Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) के सरसंघचालक/प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उनके इस बयान ने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले के बयान का भी समर्थन किया है. आरएसएस प्रमुख ने पाकिस्तान के साथ बातचीत करने का समर्थन किया है. उन्होंने यह बात शनिवार को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आरएसएस के शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित एक संवाद सत्र के दौरान कहा.
बता दें कि पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते तनाव वाले रहे हैं. बीते महीने पूरा देश पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ बीते साल भारतीय सशस्त्र बलों के द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह मनाया था. भारत की ओर से यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में आतंकियों के द्वारा किए गए हमले में एक नेपाली नागरिक सहित कुल 25 भारतीय पर्यटकों की मौत के बाद लॉन्च किया गया था. इस घटना ने देश भर में पाकिस्तान और आतंक के खिलाफ लोगों में गुस्सा भर दिया था.
पाकिस्तान के कई लोग आरएसएस की करते हैं प्रशंसा – भागवत
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले की पाकिस्तान के साथ संवाद की वकालत करने वाली टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि वह पड़ोसी देश के लोगों के बारे में बात कर रहे थे.
मई में पीटीआई वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में होसबले द्वारा की गई टिप्पणियों पर आरएसएस के दृष्टिकोण के बारे में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, मोहन भागवत ने कहा कि संगठन पाकिस्तान की स्थिति के संबंध में केंद्र सरकार की नीति का पालन करेगा. उन्होंने कहा, “लेकिन पाकिस्तान में बहुत से लोग मानते हैं कि भारत का विभाजन गलत था और वहां के कई पत्रकार आरएसएस और उसके कार्यों की प्रशंसा करते हैं. वहां पाकिस्तान विरोधी और दो-राष्ट्र सिद्धांत के विरुद्ध लोगों की एक स्पष्ट अंतर्धारा मौजूद है और उनका कहना है कि साथ रहना बेहतर था.”
संवाद के द्वार खुले रखने होंगे- मोहन भागवत
भागवत ने कहा कि अगर भविष्य में भारत को पाकिस्तान को इस कदर हराना है कि उसकी भरपाई न हो सके, तो वहां के लोगों को भारत के दायरे में लाना होगा या उन्हें उसी देश में शांतिपूर्वक रहने में सक्षम बनाना होगा. आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा, “और इसके लिए संवाद के द्वार खुले रखने होंगे.”
भागवत ने कहा, “हम हिटलर जैसे नहीं हैं. यह हमारा स्वभाव या हमारा तरीका नहीं है. इसलिए हमें कुछ रास्ते खुले रखने होंगे. हमें अन्याय और अत्याचार को खत्म करना चाहिए, लेकिन हमें अच्छाई को भी संरक्षित करना चाहिए.” भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस की किसी भी राष्ट्र के संबंध में कोई स्वतंत्र विदेश नीति नहीं है और वह केंद्र सरकार के रुख का अनुसरण करती है.
क्या बोले थे होसबले?
बीते दिनों न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ एक इंटरव्यू में RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने पाकिस्तान को लेकर कई बातें कही थी. इंटरव्यू के दौरान जब होसबले से पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान से कैसे निपटना चाहिए, तो उन्होंने कहा था, “अगर पाकिस्तान पुलवामा जैसी घटनाएं पैदा करने की कोशिश कर रहा है, तो हमें स्थिति के अनुसार उचित जवाब देना होगा, क्योंकि किसी देश और राष्ट्र की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करना जरूरी है और मौजूदा सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और इसका ख्याल रखना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा था, “लेकिन साथ ही, हमें दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए. हमें हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए. इसीलिए राजनयिक संबंध कायम हैं, व्यापार और वाणिज्य जारी है और वीजा दिए जा रहे हैं. इसलिए हमें इन्हें रोकना नहीं चाहिए, क्योंकि बातचीत के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना चाहिए.”
‘पाक संग बातचीत’, RSS महासचिव के बयान पर क्या बोले पूर्व आर्मी चीफ और फारूक अब्दुल्ला
News Source: PTI
