Home Latest News & Updates ‘यूज बाय डेट’ लिखना अनिवार्य…, UP में मिठाई-नमकीन बनाने से लेकर बिक्री तक सख्त हुए खाद्य सुरक्षा मानक

‘यूज बाय डेट’ लिखना अनिवार्य…, UP में मिठाई-नमकीन बनाने से लेकर बिक्री तक सख्त हुए खाद्य सुरक्षा मानक

by Dheeraj Tripathi 27 October 2026, 11:52 AM IST (Updated 27 October 2026, 11:53 AM IST)
27 October 2026, 11:52 AM IST (Updated 27 October 2026, 11:53 AM IST)
UP Food Safety Rules

UP Food Safety Rules: मिठाई और नमकीन बनाने से लेकर उनकी पैकेजिंग, भंडारण और बिक्री तक खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश ने विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं. इनके तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को विनिर्माण इकाइयों, मिठाई की दुकानों और नमकीन बनाने वाले प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, कच्चे माल की गुणवत्ता, खाद्य रंगों के इस्तेमाल, तेल की गुणवत्ता, तापमान नियंत्रण, पैकेजिंग और लाइसेंस से जुड़े नियमों की जांच पर विशेष ध्यान देना होगा.

यूपीएफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा मिलावट, प्रतिबंधित रसायनों और भ्रामक लेबलिंग जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाना है. इसके साथ ही खाद्य कारोबारियों को उत्पादन से लेकर बिक्री तक के रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी.

सफाई और स्वच्छ पानी पर जोर

मिठाई और नमकीन बनाने वाले प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई तथा स्वच्छ वातावरण का विशेष ध्यान रखना होगा. क्षेत्र पर्याप्त हवादार होने चाहिए. परिसर को मक्खियों, चूहों और अन्य कीटों से मुक्त रखना होगा. दीवारों और फर्श की सतह ऐसी होनी चाहिए, जिसे आसानी से साफ किया जा सके. खाना बनाने के बर्तनों की नियमित सफाई की जाए. बर्तन धोने और खाद्य पदार्थों के निर्माण में सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. खाद्य अपशिष्ट और इस्तेमाल किए गए तेल के सुरक्षित संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था भी जरूरी होगी.

कच्चे माल की गुणवत्ता और भंडारण की होगी जांच

मिठाई और नमकीन बनाने में इस्तेमाल होने वाले बेसन, मैदा, सूजी, चीनी, मावा, छेना, दूध, खाद्य तेल, वनस्पति, मेवे और मसालों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी. कच्चे माल में फफूंद, कीट, दुर्गंध या मिलावट नहीं होनी चाहिए. मावा, छेना, दूध और पनीर जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना होगा. मिठाइयों और नमकीन को आकर्षक रंग देने के लिए केवल निर्धारित खाद्य श्रेणियों में अनुमन्य रंगों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है. इनकी मात्रा भी निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए. रोडामाइन-बी और मेटानिल येलो जैसे गैर-खाद्य रंगों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है.

पुराने, खराब या फफूंद लगे काजू, बादाम, पिस्ता और अन्य मेवों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. ऐसे मेवों में अफ्लाटॉक्सिन जैसे हानिकारक पदार्थों की मौजूदगी का खतरा हो सकता है. खाद्य पदार्थों पर इस्तेमाल किया जाने वाला वर्क शुद्ध चांदी का होना चाहिए और उसमें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक धातुओं की मिलावट नहीं होनी चाहिए.

मठाइयों में तापमान नियंत्रण जरूरी

बर्फी, पेड़ा, कलाकंद, मावा रोल और गुलाब जामुन जैसी मावा आधारित मिठाइयों में खराब गुणवत्ता वाले मावे के इस्तेमाल तथा बासीपन छिपाने के लिए कृत्रिम फ्लेवर का प्रयोग करने पर नजर रखी जाएगी. मावा आधारित मिठाइयों का सुरक्षित भंडारण और प्रदर्शन निर्धारित तापमान पर किया जाना चाहिए. रसगुल्ला, रसमलाई, चमचम और अन्य छेना आधारित मिठाइयों में भी तापमान नियंत्रण जरूरी होगा. बेसन के लड्डू, मैसूर पाक, सोन पापड़ी, गुजिया और बालूशाही जैसी मिठाइयों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बेसन, मैदा और सूजी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी. खासकर नमी वाले मौसम में इनमें फफूंद और कीटों के संक्रमण की आशंका अधिक रहती है. तलने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में होगी. अन्य वसा में ट्रांस फैटी एसिड की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए.

श्रीखंड, दही और सब्जियों से बनी मिठाइयों की गुणवत्ता पर ध्यान

श्रीखंड, मिष्टी दही और अन्य दुग्ध आधारित उत्पादों में उचित किण्वन, तापमान और भंडारण की व्यवस्था होनी चाहिए. इनमें खमीर या फफूंद के कारण गैस बनने, दुर्गंध आने या उत्पाद खराब होने की स्थिति से बचाव जरूरी है. गाजर का हलवा, लौकी की बर्फी, पेठा और कद्दू की मिठाई जैसी सब्जियों से बनी मिठाइयों के लिए कच्चे माल की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा.

सेव, भुजिया, चिप्स और मिक्सचर जैसे उत्पादों में लागत घटाने के लिए घटिया गुणवत्ता वाले तेल, खराब मसालों या सामग्री के विकल्पों का इस्तेमाल करने पर निगरानी रखी जाएगी. नमकीन को अधिक आकर्षक दिखाने के लिए प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल या अनुमन्य रंगों की निर्धारित सीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता. एक्सपायर्ड या वापस मंगाए गए नमकीन को नई पैकेजिंग में भरकर दोबारा बाजार में बेचने जैसी गतिविधियों पर रोक रहेगी.

खाद्य पदार्थों को तलने में इस्तेमाल होने वाले तेल की नियमित जांच की जाएगी. तेल में टीपीसी की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक होने पर उसे खाद्य उपयोग में नहीं लिया जाना चाहिए. इसलिए इस्तेमाल किए गए तेल का उचित रिकॉर्ड रखा जाए और उसका निस्तारण एफएसएसएआई की RUCO व्यवस्था के तहत अधिकृत या सूचीबद्ध संग्रहकर्ताओं के माध्यम से किया जाए.

पैकेट पर सामग्री, एलर्जी और निर्माण तिथि की जानकारी जरूरी

पैक की गई मिठाइयों और नमकीन पर उत्पाद का नाम, सामग्री सूची, पोषण संबंधी जानकारी, एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों का विवरण, शाकाहारी चिह्न, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति या उपयोग अवधि से संबंधित तिथि तथा एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर जैसी लागू घोषणाएं स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए.

दुकानों में खुले काउंटर पर रखी मिठाइयों के सामने उनकी उपयोग की अंतिम तिथि यानी ‘यूज बाय डेट’ प्रदर्शित करने पर विशेष जोर दिया गया है. इससे उपभोक्ताओं को मिठाई की उपयोग अवधि के बारे में जानकारी मिल सकेगी.

लाइसेंस, खरीद बिल का रिकॉर्ड रखना होगा

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान के एफएसएसएआई लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता तथा उसमें दर्ज गतिविधियों का वास्तविक कारोबार से मिलान किया जाएगा. खाद्य कारोबारियों को बेसन, मैदा, चीनी, मावा, तेल, खाद्य रंगों और अन्य कच्चे माल के खरीद बिल, आपूर्तिकर्ताओं की सूची और बैच संबंधी विवरण सुरक्षित रखने होंगे. लागू प्रावधानों के अनुसार गारंटी प्रमाणपत्र यानी फॉर्म-ई का संधारण भी जरूरी होगा.

शिकायत निस्तारण की भी होगी जांच

खाद्य प्रतिष्ठानों में चूहों, कॉकरोच और मक्खियों की रोकथाम के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए. जहां आवश्यक हो, अधिकृत पेस्ट कंट्रोल एजेंसी की सेवाएं लेने और संबंधित रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया गया है. इसके अलावा खाद्य कारोबारियों को उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड रखना होगा और उनके समाधान के लिए उचित शिकायत निस्तारण प्रणाली विकसित करनी होगी. खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है. इससे मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मदद मिलेगी.

खाद्य उत्पादों की तारीख में पारदर्शिता पर जोर, UP में पैक्ड फूड पर वास्तविक निर्माण तिथि लिखना हुआ जरूरी

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