SIR Row: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज और विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई 10 दिनों के लिए टाल दी है. शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे 10 दिनों के भीतर चुनाव आयोग के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करें. अब इस मामले की अगली सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद होगी. इसके साथ ही अदालत ने चुनाव आयोग को भी निर्धारित अवधि के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी है.
तीनों सदस्यों ने दी सर्वसम्मति से मंजूरी
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता डोला सेन द्वारा दायर एक नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया है और इसे अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि जब तक शीर्ष अदालत अपना फैसला नहीं सुना देता है, तब तक विभिन्न राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए. चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ का बचाव किया है. आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया कानून के दायरे में है और इससे जुड़े आदेशों को ECI के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी.
फॉर्म-6 पर भी छिड़ा विवाद
मामले पर सुनवाई करते हुए CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग और अन्य पक्षों को एक नया नोटिस जारी किया है. यह नोटिस राज्यसभा सांसद डोला सेन की एक नई याचिका पर दिया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बिहार में SIR के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना ही ‘फॉर्म 6’ में बदलाव कर दिए गए थे. सांसद डोला सेन की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि चुनाव आयोग ने गलत दावा किया है कि ‘फॉर्म 6’ में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी.
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याचिकाकर्ता 10 दिन बाद दाखिल करें जवाब
नोटिस जारी करते हुए CJI ने कहा कि सभी मुद्दों की जांच की जाएगी. उन्होंने पहले याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह से कहा कि वे सोमवार देर शाम चुनाव आयोग द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के जवाब में 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष पेश करें.
ECI का हलफनामा महत्वपूर्ण
वहीं, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्वनी कुमार का कहना है कि चुनाव आयोग का हलफनामा बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिस मुख्य मुद्दे को लेकर विवाद चल रहा है. वह यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले ही फैसले लेते थे, न कि दूसरों से सलाह-मशविरा करके. इस संबंध में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्पष्ट रूप से कहा है कि सभी फैसले अंततः सर्वसम्मति से लिए गए थे. अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि अगर फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, तो क्या यह माना जाए कि एक चरण पर दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा जताई गई आपत्तियां वापस ले ली गई थीं. फिर उन्हें वैध नहीं माना गया? सुप्रीम कोर्ट को अभी इस पर फैसला लेना है.
अश्वनी कुमार आगे कहा कि जहां तक ’फॉर्म 6′ की बात है, चुनाव आयोग के हलफनामे में कहा गया है कि रिपोर्ट के अनुसार इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था. हालांकि, यह भी सच है कि ‘फॉर्म 6’ के अलावा, CEC या किसी चुनाव आयुक्त द्वारा एक घोषणा पत्र में अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि क्या मांगी गई यह अतिरिक्त जानकारी, वास्तव में ‘फॉर्म 6’ को बदल देती है.
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News Source: ANI
