Home Top News ‘घरों पर नहीं…’ केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों पर भारी खर्च से नाराज CJP; कहा- स्कूल कब सुधरेंगे

‘घरों पर नहीं…’ केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों पर भारी खर्च से नाराज CJP; कहा- स्कूल कब सुधरेंगे

by Sachin Kumar 24 August 2026, 4:45 PM IST (Updated 24 August 2026, 4:46 PM IST)
24 August 2026, 4:45 PM IST (Updated 24 August 2026, 4:46 PM IST)
CJP expenditure Union ministers bungalows

Abhijit Dipke: दिल्ली के लुटियंस इलाके में केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को लेकर कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने सवाल उठाए हैं. पार्टी ने कहा कि सरकारी बंगलों के रखरखाव पर खर्च की जा रही इस रकम का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए. RTI से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों के रखरखाव पर कुल 547.68 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. पार्टी ने इस खर्च को लेकर सरकार से सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल शिक्षा और स्कूलों की सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता था.

2025-26 में खर्च हुए 92 करोड़

मंत्रियों के बंगलों पर बढ़ते खर्च को लेकर CJP ने एक्स की एक पोस्ट में लिखा कि अपने आलीशान घरों को ठीक करना बंद करो और सरकारी स्कूलों पर ध्यान दो. सीजेपी ने पोस्ट में लिखा था कि 92 करोड़ रुपये = 10 नए वर्ल्ड-क्लास सरकारी स्कूल. पैसा तो है, लेकिन इसे सरकारी स्कूलों के लिए इस्तेमाल करने की नीयत नहीं है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद सीजेपी का फोकस सरकारी स्कूलों की हालत पर केंद्रित रहा है. पीटीआई को आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के नवीनीकरण, साज-सज्जा और मरम्मत पर होने वाला खर्च 2014-15 में 27.47 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

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अधिकारियों ने बताई ये वजह

आवासों की देखरेख करने वाले सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) ने 2025-26 तक के 12 वर्षों में से ऐसे कामों पर कुल मिलाकर 547.68 करोड़ रुपये खर्च किए. हाल के वर्षों में खर्चों में काफी बढ़ोतरी हुई है. 2014-15 और 2018-19 के बीच यह सालाना औसतन 26.78 करोड़ था, जो 2019-20 और 2023-24 के बीच लगभग दोगुना होकर 50 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया. इसके बाद 2024-25 में 71.98 और पिछले साल 92.35 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, अधिकारियों ने बढ़े हुए खर्च का कारण पुराने हो रहे बंगलों की देखरेख की लागत बताया है. इनमें से कई बंगले 80 से 100 साल पुराने हैं और उनमें सीलन, दीमक का लगना शामिल हैं.

सीएम आवास बनाया था मुद्दा

इसी बीच AAP नेता और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने इस खर्च की तुलना मुख्यमंत्री के तौर पर अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के निर्माण और नवीनीकरण पर हुए विवाद से की. भारती ने एक्स हैंडल पर लिखा कि एक समय था जब गोदी मीडिया ने केजरीवाल सरकार के दौरान सीएम आवास को बनाने की जमकर आलोचना की थी. वह अब मोदी सरकार में मंत्रियों के घरों की मरम्मत पर खर्च हुए 92 करोड़ रुपये चुप्पी साधे हुए है. बीजेपी ने केजरीवाल के सिविल लाइंस स्थित पूर्व सरकारी आवास पर हुए खर्च को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया था. पार्टी ने बार-बार पिछली AAP सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाया और उस आवास को शीश महल कहा.

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News Source: PTI

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