Home Top News चुनाव आयोग को SIR का अधिकार, शक्तियां रहेंगी बरकरार: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

चुनाव आयोग को SIR का अधिकार, शक्तियां रहेंगी बरकरार: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

by Neha Singh 27 May 2026, 11:41 AM IST (Updated 27 May 2026, 12:16 PM IST)
27 May 2026, 11:41 AM IST (Updated 27 May 2026, 12:16 PM IST)
SC Verdict on SIR

SC Verdict on SIR: सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन (SIR) के बारे में बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि चुनाव आयोग के पास स्पेशल रिवीजन (SIR) करने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) करने के चुनाव आयोग के अधिकार को सही ठहराया. कोर्ट ने कहा कि SIR का इस्तेमाल करके ECI को अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन करते हुए नहीं देखा जा सकता. इसे “अल्ट्रा वायर्स” यानी शक्तियों से परे भी नहीं कहा जा सकता.

CJI सूर्यकांत का फैसला

SIR पर, CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पार्टियों की अलग-अलग दलीलों पर विचार करने और घटनाओं के क्रम, पार्टियों द्वारा पेश की गई दलीलों और रिकॉर्ड में मौजूद मटीरियल को रिव्यू करने के बाद, हमारा मानना ​​है कि इन मुद्दों का एनालिसिस करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा हम इस बात से भी संतुष्ट हैं कि SIR का मकसद सीधे तौर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक लक्ष्य से जुड़ा है. SC का मानना ​​है कि EC के पास संवैधानिक अधिकार और रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत इलेक्टोरल रोल का SIR करने का अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि तेजी से शहरीकरण और बड़े पैमाने पर माइग्रेशन एसआईआर के लिए सही कारण थे.

‘नागरिकता तय नहीं करता SIR’

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि SIR के दौरान, इलेक्शन कमीशन किसी की नागरिकता तय नहीं करता, बल्कि सिर्फ यह देखता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने के लायक है या नहीं. कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया किसी को नागरिकता नहीं देता या उससे वंचित नहीं करता. कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम गैर-नागरिक होने के शक में हटाए गए थे, उनके मामले चार हफ्ते के अंदर संबंधित एजेंसियों, जैसे गृह मंत्रालय और विदेशी ट्रिब्यूनल को भेजे जाएं, ताकि वे नागरिकता पर आखिरी फैसला ले सकें.

विपक्षी पार्टियों ने दायर की थी याचिका

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), योगेंद्र यादव, महुआ मोइत्रा, मनोज झा, केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले ने इलेक्शन कमीशन के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थीं. ये पिटीशन मुख्य रूप से जून 2025 में बिहार में SIR लागू होने के बाद फाइल की गई थीं. इन याचिकाओं में इलेक्शन कमीशन की वोटर रोल को रिवाइज करने और नाम जोड़ने/हटाने की शक्तियों पर सवाल उठाए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इलेक्शन कमीशन के SIR प्रोसेस को सही ठहराया और साफ किया कि कमीशन के पास यह संवैधानिक अधिकार है.

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News Source: PTI

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