UP Politics: पश्चिमी यूपी में 2027 के चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है. जयंत चौधरी को लेकर अखिलेश यादव के चवन्नी से रुपया वाले बयान के बाद अब सहारनपुर सियासी अखाड़ा बन गया है. जाट समाज की नाराजगी के बीच अखिलेश यादव बुधवार को सहारनपुर पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय नेताओं और लोगों से मुलाकात की और चौधरी रुद्रसेन के घर जाकर भी बातचीत की. 6 सितंबर को प्रस्तावित अखिलेश यादव की बड़ी रैली का कार्यक्रम भी बदल गया है. सपा की तरफ से रैली स्थगित होने की वजह मौसम बताई गई है, जबकि आरएलडी और बीजेपी इसे जाट समाज की नाराजगी से जोड़कर हमला बोल रहे हैं.
तीन को जयंत की ‘स्वाभिमान रैली’
उधर, जयंत चौधरी 3 सितंबर को सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में ‘स्वाभिमान रैली’ करने जा रहे हैं. ऐसे में अखिलेश का दौरा और जयंत की रैली दोनों को पश्चिमी यूपी में अपने-अपने सियासी आधार को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. सहारनपुर में आज सियासत का तापमान बढ़ा हुआ है. एक तरफ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में अपनी सियासी जमीन तलाशते नजर आए तो दूसरी तरफ उनके दौरे से ठीक एक दिन बाद आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी इसी इलाके में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में हैं. जयंत चौधरी को लेकर अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान के बाद पश्चिमी यूपी में बयानबाजी तेज हुई है.
सहारनपुर में सपा की रैली का कार्यक्रम बदला
खुद जयंत चौधरी ने भी कहा है कि राजनीतिक हमला उन पर किया जाए, लेकिन पूरे समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है. पहले 6 सितंबर को सहारनपुर में अखिलेश यादव की बड़ी रैली प्रस्तावित थी, लेकिन अब रैली का कार्यक्रम बदल गया है. समाजवादी पार्टी अब सीधे किसान और चौधरी चरण सिंह की विरासत के जरिए पश्चिमी यूपी में अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रही है. सपा का कहना है कि जाट समाज किसानों के मूल सवालों को समझता है. गन्ने का भुगतान, खाद और किसानों की समस्याएं आज भी बड़े मुद्दे हैं. सपा प्रवक्ता आजम खान का दावा है कि चौधरी चरण सिंह की विरासत को अगर कोई आगे बढ़ा रहा है तो वह समाजवादी विचारधारा है.
बीजेपी ने अखिलेश पर साधा निशाना
एक तरफ अखिलेश यादव जाट और किसान राजनीति के बीच अपनी जगह तलाश रहे हैं, तो दूसरी तरफ जयंत चौधरी अपनी राजनीतिक विरासत और पश्चिमी यूपी में आरएलडी की पकड़ का संदेश देने की तैयारी में हैं. बीजेपी सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साध रही है और दावा कर रही है कि जयंत चौधरी पर टिप्पणी के बाद पश्चिमी यूपी में सपा के खिलाफ नाराजगी है. बीजेपी का कहना है कि अखिलेश यादव अगर माफी नहीं मांगते हैं तो 2027 में पश्चिमी यूपी में समाजवादी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा. सियासत सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है.
जाट-किसान वोट बैंक पर नजर
इसके पीछे 2027 का बड़ा चुनावी गणित है. पश्चिमी यूपी में जाट, किसान और दूसरे सामाजिक समीकरणों को साधना सपा, आरएलडी और बीजेपी तीनों के लिए अहम है. आरएलडी बीजेपी के साथ NDA में है. सपा अपने पुराने सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश में है और बीजेपी पश्चिमी यूपी में अपने गठबंधन की पकड़ को और मजबूत करने का दावा कर रही है. सवाल अब सिर्फ बयान का नहीं बल्कि 2027 में पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण और जाट-किसान वोट बैंक पर पकड़ का है. देखना होगा अखिलेश का डैमेज कंट्रोल कितना असरदार होता है और जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली पश्चिमी यूपी की सियासत में कितना बड़ा संदेश देती है.
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