Rajasthan Fighter Plane Crashed: राजस्थान में फाइटर जेट हादसे के बाद उठा सवाल, जानिए कैसे होता है मलबे का निपटारा और कौन करता है इसकी जांच.
Rajasthan Fighter Plane Crashed: राजस्थान के चुरू जिले में रतनगढ़ कस्बे के पास एक वायुसेना का फाइटर जेट क्रैश हो गया. इस हादसे में पायलट की मौत हो गई और विमान का मलबा खेतों में दूर-दूर तक फैल गया. जब इस तरह की कोई दुर्घटना होती है, तो अक्सर लोग यह सोचते हैं कि हादसे के बाद उस मलबे का क्या होता है? क्या उसे वहीं छोड़ दिया जाता है या फिर उसका कोई उपयोग होता है? आइए जानते हैं विमान दुर्घटना के बाद मलबे को लेकर क्या होता है प्रोसेस.
सबसे पहले क्या होता है जब कोई विमान क्रैश होता है?
जब भी कोई फाइटर जेट या सामान्य विमान दुर्घटनाग्रस्त होता है, सबसे पहले एयरफोर्स और स्थानीय प्रशासन की इमरजेंसी टीमें सक्रिय हो जाती हैं. घटनास्थल को पूरी तरह से सील कर दिया जाता है ताकि कोई अनजान व्यक्ति या मीडिया वहां तक न पहुंच सके और सबूतों से छेड़छाड़ न हो. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां जांच प्रक्रिया शुरू करती हैं. मुख्य लक्ष्य होता है ब्लैक बॉक्स यानी फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को खोजना, जिससे यह पता चल सके कि विमान कैसे और क्यों क्रैश हुआ.
कैसे होता है मलबे का इस्तेमाल और जांच?

क्रैश के बाद जो मलबा बचता है, उसमें से हर पुर्जा महत्वपूर्ण होता है. विशेषज्ञों की टीम सबसे पहले यह देखती है कि कौन से हिस्से जांच के लिए जरूरी हैं. जैसे इंजन, विंग्स, कंट्रोल पैनल आदि को अलग किया जाता है और जांच के लिए लैब में भेजा जाता है. अगर किसी पुर्जे से संकेत मिलता है कि तकनीकी खराबी के कारण हादसा हुआ है, तो उसी दिशा में जांच आगे बढ़ती है. इसी से तय होता है कि हादसे की वजह मानव त्रुटि थी, तकनीकी खामी थी या कोई और कारण.
क्या होता है मलबे का अंतिम निपटान?
जांच पूरी होने के बाद जो मलबा काम का नहीं होता, उसका दो तरह से निपटारा होता है.पहला, कुछ मलबा वायुसेना खुद नष्ट करती है. दूसरा, जो स्क्रैप के लायक होता है, उसकी नीलामी की जाती है. कई बार पुरानी या अनुपयोगी मशीनों के पुर्जों को रिसाइक्लिंग के जरिए फिर से इस्तेमाल में लाया जाता है. लेकिन संवेदनशील और गोपनीय तकनीकों से जुड़े हिस्सों को कभी भी सार्वजनिक रूप से नहीं बेचा जाता.
फाइटर जेट क्रैश होने के बाद मलबा केवल एक टूटी-फूटी धातु का ढेर नहीं होता, बल्कि हर टुकड़ा जांच की अहम कड़ी बनता है. यह न केवल हादसे की वजह खोजने में मदद करता है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में जरूरी सबक भी देता है. इसलिए हादसे के बाद मलबे का सटीक और नियंत्रित निपटान बेहद अहम प्रक्रिया होती है, जो पूरी तरह से सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए की जाती है.
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