Lalu Yadav IRCTC Case: राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. दरअसल, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है. ये मामला उस दौर से जुड़ा है, जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे. विशेष जज विशाल गोगने ने मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने कहा कि सात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध को लेकर मजबूत संदेह है. अदालत ने ये भी कहा कि जांच की प्रकृति, उसका समय और पूरा घटनाक्रम राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित नजर नहीं आता. आरोपियों की तरफ से जांच को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ने की दलील दी गई थी.
क्या है पूरा मामला?
ये मामला साल 2004 का है. उस समय लालू प्रसाद यादव UPA I सरकार में रेल मंत्री थे. CBI की FIR के मुताबिक, रेलवे के दो IRCTC होटलों के रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया था. आरोप है कि इस सौदे के बदले पटना में जमीन का एक टुकड़ा रिश्वत के रूप में हासिल किया गया. ये जमीन एक कथित बेनामी कंपनी के जरिए ट्रांसफर किए जाने का आरोप है. इस कंपनी का संबंध सरला गुप्ता से बताया गया है. वो पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी हैं. जांच एजेंसियों का आरोप है कि होटल टेंडर में कथित फायदा पहुंचाने के बदले जमीन का लेनदेन हुआ.
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ED की एंट्री कैसे हुई?
CBI ने इस मामले में 5 जुलाई 2018 को FIR दर्ज की थी. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इसी FIR के आधार पर PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया. ED ने कथित अपराध से हुई कमाई की जांच की. एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस पैसे और संपत्तियों को कुछ कंपनियों के जरिए घुमाया गया. इस केस में सुजाता होटल्स के निदेशक विजय कोचर और विनय कोचर सहित कई बाकी नाम भी शामिल हैं. डिलाइट मार्केटिंग कंपनी, जिसे अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता है. तत्कालीन IRCTC मैनेजिंग डायरेक्टर पीके गोयल का नाम भी CBI की FIR में है.
पहले ही तय हो चुके हैं आरोप
ये पहली बार नहीं है जब इस मामले में लालू परिवार के खिलाफ अदालत में आरोप तय हुए हैं. पिछले साल अक्टूबर में CBI से जुड़े केस में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और बाकी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, साजिश और संबंधित धाराओं में आरोप तय किए गए थे. अब ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस में भी आरोप तय करने का आदेश आया है. हालांकि, यहां ये समझना जरूरी है कि आरोप तय होना दोष साबित होना नहीं है. अब मामले में आगे सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया चलेगी. दिल्ली कोर्ट के इस आदेश के बाद बिहार की राजनीति में भी इस मामले को लेकर हलचल बढ़ना तय है. लालू परिवार के लिए ये कानूनी लड़ाई अब एक और अहम मोड़ पर पहुंच गई है.
News Source: PTI
