JUDICIAL OFFICER: कर्नाटक में एक अजीब मामला सामने आया है. एक जज की कार को ओवरटेक करना दो पहिया सवारों को महंगा पड़ गया. ओवरटेक करना जज को इतना नागवार लगा कि वह बाइक सवारों को रोककर सड़क पर ही लड़ने लगीं और पुलिस बुलाकर गिरफ्तार करा दिया. इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने मालूर की सिविल जज गायत्री के खिलाफ रोड रेज (सड़क पर लड़ाई) केस में सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने एक महिला न्यायिक अधिकारी के बर्ताव पर कड़ी नाराजगी भी जताई है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मालर की प्रिंसिपल सिविल जज गायत्री ने अपनी निजी कार को ओवरटेक करने वाले दोपहिया सवारों का पीछा कर उनके साथ सड़क पर बहस की थी.
जज पर नाराज हुआ हाई कोर्ट
इस घटना का CCTV फुटेज देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि पहली नज़र में यह व्यवहार एक जज के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है. जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि सिर्फ जज होने से किसी को अहंकार या ईगो दिखाने की अनुमति नहीं मिल जाती. आरोप है कि जज ने अपने पद का दुरुपयोग कर उन नागरिकों की गिरफ्तारी करवाई. हाई कोर्ट ने इस पद के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रही पुलिस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है. इसके साथ ही, मामले को आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया है. राज्य लोक अभियोजक ने बताया कि दोपहिया वाहन पर केवल दो लोग सवार थे. हालांकि, न्यायिक अधिकारी के कहने पर तीसरे आरोपी एक 70 वर्षीय व्यक्ति को भी हिरासत में ले लिया गया.
न्यायिक अधिकारी का व्यवहार अशोभनीय
आदेश में कहा गया कि यह हैरानी की बात है कि इन याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए अपराधों के मामले में उन्हें सिर्फ इसलिए हिरासत में ले लिया गया क्योंकि शिकायतकर्ता एक न्यायिक अधिकारी थीं. इसका मतलब यह नहीं है कि नागरिकों के साथ उस न्यायिक अधिकारी के कहने पर ऐसा व्यवहार किया जाए. कोर्ट ने कहा कि वीडियो या सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो देखने से साफ पता चलता है कि न्यायिक अधिकारी ने ऐसा व्यवहार किया है जो उनके पद के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है.
कोर्ट ने जांच पर लगाई रोक
न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने कहा कि अगर वीडियो पर गौर किया जाए तो यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि एक न्यायिक अधिकारी के लिए कार से उतरना और एक आम आदमी के साथ झगड़ा करना पूरी तरह से अशोभनीय है, जिसने केवल एक न्यायिक अधिकारी की कार को ओवरटेक करने का अपराध किया था. कहा गया कि न्यायिक अधिकारी के पद के दुरुपयोग का उदाहरण उत्कृष्ट नहीं बन सकता. अदालत ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आगे की कार्यवाही और जांच पर रोक लगाते हुए एक अंतरिम आदेश पारित किया. कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया.
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News Source: PTI
