Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक महिला पत्रकार की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया. इन याचिकाओं में एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई है. यह मामला एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी किए जाने से जुड़ा है.
हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करने के बावजूद मामले की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि दिल्ली पुलिस का जवाब मिलने के बाद अदालत याचिकाओं पर गुण-दोष के आधार पर विचार करेगी. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की है.
मामले की गुण-दोष पर होगी सुनवाई
जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि मैं अभी केवल नोटिस जारी कर रही हूं. पुलिस का जवाब आने के बाद मैं मामले के गुण-दोष पर सुनवाई करूंगी और इस मामले में जांच जारी रहेगी. पत्रकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील तनवीर अहमद मीर ने कोर्ट से आग्रह किया कि जांच पर रोक लगाने के लिए एक सख्त अंतरिम आदेश पारित किया जाए. हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया. बता दें कि यह FIR संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी.
एसीपी विवेक भगत ने शिकायत की थी कि 3 अक्टूबर को बूटा सिंह चौका पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान जाति-सूचक टिप्पणियां की गई थीं. स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने इस घटना के दौरान विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि उनके यह FIR, एसपीसी के खिलाफ उनकी शिकायत के बदले में दर्ज की गई है.
कार्यवाही को रद्द करने की मांग की
पत्रकार ने जाति-सूचक टिप्पणी करने के आरोपों को खारिज कर दिया है. आरोपी ने FIR और उससे जुड़ी आगे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने गिरफ्तारी और अन्य कठोर कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा भी मांगी है. उनके साथ मौजूद एक पुरुष पत्रकार ने भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने कहा कि जांच में सहयोग करने और CCTV फुटेज तथा पुलिस बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की मांग करने के बावजूद उनकी शिकायत पर कोई FIR दर्ज नहीं की गई थी. साथ ही उनके के खिलाफ मामला तत्काल दर्ज कर लिया गया. ACP विवेक भगत द्वारा दर्ज कराई गई FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 356(2) और 3(5) के साथ-साथ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(p), 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(s) लगाई गई हैं.
बदला लेने के लिए FIR दर्ज कराई
पत्रकार रोजी ने इन धाराओं के लागू होने पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई उसे डराने-धमकाने और ACP के खिलाफ अपनी शिकायत को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए की गई है. इन आरोपों पर विवाद बना हुआ है और हाई कोर्ट ने अभी तक मामले के गुण-दोषों के आधार पर इसकी जांच नहीं की है.
SC में SIR पर सुनवाई टली, दिवाली के बाद फिर खुलेगा मामला; राहुल गांधी समेत 13 नेताओं को निर्देश
News Source: ANI
