Gujarat News: गुजरात में कम बारिश और सूखे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देवभूमि द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ जिलों के लिए राहत उपायों की घोषणा की है. सरकार के इस फैसले से इन चारों जिलों के सभी तालुकाओं के किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी. इसके अलावा पशुपालकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत वाले लोगों को भी राहत देने के लिए कदम उठाए गए हैं. राज्य सरकार के फैसले के अनुसार, सूखाग्रस्त घोषित चारों जिलों के पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी.
2 हेक्टेयर तक सीमित रहेगी सहायता
यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक सीमित रहेगी. इस तरह पात्र किसानों को अधिकतम 17,000 रुपये तक की सहायता मिल सकेगी. कम बारिश और फसलों पर पड़े प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने किसानों को आर्थिक राहत देने का निर्णय लिया है. सरकार ने बताया कि मानसून समाप्त होने के बाद सूखे की स्थिति का आकलन किया गया. इसके लिए सूखा घोषित करने से संबंधित वर्ष 2016 की मार्गदर्शिका के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई. बारिश की स्थिति और कृषि पर पड़े प्रभाव को ध्यान में रखते हुए चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है.
कठिनाइयों का करना पड़ता है सामना
सूखे की स्थिति में किसानों के साथ पशुपालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं. सूखा घोषित करने से पहले ही रियायती दर पर घास और चारा वितरित करने की मंजूरी दी गई थी. सरकार के अनुसार, राज्य में अब तक दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चारा उपलब्ध कराया गया है. फिलहाल राज्य में लगभग तीन करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है. इसके अतिरिक्त चारे की जरूरत को पूरा करने के लिए भी योजना बनाई गई है. सूखाग्रस्त घोषित जिलों में पशुपालकों को राहत देने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता देने का फैसला किया गया है. यह सहायता दो महीने तक प्रदान की जाएगी. इस कदम का उद्देश्य सूखे की स्थिति में पशुओं के पालन-पोषण से जुड़ा आर्थिक बोझ कम करना और पशुपालकों को जरूरी मदद उपलब्ध कराना है.
150 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान
राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में ग्रामीण लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी विशेष व्यवस्था की घोषणा की है. इसके तहत संबंधित योजना के माध्यम से ग्रामीणों को 150 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. इससे सूखे के कारण प्रभावित ग्रामीण परिवारों को आजीविका बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है. राज्य सरकार की घोषणा के अनुसार, इन राहत उपायों को 1 नवंबर 2026 से लागू किया जाएगा. सूखा घोषित करने की अवधि छह महीने तक रहेगी. इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और किसानों की जरूरतों के मद्देनजर राहत उपाय महत्वपूर्ण होंगे.
किसानों के साथ राज्य सरकार खड़ी
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और आगे भी उनका साथ देती रहेगी. उन्होंने किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जताई।गुजरात सरकार की इस घोषणा में किसानों को आर्थिक सहायता, पशुओं के लिए चारा, पशुपालकों को राहत और ग्रामीणों के लिए रोजगार जैसे उपाय शामिल हैं. अब प्रभावित किसानों और पशुपालकों की नजर सहायता वितरण की प्रक्रिया और इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर रहेगी.
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