Home Latest News & Updates पेपर लीक बिल पर चर्चा से ज्यादा राहुल गांधी के भाषण की हुई चर्चा, सदन में तीखी नोकझोंक बनी सुर्खियां

पेपर लीक बिल पर चर्चा से ज्यादा राहुल गांधी के भाषण की हुई चर्चा, सदन में तीखी नोकझोंक बनी सुर्खियां

by Kamlesh Kumar Singh 29 July 2026, 7:44 PM IST
29 July 2026, 7:44 PM IST
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Rahul Gandhi : लोकसभा में एंटी पेपर लीक कानून पर चर्चा के बीच राहुल गांधी का भाषण सबसे ज्यादा सुर्खियों में बना हुआ है. विपक्ष के नेता पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू इस कदर बिफड़ गए कि उनको सदन के भीतर ‘मर्डर’ जैसा शब्द बोलकर उदाहरण देना पड़ा. आखिर ऐसी नौबत क्यों आई?

अमित शाह पर लगाए गंभीर आरोप

लोकसभा देश का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है, जहां हर शब्द रिकॉर्ड होता है, हर आरोप की जवाबदेही तय होती है. लेकिन एंटी पेपर लीक कानून पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल उस वक्त गरमा गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बहस को कानून से हटाकर सीधे गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए. यहां तक कि राहुल गांधी ने कई बार इडियट शब्द का इस्तेमाल किया. बार-बार लोकसभा अध्यक्ष और ससंदीय कार्य मंत्री उनको सचेत करते रहे, लेकिन राहुल गांधी बार बार गलती दोहराते रहे.

सत्ता पक्ष ने किया पलटवार

यहां तक तो ठीक था लेकिन राहुल गांधी ने दावा किया कि छात्र आंदोलनों के दौरान पैलेट गन और फायरिंग का आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया. इस पर सत्ता पक्ष आक्रामक हो गई. सत्ता पक्ष ने जबरदस्त हंगामा के बीच राहुल गांधी से बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग करते रहे. लगभग 20 मिनट तक पूरे सदन में शोर शराबा होता रहा, लेकिन राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे. सत्ता पक्ष ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन और सदन को गुमराह करने वाला आरोप बताया. इसी बीच सदन में जोरदार हंगामा हुआ और फिर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू साफ कहा कि लोकसभा आरोपों का अखाड़ा नहीं है. यहां राजनीतिक भाषण के नाम पर किसी की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. अगर किसी मंत्री पर हत्या, गोली चलवाने या किसी भी गंभीर अपराध का आरोप लगाया जाता है, तो उसके पीछे ठोस सबूत भी होने चाहिए. इसी बात को समझाने के लिए रिजीजू ने कहा कि क्या हम यह कह सकते हैं कि राहुल गांधी ने किसी का मर्डर किया है? यानी बिना किसी सबूत के किसी पर हत्या जैसा आरोप नहीं लगाया जा सकता. फिर बिना किसी जांच, रिपोर्ट या तथ्य के गृह मंत्री पर इतने गंभीर आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं?

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भाषण को बीच में ही खत्म करना पड़ा

रिजीजू ने राहुल गांधी को खुली चुनौती दी. अगर आरोपों के समर्थन में तथ्य हैं, तो उन्हें सदन में रखा जाए और अगर तथ्य नहीं हैं तो आरोप वापस लेकर माफी मांगी जाए. सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष के नेता होने का मतलब यह नहीं कि संसद में कुछ भी कह दिया जाए. लोकसभा की गरिमा और संसदीय मर्यादा, दोनों तथ्यों पर चलती हैं. सिर्फ राजनीतिक आरोपों पर नहीं. जबरदस्त हंगामा के बीच लोकसभा को दो बार स्थापित की गई. लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार ब्यवस्था देनी की कोशिश की. लेकिन अंत मे सत्ता पक्ष के भारी विरोध और लोकसभा अध्यक्ष के रुलिंग के बाद नेता प्रतिपक्ष के भाषण को बीच में ही खत्म करना पड़ा.

कुछ अंश को कार्यवाही से हटा दी गई

इस बीच राहुल गांधी के लोकसभा में दिए गए भाषण के कुछ अंश को एक्सपेंज कर दिया गया यानी कार्यवाही से हटा दी गई. उधर संसदीय नियम भी साफ कहते हैं कि सदन में लगाए गए गंभीर आरोपों का आधार होना चाहिए. अगर कोई सदस्य बिना तथ्य के किसी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला आरोप लगाता है, तो उसके खिलाफ विशेषाधिकार का मामला उठाया जा सकता है और सदन तय करता है कि आगे क्या कार्रवाई होगी. अब सवाल सिर्फ राहुल गांधी के आरोपों का नहीं है. सवाल संसद की मर्यादा का भी है. क्या राहुल गांधी अपने आरोपों के समर्थन में सबूत देंगे या फिर सत्ता पक्ष की माफी मांगने की मांग और तेज होगी. फिलहाल, लोकसभा में छिड़ी यह सियासी जंग अब संसद से निकलकर देश की राजनीति के केंद्र में आ चुकी है.

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