77.5 किलोमीटर हिस्सा कवर करती है. जबकि हाल ही में पूरे हुए तडोकी-रावघाट सेक्शन पर परिचालन तय सुरक्षा और ऑपरेशनल औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शुरू होगा. उन्होंने बताया कि यह सेक्शन सिंगल-लाइन, बिजली से चलने वाला ब्रॉड गेज रेलवे रूट है. अधिकारी ने कहा कि दल्लीराजहरा-रावघाट सेक्शन 240 किलोमीटर लंबे दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेलवे प्रोजेक्ट का हिस्सा है. यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ सरकार, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NMDC), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और रेलवे का एक जॉइंट वेंचर है. इस प्रोजेक्ट को 1993 में सैद्धांतिक मंज़ूरी मिली थी, जबकि इसका निर्माण 2010-11 में शुरू हुआ.
खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
उन्होंने बताया कि 2008 में रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को पहले चरण के निर्माण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें बालोद ज़िले में डल्लीराजहरा और कांकेर ज़िले में रावघाट शामिल थे. कहा कि पहले चरण के तहत लगभग 95 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाई गई और अब रावघाट इस चरण का टर्मिनल स्टेशन होगा. यह रेलवे लाइन रायपुर, भिलाई और छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी बेहतर करेगी और आस-पास के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोज़गार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी. बताया कि इससे कृषि उत्पादों और स्थानीय व्यावसायिक सामान के साथ-साथ दुर्ग ज़िले में SAIL के भिलाई स्टील प्लांट तक लौह अयस्क के परिवहन में आसानी होगी.
मुख्यमंत्री साय ने बताया बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस सेक्शन का पूरा होना दक्षिण छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर क्षेत्र के विकास की यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि है. साय ने कहा कि रावघाट तक लाइन का पहुंचना केवल रेल कनेक्टिविटी का विस्तार नहीं है, बल्कि दूर-दराज़ के इलाकों में विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इस परियोजना के पूरा होने पर बस्तर क्षेत्र दुर्ग और छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख शहरों के ज़रिए सीधे रायपुर से जुड़ जाएगा.
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News Source: ANI
