Bhagoria folk festival: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनजातीय संस्कृति के सम्मान और किसानों की समृद्धि को लेकर कई महत्वपूर्ण ऐलान किए. उन्होंने प्रदेश के लोकपर्व भगौरिया को राष्ट्रीय पहचान देने का ऐलान किया है.
25 Festival, 2026
- भोपाल से नितिन ठाकुर की रिपोर्ट
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन सदन में बड़ी घोषणाओं की गूंज रही. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय संस्कृति के सम्मान और किसानों की समृद्धि को लेकर कई महत्वपूर्ण ऐलान किए. सरकार ने न केवल भगौरिया उत्सव को राष्ट्रीय पहचान देने का फैसला किया है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में कृषि कैबिनेट आयोजित करने का भी रोडमैप तैयार कर लिया है. विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मालवा अंचल की संस्कृति को वैश्विक मंच देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.
भगौरिया लोकपर्व को मिली राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जनजातीय क्षेत्रों का प्रसिद्ध भगौरिया लोकपर्व अब राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा. इसका उद्देश्य आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत और परंपराओं को देश दुनिया तक पहुंचाना है. सिर्फ सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए भी सरकार ने कमर कस ली है. मुख्यमंत्री ने बताया कि बड़वानी, धार और झाबुआ जैसे जनजातीय बहुल जिलों में कृषि कैबिनेट का आयोजन किया जाएगा. खास बात यह है कि यह बैठक भगौरिया पर्व के दौरान ही होगी, ताकि स्थानीय कृषि और संस्कृति का समन्वय हो सके.
शुरु हो गया भगौरिया मेला
बता दें, जिले का सबसे बड़ा कल्चरल फेस्टिवल भगौरिया मेला मंगलवार से शुरू हुआ. पहले दिन पिटोल, खरडूबड़ी, थांदला, तारखेड़ी, बरवेट और अंधारवाड़ में भगौरिया मेले लगे. इन मेलों में बड़ी संख्या में गांव वालों ने उत्साह से हिस्सा लिया. प्रशासन ने मेलों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. यह सालाना फेस्टिवल 2 मार्च तक चलेगा. जिले में कुल 35 भगौरिया मेले लगेंगे. बुधवार को यह मेला उमरकोट, माछलिया, करवड़, बोडायता, कल्याणपुरा, मदरानी और ढेकल में लगेगा.
किसानों के लिए बड़ी सौगातें
मुख्यमंत्री ने सदन को किसानों के हित में लिए गए कैबिनेट के फैसलों की जानकारी भी दी. राज्य सरकार उड़द के उपार्जन पर किसानों को 600 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देगी. सरसों के 71 लाख टन रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान के बीच, सरकार भावांतर योजना के तहत किसानों को भुगतान करेगी. इस बार प्रदेश में सरसों के उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है. मुख्यमंत्री के इन घोषणाओं से साफ है कि सरकार आदिवासियों की अस्मिता और किसानों की आय, दोनों को अपनी प्राथमिकता पर रख रही है. बजट सत्र के सातवें दिन का यह संबोधन ग्रामीण और जनजातीय वोट बैंक के साथ-साथ विकास के एजेंडे को भी मजबूती देता नजर आ रहा है.
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