Women Reservation Bill 2026: मानसून सत्र खत्म हुए भले ही 11 दिन बीत चुके हों, लेकिन संसद का सियासी एजेंडा अभी खत्म नहीं हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार अगले दो से तीन हफ्तों में संसद की दोबारा बैठक बुलाने पर विचार कर सकती है. मुद्दा है महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक. सरकार की कोशिश है कि पहले दोनों बिलों के लिए जरूरी समर्थन जुटाया जाए और उसके बाद ही संसद की बैठक बुलाने का फैसला किया जाए. महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर संसद के एजेंडे में लौट सकता है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर संसद का सत्र दोबारा बुलाने की संभावना पर विचार कर रही है.
बिल लाने से पहले संख्या बल पर फोकस
खास बात ये है कि मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बावजूद सरकार ने इन दोनों मुद्दों पर राजनीतिक दलों से बातचीत का सिलसिला जारी रखा था. 11 दिन बीत जाने के बावजूद राष्ट्रपति ने अभी तक मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया है. इसका मतलब है कि सरकार जब चाहे मानसून सत्र का एक्सटेंडेड सेशन बुला सकती हैं. सरकार की नजर सिर्फ बिल पेश करने पर नहीं, बल्कि बिल पास कराने के लिए जरूरी नंबर जुटाने पर है. सबसे बड़ा सवाल 360 का आंकड़ा है. महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव अगर संविधान संशोधन के जरिए लाए जाते हैं, तो इन्हें पारित कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत विशेष बहुमत की जरूरत होगी. लोकसभा में मौजूदा प्रभावी सदस्य संख्या के आधार पर दो-तिहाई का आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है 360 के आसपास समर्थन का आंकड़ा हासिल करना.
DMK और NCP (शरद पवार) की भूमिका पर नजर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार जरूरी संख्या जुटाने के बाद जब निश्चिंत हो जायेगी , तभी बिल लाएगी. सरकार के पक्ष में मौजूदा राजनीतिक समीकरण पहले की तुलना में मजबूत होने का दावा किया जा रहा है. एनडीए के अलावा कुछ विपक्षी सांसदों के समर्थन और हाल में बदले राजनीतिक समीकरणों को सरकार अपने पक्ष में देख रही है. लेकिन इसके बावजूद दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अभी भी चुनौती बना हुआ है. यही वजह है कि सरकार की नजर उन दलों पर है जो इन दोनों विधेयकों पर समर्थन दे सकते हैं. सरकार की संभावित रणनीति में विपक्ष के उन दलों से संवाद अहम है जो महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर अलग रुख रखते हैं. खास तौर पर डीएमके और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसे दलों के रुख पर नजर रहेगी. सरकार के लिए चुनौती यह है कि समर्थन जुटाने के साथ-साथ राजनीतिक सहमति भी बनाई जाए. परिसीमन सिर्फ सीटों की संख्या का सवाल नहीं है. लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्विन्यास का सीधा असर राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है.
सरकार ने नहीं खोले हैं अपने पत्ते
दूसरी तरफ महिला आरक्षण लागू होने पर लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का रास्ता खुलेगा यानी दोनों मुद्दे आने वाले वर्षों की चुनावी राजनीति को प्रभावित करने वाले बड़े संवैधानिक फैसले हो सकते हैं. तो क्या सरकार पहले नंबर पूरा करेगी और फिर संसद बुलाएगी? क्या 15 सितंबर से पहले महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर दोबारा संसद में बहस होगी? फिलहाल सरकार ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और नंबर जुटाने की कवायद ने इन दोनों विधेयकों को एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अब नजर इस बात पर है कि सरकार 360 के जादुई आंकड़े तक कैसे पहुंचती है और संसद की अगली बैठक कब बुलाती है. महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत चाहिए, क्योंकि इन दोनों विधेयक संविधान संशोधन के जरिए हो सकता है.
फिलहाल 319 सांसदों का समर्थन
लोकसभा में कुल 543 सीट सीटों में से 3 सीटें खाली हैं. इस तरह लोकसभा के 540 सदस्यों में से दो-तिहाई के लिए 360 सांसदों का समर्थन चाहिए. मोदी सरकार ने अप्रैल 2026 में परिसीमन पहली बार लोकसभा में पेश किया था. बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है. तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों का समर्थन मोदी सरकार को है. इसके अलावा उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं. इस तरह मोदी सरकार के समर्थन में सांसदों की संख्या 319 हो रही है.
बहुमत के लिए चाहिए 360 सांसद
मोदी सरकार के दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन चाहिए. ऐसे में सरकार की नजर डीएमके के 22 सांसदों और शरद पवार की पार्टी के 8 सांसदों पर थी. एंटी पेपर लीक के मुद्दे पर शरद पवार की पार्टी ने जिस तरह से आक्रामक तेवर अपनाए रखा , उसके चलते मोदी सरकार के लिए एनसीपी (एसपी) का समर्थन हासिल करना मुश्किल दिख रहा है. हालांकि, सरकार अभी इन दोनों विधेयक पर अपने पत्ते नहीं खोल रही है. माना जा रहा है कि सरकार दो-तिहाई का नंबर पूरी तरह से जुगाड़ कर लेने के बाद फिर से सत्र बुला सकती है.
