Aishwarya Rai Devdas Saree: बॉलीवुड में कई फिल्में आती हैं और आकर चली जाती हैं. वहीं, कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ अपनी बढ़िया कहानी या शानदार स्टारकास्ट की वजह से नहीं, बल्कि अपने विजुअल्स, कॉस्ट्यूम और भव्यता की वजह से हमेशा के लिए इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं. साल 2002 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की क्लासिक ‘देवदास’ ऐसी ही फिल्मों में शामिल है. इस फिल्म के शानदार सेट, शाही महल, बेहतरीन गाने और खूबसूरत कॉस्ट्यूम आज भी लोगों की यादों में एकदम ताजा हैं. फिल्म में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय बच्चन और माधुरी दीक्षित की दमदार एक्टिंग के साथ-साथ उनके लुक्स भी आज तक लोगों के जहन में बसे हुए हैं. खासतौर से पारो के किरदार में ऐश्वर्या राय बच्चन की साड़ियां आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे आइकॉनिक कॉस्ट्यूम्स में गिनी जाती हैं. उनकी रॉयल ब्लू, हरी, लाल और सफेद कलर की साड़ियां आज भी फैशन की दुनिया में रेफरेंस मानी जाती हैं. शादी के ब्राइडल फोटोशूट से लेकर डिजाइनर कलेक्शन तक, ‘देवदास’ का असर आज भी साफ दिखाई देता है. साल 2002 में रिलीज हुई इस फिल्म ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन की दुनिया में भी एक नया बेंचमार्क स्थापित किया. हाल ही में फिल्म के कॉस्ट्यूम से जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं. डिजाइनर नीता लुल्ला ने बताया कि ऐश्वर्या की कुछ साड़ियां इतनी खास थीं कि आज उन्हें बिल्कुल उसी तरह दोबारा तैयार करना लगभग नामुमकिन है.

हर साड़ी के पीछे थी कहानी
फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन की रॉयल ब्लू साड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में रही. आमतौर पर भारतीय साड़ी की लंबाई साढ़े पांच से छह मीटर के आसपास होती है. लेकिन ‘देवदास’ के लिए तैयार की गई ये साड़ी करीब 10 मीटर लंबी थी. इतनी लंबी साड़ी का इस्तेमाल सिर्फ भव्यता दिखाने के लिए नहीं किया गया था. बड़े पर्दे पर इसका ड्रेप, पल्लू का फ्लो और चलते समय इसकी खूबसूरती को खास तरीके से डिजाइन किया गया था, ताकि हर फ्रेम किसी पेंटिंग जैसा दिखाई दे. शूटिंग के दौरान समय बचाने के लिए इस साड़ी को पहले से ही पूरी तरह प्लीट करके रखा जाता था. इससे इसे कुछ ही सेकंड में साड़ी को पहना जा सकता था और बार-बार ड्रेपिंग में समय नहीं लगता था.
अब नहीं मिलता ऐसा फैब्रिक
ऐश्वर्या राय वाली ब्लू साड़ी की सबसे बड़ी खासियत उसका फैब्रिक था. इसे एक दुर्लभ स्पन सिल्क से तैयार किया गया था, जो अब लगभग बाजार से गायब हो चुका है. इस फैब्रिक की चमक, उसकी बनावट और कैमरे पर उसका टेक्सचर आज मिलने वाले सिल्क से काफी अलग था. यही वजह है कि आज अगर कोई डिजाइनर बिल्कुल वैसी ही साड़ी बनाना भी चाहे, तो उसे उसी लेवल का रिजल्ट मिलना बहुत ज्यादा मुश्किल होगा. यही वजह है कि संजय लीला भंसाली की ‘देवदास’ के कई कॉस्ट्यूम आज भी यूनिक माने जाते हैं.
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पेटीकोट भी था खास
‘देवदास’ में कॉस्ट्यूम की हर छोटी-बड़ी चीज पर बराबर ध्यान दिया गया था. यहां तक कि साड़ी के नीचे पहना जाने वाला पेटीकोट भी सिंपल नहीं था. पेटीकोट को जामावर ब्रोकेड से तैयार किया गया था. इसके पीछे वजह थी कि, अगर किसी सीन में साड़ी थोड़ा ऊपर उठ जाए या एक्ट्रेस को दौड़ने वाला सीन करना हो, तब भी पूरा लुक शानदार दिखाई दे. यानी दर्शकों की नजर भले ही इस डिटेल पर न जाए, लेकिन कैमरे के सामने हर लेयर खूबसूरत दिखे, इसका फिल्म के डायरेक्टर और कॉस्ट्यूम डिजाइनर ने पूरा ध्यान रखा था.
महीनों तक चला काम
‘देवदास’ फिल्म जीतनी खूबसूरत लगी, उतनी ही मेहनत हर सीन को क्रिएट करने में लगी. यही वजह है कि फिल्म की साड़ियों पर की गई कारीगरी भी बहुत खास थी. इनमें जरदोजी, सिल्क थ्रेड, ऊन और हाथ से जड़े मोतियों का इस्तेमाल किया गया था. इन सभी एलिमेंट्स को इस तरह जोड़ा गया कि साड़ी बिल्कुल नई नहीं, बल्कि किसी पुराने शाही परिवार की विरासत जैसी महसूस हो. यही वजह है कि फिल्म के हर फ्रेम में पारो का लुक बहुत ही रॉयल और क्लासिक नजर आता है.

हर कलर में मैसेज
‘देवदास’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि भावनाओं, रिश्तों और सामाजिक परंपराओं की कहानी भी थी. यही वजह है कि संजय लीला भंसाली ने फिल्म में रंगों का चुनाव भी काफी सोच-समझकर किया था. पारो के शुरुआती लुक्स में हल्के रंग उसकी मासूमियत और सादगी को दिखाते हैं. शादी के बाद उसके कॉस्ट्यूम में गहरे और रॉयल रंग दिखाई देते हैं, जो उसके आत्मविश्वास, जिम्मेदारियों और नई पहचान को दर्शाते हैं. लाल रंग प्रेम और परंपरा का प्रतीक बनकर सामने आता है, जबकि सफेद रंग भावनात्मक संघर्ष को दिखाता है. यानी फिल्म में रंग सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि कहानी कहने का एक बड़ा और खास ज़रिया भी थे.
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हरी साड़ी भी बनी फैशन आइकन
अगर फिल्म की सबसे यादगार साड़ियों की बात हो और ऐश्वर्या राय की हरी साड़ी का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. सुपरहिट गाने ‘डोला रे डोला’ से पहले पारो के लुक में दिखाई गई हरी साड़ी की कढ़ाई पारंपरिक ढाकाई मोटिफ्स से प्रेरित थी. इसके ब्लाउज में मेश और सिल्क फैब्रिक का अनोखा मेल देखने को मिला, जिस पर बारीक जरदोजी का काम किया गया था. यही वजह है कि ‘देवदास’ में ऐश्वर्या राय का ये लुक आज भी बड़े-बड़े फैशन डिजाइनर्स और ब्राइडल स्टाइलिस्ट्स के लिए प्रेरणा देने का काम करता है.
6 महीने तक चली तैयारी
वैसे, ये बात जानकर ज़रा भी हैरानी नहीं होती कि, ‘देवदास’ के कॉस्ट्यूम तैयार करने के लिए लंबी रिसर्च की गई थी. फिल्म की कहानी बंगाल की पृष्ठभूमि पर आधारित थी, इसलिए वहां की पारंपरिक बुनाई, फैब्रिक, डिजाइन और टेक्सटाइल को भी गहराई से समझा गया था. इतना ही नहीं, करीब 6 महीने तक रिसर्च करने के बाद फिल्म के हर किरदार के लिए अलग-अलग कॉस्ट्यूम तैयार किए गए, जिससे लोगों को स्क्रीन पर उस दौर की झलक एकदम सच्ची लगे.

पारो और चंद्रमुखी में अंतर
साल 2002 में रिलीज़ हुई इस कल्ट क्लासिक फिल्म की एक और खास बात ये थी कि पारो और चंद्रमुखी के कॉस्ट्यूम पूरी तरह अलग पहचान रखते थे. ऐश्वर्या राय यानी पारो के कपड़ों में बंगाल की पारंपरिक सादगी, शालीनता और गरिमा दिखाई देती है. वहीं, माधुरी दीक्षित यानी चंद्रमुखी के लुक में शाही ठाठ, भारी कढ़ाई, चमकदार रंग और नृत्य की खूबसूरती को पहले रखा गया है. दोनों किरदारों के कपड़े उनकी जिंदगी, सोच और सामाजिक पहचान को बिना कुछ कहे दर्शकों तक पहुंचा देते हैं.
सबसे बड़ी पहचान
डायरेक्टर संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों में हर फ्रेम को एक पेंटिंग की तरह पेश करने के लिए जाने जाते हैं. उनकी फिल्म ‘देवदास’ में भी यही देखने को मिला. बड़े-बड़े महल, शानदार झूमर, रंग-बिरंगे सेट, खूबसूरत लाइटिंग और शाही कॉस्ट्यूम मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जो दर्शकों को उस दौर में ले जाता है. यही वजह है कि ‘देवदास’ आज भी विजुअल मास्टरपीस मानी जाती है.
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आज भी दिखता है असर
‘देवदास’ रिलीज होने के बाद भारतीय ब्राइडल फैशन में बड़ा बदलाव देखने को मिला. भारी बॉर्डर वाली साड़ियां, चौड़े पल्लू, रिच सिल्क, पारंपरिक जरदोजी और क्लासिक ब्लाउज डिजाइन एक बार फिर ट्रेंड में आ गए. आज भी कई फैशन डिजाइनर अपने ब्राइडल कलेक्शन में इस फिल्म से प्रेरित डिजाइन पेश करते हैं. शादी के फोटोशूट, फैशन शो और दुल्हनों के लुक में ‘देवदास’के स्टाइल की झलक अक्सर देखने को मिल जाती है.
कान्स में भी छाया
साल 2002 में जब ‘देवदास’ का प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ, तब ऐश्वर्या राय ने भारतीय साड़ी पहनकर रेड कार्पेट पर एंट्री की थी. उस दौर में अंतरराष्ट्रीय रेड कार्पेट पर ज्यादातर सितारे वेस्टर्न गाउन पहनते थे. ऐसे में ऐश्वर्या राय की साड़ी, पारंपरिक सोने के गहने और क्लासिक स्टाइल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. उनके इस लुक ने ये साबित कर दिया कि भारतीय टेक्सटाइल और पारंपरिक पहनावा किसी भी फैशन मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकता है.

‘देवदास’ का क्रेज
‘देवदास’ को रिलीज हुए 24 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके कॉस्ट्यूम आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं. सोशल मीडिया पर बीच-बीच में ऐश्वर्या राय बच्चन की ब्लू और ग्रीन साड़ी की तस्वीरें वायरल होती रहती हैं. फैशन स्टूडेंट्स इन लुक्स को स्टडी मटेरियल की तरह देखते हैं, जबकि डिजाइनर्स इन्हें भारतीय ब्राइडल फैशन की सबसे बेहतरीन मिसालों में गिनते हैं. कई बार इन साड़ियों को दोबारा बनाने की कोशिश भी हुई, लेकिन रेयर फैब्रिक, हाथ की बारीक कारीगरी, महीनों की रिसर्च और उस दौर की टेक्सटाइल तकनीक की वजह से बिल्कुल वैसा रिजल्ट हासिल नहीं हो सका. यही वजह है कि ‘देवदास’ की साड़ियां सिर्फ फिल्मी कॉस्ट्यूम नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा, कला और फैशन इतिहास की अमूल्य धरोहर बन चुकी हैं. इनकी खूबसूरती सिर्फ डिजाइन में नहीं, बल्कि उस मेहनत, रिसर्च, पारंपरिक कारीगरी और सिनेमाई सोच में छिपी है, जिसने इन्हें हमेशा के लिए आइकॉनिक बना दिया. इसलिए आज भी जब बॉलीवुड की सबसे यादगार साड़ियों की बात होती है, तो ऐश्वर्या राय बच्चन की ‘देवदास’ वाली साड़ियां. साथ ही माधुरी दीक्षित के खूबसूरत लहंगे सबसे पहले याद आते हैं.
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