DUSU Election Result: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर दीपांशु शौकीन ने पूरा चुनावी समीकरण बदल दिया. दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के रहने वाले दीपांशु ने अपनी जीत से सभी को चौंका दिया. विश्वविद्यालय में उनके समर्थन में छात्रों का उत्साह भी देखने को मिला. निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते हुए दीपांशु शौकीन ने NSUI और ABVP के उम्मीदवारों को पीछे छोड़कर जीत हासिल की. बताया जा रहा है कि दीपांशु के लिए चुनाव लड़ने का मकसद सिर्फ छात्रों के मुद्दों को उठाना ही नहीं था, बल्कि NSUI से टिकट न मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया.
शोकिन ने अपनी प्रतिद्वंद्वी इशू मौर्य को हराया
दीपांशु शोकीन के पिता ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में बस कंडक्टर हैं और मां आंगनवाड़ी वर्कर हैं. शोकीन ने भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद बुद्धिस्ट स्टडीज से मास्टर्स कर रहे हैं. उन्होंने इस चुनाव में 30,615 वोट पाकर DUSU वाइस-प्रेसिडेंट के पद पर जीत दर्ज की. उन्होंने अपनी सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की उम्मीदवार इशू मौर्य को 13,705 वोटों के अंतर से हरा दिया. इस जीत के बाद शोकीन ने कहा कि पिछले चार सालों में एक छात्र के तौर पर मिले अनुभव ने ही उन्हें छात्र राजनीति में आने का फैसला लेने के लिए प्रेरित किया. शोकीन ने यह भी बताया कि उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नंगे पैर चलकर यह संकल्प लिया था कि जब तक सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे प्रभावित छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता है, तब तक वह जूते नहीं पहनेंगे. 6 सितंबर को पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही एक बहुमंजिला इमारत ढहने के बाद 7 लोगों की मौत हो गई थी और उनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के पांच छात्र भी शामिल थे.
NSUI से हो गया था मतभेद
दीपांशु शोकीन का चुनावी सफर के दौरान कांग्रेस समर्थित NSUI के साथ मतभेद हो गया था. इसके बाद पार्टी अधिकारियों के मुताबिक, शोकीन ने NSUI टिकट के लिए कोशिश की थी और शुरू में उन्हें नॉमिनेट भी किया गया था. हालांकि, कुछ दिनों बाद ही उन्हें नॉमिनेशन लेने के लिए कहा गया. वहीं, दीपांशु के पिता राकेश शोकीन ने बताया कि हमें 11 सितंबर को पता चला कि NSUI टिकट बंटवारे के दौरान उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. तभी उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. DUSU के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष ने कहा कि उनके कैंपेन का मुख्य मुद्दा वह था जो उन्होंने अनुभव किया था. उन्होंने बताया कि इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण हॉस्टल की सुविधा का मुद्दा था. इसके अलावा यूनिवर्सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी को लेकर भी लोगों में नाराजगी थी. मैंने पूरा चुनाव इन्हीं स्टूडेंट-केंद्रित मुद्दों पर लड़ा था. मैं उनकी आवाज को उठाने के लिए यहां पर हूं.
एक्स पर दिया स्टूडेंट्स को धन्यवाद
दूसरी ओर नाम न बताने की शर्त पर NSUI पदाधिकारी ने कहा कि शोकिन को टिकट न देना और बाद में उनका निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना एक खुली चुनौती बन गया है. वहीं, नतीजे सामने आने के बाद शोकिन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को शुक्रिया अदा किया. उन्होंने अपने एक्स की पोस्ट में लिखा, यह जीत मेरी नहीं है. यह उस हर स्टूडेंट की है जो कैंपस में असली मुद्दे उठाना चाहता है. निर्दलीय चुनाव लड़ना आसान नहीं था, लेकिन आप लोगों ने साबित कर दिया है कि स्टूडेंट संगठनों से ऊपर स्टूडेंट्स का भरोसा होता है. उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है. मैं हर छात्र की आवाज़ बनूंगा. क्रांति, साथियों. हिंद की जीत हो. दिल्ली यूनिवर्सिटी की जीत हो.
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News Source: PTI
