Home Latest News & Updates गुजरात में बिजनेस करना हुआ आसान: MSME को स्टांप ड्यूटी में 80% तक राहत, GIDC एमनेस्टी स्कीम को मंजूरी

गुजरात में बिजनेस करना हुआ आसान: MSME को स्टांप ड्यूटी में 80% तक राहत, GIDC एमनेस्टी स्कीम को मंजूरी

by Nikul Patel 2 September 2026, 1:14 PM IST
2 September 2026, 1:14 PM IST
Doing business Gujarat become easy

Gujarat News : गुजरात में कारोबार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरकार ने GIDC एमनेस्टी स्कीम लागू करने का निर्णय लिया है. इस योजना के तहत पात्र MSME उद्योगों को पुराने GIDC प्लॉट ट्रांसफर मामलों में बकाया स्टांप ड्यूटी और पेनल्टी के बोझ से बड़ी राहत मिलेगी. सरकार के इस फैसले को गुजरात में Ease of Doing Business यानी कारोबार को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इसका उद्देश्य पुराने स्टांप ड्यूटी विवादों को सुलझाने के साथ-साथ औद्योगिक संपत्तियों के दस्तावेजों को कानूनी और पारदर्शी तरीके से नियमित करना है.

रजिस्टर्ड लीज डीड की जगह एलॉटमेंट लेटर

GIDC के औद्योगिक प्लॉट या शेड के ट्रांसफर के दौरान कई पुराने मामलों में रजिस्टर्ड लीज डीड की जगह एलॉटमेंट लेटर, सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट या अन्य दस्तावेजों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की गई थी. ऐसे मामलों में कई बार निर्धारित स्टांप ड्यूटी का भुगतान नहीं हो पाया. अब जब वर्तमान प्लॉट धारक को बैंक लोन, संपत्ति का ट्रांसफर या अन्य कानूनी प्रक्रिया के लिए लीज डीड रजिस्टर्ड करानी पड़ती है, तो पुराने ट्रांजैक्शन की बकाया स्टांप ड्यूटी के साथ भारी पेनल्टी भी चुकानी पड़ती है. इससे मौजूदा उद्योगकारों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा था. उद्योगकारों और GIDC एसोसिएशनों की ओर से मुख्यमंत्री के सामने इस समस्या को उठाया गया था. सरकार ने इन प्रस्तुतियों पर विचार करते हुए एमनेस्टी स्कीम लागू करने का फैसला किया है.

MSME को स्टांप ड्यूटी में 80% तक छूट

प्रस्तावित योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पात्र MSME उद्योगों को लागू स्टांप ड्यूटी में 80 प्रतिशत तक की राहत दी जाएगी. पात्र मामलों में केवल 20 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और लागू पेनल्टी का भुगतान करना होगा. हालांकि, यदि 20 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और पेनल्टी की कुल राशि मूल स्टांप ड्यूटी से कम होती है, तो मूल स्टांप ड्यूटी के बराबर राशि वसूल की जाएगी. इससे पुराने मामलों के कारण वर्तमान प्लॉट धारकों पर पड़ रहे भारी वित्तीय बोझ में काफी कमी आने की उम्मीद है. इस योजना का लाभ मुख्य रूप से MSME यानी माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज को देने का प्रस्ताव है। इसके लिए संबंधित उद्योग के पास वैध उद्यम सर्टिफिकेट होना जरूरी होगा.

संपत्ति के ट्रांसफर से जुड़े अन्य पात्र मामले शामिल होंगे

योजना में 30 जून 2025 तक हुए पात्र पुराने लेन-देन को शामिल किया जाएगा. इनमें एलॉटमेंट लेटर, शेयर ट्रांसफर, लीज/सब-लीज और संपत्ति के ट्रांसफर से जुड़े अन्य पात्र मामले शामिल होंगे. सरकार ने 1 जनवरी 2018 से पहले हुए ट्रांसफर मामलों के लिए भी विशेष राहत का प्रस्ताव रखा है. ऐसे मामलों में अंतिम ट्रांसफर डीड के आधार पर निर्धारित बाजार मूल्य के अनुसार लागू स्टांप ड्यूटी में 80 प्रतिशत तक राहत दी जाएगी और शेष 20 प्रतिशत ड्यूटी के साथ लागू पेनल्टी ली जाएगी.

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स्टांप ड्यूटी पर 80 प्रतिशत राहत

वहीं, 1 जनवरी 2018 या उसके बाद हुए ऐसे पात्र ट्रांसफर मामलों में भी लागू स्टांप ड्यूटी पर 80 प्रतिशत राहत और शेष 20 प्रतिशत ड्यूटी तथा लागू पेनल्टी वसूलने का प्रस्ताव है. स्टांप ड्यूटी से जुड़े ऐसे मामले जिनमें सक्षम प्राधिकारी के सामने अपील की गई है और नियम के अनुसार 25 प्रतिशत राशि जमा कराई गई है, उन्हें भी निर्धारित शर्तों के तहत एमनेस्टी योजना का लाभ मिल सकेगा. इसी तरह जिन मामलों में कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, वहां याचिका वापस लेने की शर्त पर पात्रता के अनुसार योजना का लाभ देने का प्रस्ताव है. एमनेस्टी योजना का फायदा लेने वाले वर्तमान प्लॉट धारक को निर्धारित स्टांप ड्यूटी और पेनल्टी की राशि जमा करनी होगी. इसके साथ संबंधित संपत्ति की कानूनी रजिस्ट्री कराना अनिवार्य होगा. सरकार का उद्देश्य सिर्फ उद्योगकारों को आर्थिक राहत देना नहीं है, बल्कि पुराने संपत्ति लेन-देन को कानूनी और पारदर्शी रिकॉर्ड में लाना भी है.

उद्योगों को पुराने स्टांप ड्यूटी मामलों से राहत मिलेगी

राज्य सरकार के इस फैसले से एक तरफ MSME उद्योगों को पुराने स्टांप ड्यूटी मामलों से राहत मिलेगी. वहीं, दूसरी तरफ GIDC की औद्योगिक संपत्तियों के पुराने ट्रांसफर मामलों को नियमित करने में मदद मिलेगी. इससे बैंक लोन, संपत्ति हस्तांतरण और अन्य कारोबारी प्रक्रियाओं में आने वाली कानूनी अड़चनें कम हो सकती हैं. साथ ही पुराने मामलों के निपटारे से सरकार को लंबित स्टांप ड्यूटी की वसूली में भी तेजी आने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, GIDC एमनेस्टी स्कीम को गुजरात में ‘Ease of Doing Business’ को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है. सरकार का फोकस उद्योगकारों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पुराने विवादों का समाधान करने और राज्य में निवेश एवं औद्योगिक विस्तार के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल तैयार करने पर है.

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