Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार के NDA में शामिल होने या भाजपा के साथ गठबंधन करने की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई है. दरअसल शरद पवार की महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के साथ हुई हालिया मुलाकातों ने इन चर्चाओं को हवा दी है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पवार भी NDA को समर्थन दे सकते हैं. शिवसेना उद्वव गुट में बग़ावत के बाद महाराष्ट्र की सियासत में एक फिर हलचल है.
महाराष्ट्र की सियासत में फिर भूचाल
इस बार हलचल पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार को लेकर है. शरद पवार की एक राजनीतिक मुलाक़ात ने महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला दिया है. सियासी कानाफूसी होने लगी है. दरअलस बुधवार को शरद पवार की डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात हुई थी. पवार और शिंदे की मुलाकात ने मुंबई से लेकर दिल्ली तक के सियासी माहौल को गर्मा दिया है. इस मुलाकात पर बकायदा एकनाथ शिंदे के दफ्तर की तस्वीरें सार्वजनिक भी की गईं. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या शरद पवार भी पाला बदलने वाले हैं. वेसे भी महाराष्ट्र की सियासत में शरद पवार को लेकर अटकलें पहले से चल रही थीं.
मुलाकात से अटकलों को हवा
शिदे और पवार मुलाकात ने अटकलों को हवा दी है. बस क्या था तल्ख बयानबाजी शुरु हो गई. शरद पवार एनडीए में आएंगे या नहीं इसका अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है. लेकिन इस अटकलों से एक तरफ़ एनडीए की राजनीति को हवा मिल रही है तो वहीं दूसरी तरफ़ शिवसेना उद्धव गुट हताश है. दरअसल पिछले महीने उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद पाला बदलकर शिंदे के साथ चले गए और अब शरद पवार के साथ शिदे की मुलाकात ने इस संभावना को और बल दे दिया है. हालंकि शरद पवार की पार्टी ने इस अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है.
इस मुलाकात के पीछे क्या लोकसभा का गणित है?
लोकसभा में विपक्षी दलों (जैसे टीएमसी और शिवसेना-यूबीटी) में हालिया टूट-फूट के बाद एनडीए का कुल आंकड़ा बढ़कर 324 सांसदों तक पहुंच गया है. मूल रूप से 2024 के चुनाव के बाद एनडीए के पास 293 सांसद थे. इसके बाद सहयोगी दलों (जैसे TDP, JDU, LJP) के अलावा टीएमसी (TMC) से बागी हुए 20 सांसदों और उद्धव ठाकरे की पार्टी (शिवसेना-यूबीटी) से अलग हुए 6 सांसदों के समर्थन से यह संख्या 324 हो गई है.
हालांकि, संविधान संशोधन जैसे बड़े फैसलों के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (360 वोट) के जादुई आंकड़े से यह संख्या अभी भी लगभग 41-42 सांसद पीछे है. इस गणित में DMK के 22 और समाजवादी पार्टी के 37 सांसद , एनसीपी के 8 लोकसभा सदस्य बहुमूल्य साबित हो सकते हैं. अगर DMK ने सरकार का साथ दिया तो यह आकड़ा आसानी से हासिल हो सकता है. वेसे महाराष्ट्र में कांग्रेस के पास 13 सांसद हैं. शरद पवार की पार्टी के पास 8 सांसद हैं. जबकि उद्धव की पार्टी शिवसेना यूबीटी के पास अब सिर्फ 3 सांसद बचे हैं क्योंकि उनके छह सांसद पाला बदल चुके हैं.
सियासत में कभी दरवाजे नहीं होते बंद
उधर एनडीए यानि महायुति की बात करें तो बीजेपी के पास 9 सांसद हैं, जबकि शिंदे का आंकड़ा अब 13 हो चुका है. एनसीपी के पास 1 सांसद हैं. हालंकि भाजपा इस मुद्दे पर चुप है. राजनीति के जानकार मानते हैं कि सियासत में क़भी सभी दरवाजे बंद नहीं होते. पवार अगर NDA की तरफ आते हैं तो वो चाहेंगे कि उनकी बेटी को महाराष्ट्र की राजनीति में स्टैबलिश की जाए , साथ ही दोनों ही गुट एकजुट हों. ऐसा तभी संभव है जब केंद्र सरकार कूछ हिंट दे.
शरद पवार राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं. एक दरवाजा हमेशा खुला रखते हैं, चाहे वो शिंदे हों या देवेंद्र फडणवीस हों. भले ही वो एनडीए में न जाएं लेकिन किसी मुद्दे पर एनडीए के साथ जा सकते हैं. अगर एनडीए परिसीमन का बिल लेकर आएगी तो पिछली बार शरद पवार की पार्टी ने विरोध किया था. लेकिन हो सकता है कि इस बार वो पाला बदल दे और पक्ष में वोट करें. शरद पवार से एकनाथ शिंदे की 15 मिनट की मुलाकात ने सियासी संकेत दिया है.
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