Youth Unemployment: कांग्रेस ने शिक्षा और रोज़गार को लेकर सोमवार को मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है. कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि उसने युवा भारत के लिए शिक्षा से लेकर रोज़गार तक के पूरे रास्ते को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है. पार्टी ने दावा किया कि सरकार ने ऐसा शिक्षा सिस्टम दिया है जो महंगा है, ऐसी परीक्षाएं जिन पर युवा भरोसा नहीं कर सकते और ऐसी डिग्रियां जिनके साथ अक्सर नौकरी नहीं मिलती. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 से 29 साल की उम्र के लगभग 8.7 करोड़ भारतीय युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न काम कर रहे हैं और न ही कोई ट्रेनिंग ले रहे हैं.
युवाओं में बेरोजगारी दर 15.6%
रिपोर्ट में सब्सिडी वाले ट्रेनिंग प्रोग्राम की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है ताकि स्वरोज़गार को बढ़ावा दिया जा सके और स्थानीय मांग व उभरते सेक्टर के हिसाब से युवाओं को तैयार किया जा सके. खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार ने युवा भारत के लिए शिक्षा से लेकर रोज़गार तक के पूरे रास्ते को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है. नीति आयोग का अनुमान है कि 15 से 29 साल की उम्र के 8.7 करोड़ भारतीय युवा न तो शिक्षा में हैं, न रोज़गार में और न ही ट्रेनिंग में. इनमें से लगभग 88% युवा घरेलू कामों में लगे हैं. साथ ही, युवाओं में बेरोज़गारी दर 15.6% है. युवा महिलाओं में यह चौंकाने वाली 19.5% तक है. उन्होंने जुलाई 2026 के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) का हवाला देते हुए कहा.
ग्रेजुएशन के बाद नौकरियों पर उठाए सवाल
उन्होंने नरेंद्र मोदी से सवाल पूछे हैं: ग्रेजुएशन के बाद नौकरियां कहां हैं? 20 से 29 साल की उम्र के बेरोज़गार भारतीयों में 67% ग्रेजुएट हैं, जबकि 15 से 25 साल की उम्र के ग्रेजुएट युवाओं में बेरोज़गारी दर लगभग 40% है. परिवार अपनी बचत खर्च करते हैं, छात्र एजुकेशन लोन लेते हैं और डिग्रियां हासिल करते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि नौकरियां ही नहीं हैं. खड़गे ने पूछा कि हर साल 2 करोड़ नौकरियों के वादे का क्या हुआ. खड़गे ने कहा कि उस वादे के हिसाब से 12 सालों में भारत में 24 करोड़ नौकरियां होनी चाहिए थीं, लेकिन इसके बजाय लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं और सुरक्षित रोज़गार की जगह कॉन्ट्रैक्ट और पार्ट-टाइम काम ने ले ली है.
पूरी पीढ़ी का भविष्य खतरे में
उन्होंने आगे पूछा कि भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) को डेमोग्राफिक डिजास्टर (जनसांख्यिकीय आपदा) में कौन बदल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि महंगी और अपर्याप्त शिक्षा, पेपर लीक, भर्ती में देरी, स्किल्स गैप का बढ़ना और अच्छी क्वालिटी वाली नौकरियों का खत्म होना इन सबने एक पूरी पीढ़ी के भविष्य को खतरे में डाल दिया है. खड़गे ने कहा कि मोदी जी, आपने वादा किया था कि आप वो कर दिखाएंगे जो पिछली सरकारें 70 सालों में नहीं कर पाईं. आपने उस दावे को सच कर दिखाया है. एक ऐसा एजुकेशन सिस्टम जो महंगा है और जिसमें RSS का दखल है, ऐसी परीक्षाएं जिन पर युवा भारतीयों को भरोसा नहीं है, और ऐसी डिग्रियां जिनके साथ नौकरियां नहीं मिलतीं.
नीति आयोग की रिपोर्ट को बनाया हथियार
आयोग ने ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ (विकसित भारत@2047 के लिए स्किलिंग की नई सोच) नाम की रिपोर्ट में कहा है कि यह अनुमान 2021 में हुए नेशनल सैंपल सर्वे के 78वें राउंड के डेटा पर आधारित है. सबसे ज़्यादा असर सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने भारत के वर्कफोर्स और सीखने वालों को पांच हिस्सों में बांटा है – स्कूली शिक्षा, हायर एजुकेशन, फॉर्मल और इनफॉर्मल काम. NEET (शिक्षा, रोजगार और ट्रेनिंग में शामिल न होने वाले) युवा और महिलाएं. रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्र अक्सर अपनी मौजूदा आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पैसे देकर स्किलिंग नहीं कर पाते हैं. आयोग ने NEET युवाओं को ऐसे युवाओं के तौर पर परिभाषित किया है जिनकी उम्र 15 से 29 साल के बीच है और जो शिक्षा, रोजगार या ट्रेनिंग में शामिल नहीं हैं, साथ ही वे बेरोजगार भी हैं.
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News Source: PTI
