Haryana News : हरियाणा सरकार एक बार फिर अपने सरकारी कार्यक्रम के जरिए राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है. गुरुवार को प्रदेशभर में जिला स्तरीय वन महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण सहित कई कैबिनेट मंत्री अलग-अलग जिलों में पौधारोपण और जनसहभागिता कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. हालांकि इस बार सबसे ज्यादा चर्चा उस फैसले की है, जिसमें सरकार ने कांग्रेस के निलंबित पांचों विधायकों को भी जिला स्तरीय कार्यक्रमों में आमंत्रित किया है.
जिला स्तरीय वन महोत्सव में शामिल होंगे
सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करनाल में आयोजित जिला स्तरीय वन महोत्सव में शामिल होंगे. उनके साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण भी मौजूद रहेंगे. इसके अलावा कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी झज्जर, श्रुति चौधरी भिवानी, अरविंद शर्मा चरखी दादरी, अनिल विज अंबाला और रणबीर गंगवा हिसार में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे. प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
कांग्रेस के निलंबित पांचों विधायकों को भी मिला निमंत्रण
लेकिन इन कार्यक्रमों की राजनीतिक अहमियत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि सरकार ने कांग्रेस के निलंबित पांचों विधायकों को भी आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है. अंबाला में शैली चौधरी, यमुनानगर में रेणु बाला, नूंह में मोहम्मद इलियास, पलवल में मोहम्मद इसराइल और फतेहाबाद में जरनैल सिंह को संबंधित जिला स्तरीय कार्यक्रमों का निमंत्रण भेजा गया है.
राजनीतिक चर्चाओं को मिली हवा
यह पहला मौका नहीं है जब इन विधायकों को सरकार के किसी कार्यक्रम में बुलाया गया हो. पिछले कुछ महीनों के दौरान राज्य सरकार के कई सरकारी आयोजनों में ये पांचों विधायक लगातार नजर आते रहे हैं. चाहे विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास हों या फिर विभिन्न सरकारी अभियान, सरकार की ओर से इन्हें लगातार आमंत्रित किया जाता रहा है. ऐसे में वन महोत्सव के निमंत्रण ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है.
जनहित के कार्यक्रम राजनीति से ऊपर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकारी कार्यक्रमों में इन विधायकों की लगातार मौजूदगी कई तरह के संकेत दे रही है. एक ओर सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि विकास और जनहित के कार्यक्रम राजनीति से ऊपर हैं और सभी जनप्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी है. वहीं दूसरी ओर विपक्ष के भीतर भी इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं कि सरकार इन कार्यक्रमों के जरिए राजनीतिक समीकरण साधने का प्रयास कर रही है.
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प्रोटोकॉल के तहत किया गया
हालांकि, सरकार की ओर से इसे पूरी तरह प्रशासनिक और प्रोटोकॉल के तहत किया गया फैसला बताया जाता रहा है. सरकारी तर्क है कि संबंधित जिलों के जनप्रतिनिधियों को सरकारी आयोजनों में आमंत्रित करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर समय-समय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं, लेकिन निलंबित विधायकों की सरकारी कार्यक्रमों में लगातार मौजूदगी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है.
कांग्रेस के बीच जारी सियासी खींचतान
वन महोत्सव के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और अधिक से अधिक पौधारोपण को बढ़ावा देना है. लेकिन इस बार पौधारोपण के साथ-साथ इन कार्यक्रमों पर राजनीतिक नजरें भी टिकी रहेंगी. खासकर इसलिए क्योंकि सरकार और कांग्रेस के बीच जारी सियासी खींचतान के बीच निलंबित विधायकों को लगातार सरकारी मंचों पर जगह मिलना आने वाले समय की राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है.
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