Rupee Falls: भारतीय रुपये की कमजोरी का सिलसिला एक बार फिर देखने को मिला. गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 44 पैसे कमजोर होकर 95.52 के स्तर पर बंद हुआ. रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मानी जा रही हैं. कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इससे भारत के लिए आयात लागत बढ़ने की चिंता भी तेज हो रही है. गुरुवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.15 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. कारोबार के दौरान इसमें कमजोरी बढ़ी और आखिर में ये 95.52 पर बंद हुआ. इससे एक दिन पहले बुधवार को रुपया 34 पैसे टूटकर 95.08 के स्तर पर बंद हुआ था. यानी लगातार दूसरे कारोबारी दिन रुपये पर दबाव बना रहा.
तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार रुपये की कमजोरी सिर्फ डॉलर की मजबूती की कहानी नहीं है. असली दबाव महंगे कच्चे तेल से आता दिख रहा है. कच्चा तेल 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग भी बढ़ सकती है. कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, रुपये पर फिलहाल कई तरह के दबाव एक साथ काम कर रहे हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की बिकवाली फिर शुरू हुई है. जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेश का रुख पॉजिटिव था, लेकिन सितंबर में तस्वीर बदलती नजर आ रही है. इसके अलावा अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है.
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RBI बना सहारा
हालांकि, रुपये के लिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI बाजार में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. उसकी मौजूदगी रुपये को बहुत ज्यादा फिसलने से रोकने में मदद कर रही है. इसके अलावा भारत की मजबूत घरेलू आर्थिक ग्रोथ और 740 अरब डॉलर से ज्यादा का रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार भी देश के लिए बड़ा सुरक्षा कवच है. HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के अनुसार, पिछले हफ्ते रुपये को मिली बढ़त अब काफी हद तक खत्म हो गई है. महंगे कच्चे तेल, विदेशी शेयर बाजार से लगातार बिकवाली और डॉलर की डिमांड ने रुपये पर दबाव बनाया है.
शेयर बाजार में रही तेजी
दिलचस्प बात ये है कि रुपये की कमजोरी के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेजी रही. सेंसेक्स 138.36 अंक चढ़कर 74,902.59 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 46.30 अंक बढ़कर 23,477.80 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में 438.24 करोड़ रुपये की बिकवाली की. ऐसे में अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर रहेगी. अगर तेल 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है और विदेशी निकासी जारी रहती है, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है.
News Source: PTI
Stock Market में मामूली तेजी, लेकिन 100 डॉलर के पार कच्चा तेल बना बाजार की सबसे बड़ी टेंशन
