BMC Elections: जहां एक ओर बहुप्रतीक्षित बीएमसी (BMC) चुनाव में मुंबईवासियों ने उत्साहपूर्वक मतदान किया, वहीं पॉश कोलाबा क्षेत्र के एक वार्ड में निराशाजनक मतदान हुआ.
BMC Elections: जहां एक ओर बहुप्रतीक्षित बीएमसी (BMC) चुनाव में मुंबईवासियों ने उत्साहपूर्वक मतदान किया, वहीं पॉश कोलाबा क्षेत्र के एक वार्ड में निराशाजनक मतदान हुआ. यहां केवल 20.88 प्रतिशत मत पड़े. अंतिम मतदान आंकड़ों के अनुसार, कोलाबा के कुछ हिस्सों को कवर करने वाले वार्ड 227 में 20.88 प्रतिशत मतदान हुआ, जो मुंबई के 227 वार्डों में सबसे कम है. यह वार्ड मुंबई के कुल 52.94 प्रतिशत मतदान का आधा भी हासिल नहीं कर सका, जिसका अर्थ है कि कुल 46,036 निवासियों में से केवल 9,614 ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इस पॉश इलाके के अन्य दो वार्डों 226 और 225 में क्रमशः 50.69 प्रतिशत और 45.59 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
कोलाबा में मतदाताओं की उदासीनता पर चिंता
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर के भाई व भाजपा उम्मीदवार मकरंद नरवेकर, जो चुनाव में सबसे धनी उम्मीदवार थे, ने वार्ड 226 से चुनाव लड़ा, जबकि उनके रिश्तेदार गौरवी शिवलकर नरवेकर को वार्ड 227 से मैदान में उतारा गया. कोलाबा मुख्य रूप से वार्ड 225, 226 और 227 के अंतर्गत आता है. यह मुंबई के सबसे विविधतापूर्ण इलाकों में से एक है, जिसमें मराठी भाषी परिवार, पारसी, मुस्लिम, ईसाई और सिंधी, साथ ही नौसेना प्रतिष्ठानों की उपस्थिति के कारण रक्षाकर्मी भी रहते हैं. यह इलाका ऐतिहासिक धरोहरों और आलीशान रिहायशी इमारतों से सुसज्जित है. सितंबर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने कोलाबा में मतदाताओं की उदासीनता पर चिंता जताई थी.
लोकतंत्र के उत्सव में पिछड़ा पॉश इलाका
तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कोलाबा और कल्याण पश्चिम जैसे शहरी क्षेत्रों में कम मतदान पर प्रकाश डाला था और नक्सल प्रभावित गढ़चिरोली और छत्तीसगढ़ के बस्तर की तुलना में इन निर्वाचन क्षेत्रों में भारी अंतर की ओर इशारा किया था, जहां पिछले चुनावों में क्रमशः 78 प्रतिशत और 68 प्रतिशत मतदान हुआ था. नगर निगम वार्ड 227, जो इलेक्ट्रिक हाउस से मुंबई के सबसे दक्षिणी छोर तक फैला है, में धनी व्यवसायी और कई रक्षाकर्मी रहते हैं. यहां प्रसिद्ध ससून डॉक, बीईएसटी उपक्रम का मुख्यालय, आईएमडी कार्यालय, टीआईएफआर और भारतीय नौसेना के अस्पताल आईएनएस अश्विनी के साथ-साथ अफगान चर्च जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलें भी हैं. हालांकि इसके पहले भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कोलाबा में मतदाताओं की उदासीनता पर चिंता जताने का भी असर इस BMC चुनाव में नहीं पड़ा.
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