Home राज्यGujarat आसाराम के आश्रम पर चलेगा बुलडोजर! रास्ता हुआ साफ; गुजरात HC ने दिया जमीन वापस लेने का निर्देश

आसाराम के आश्रम पर चलेगा बुलडोजर! रास्ता हुआ साफ; गुजरात HC ने दिया जमीन वापस लेने का निर्देश

by Nikul Patel
0 comment
Ahmedabad Bulldozer run Asaram ashram

Ahmedabad News : आसाराम की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. साबरमती नदी के किनारे पर स्थित आश्रम की लड़ाई अब अंतिम चरण में है और हाई कोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया है.

Ahmedabad News : साबरमती नदी के किनारे स्थित चर्चित आसाराम आश्रम को लेकर वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. गुजरात हाईकोर्ट ने आश्रम की अपील को खारिज करते हुए प्रशासन को जमीन वापस लेने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब किसी भी समय प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो सकती है और आश्रम परिसर पर बुलडोजर चलने की संभावना तेज हो गई है. साबरमती नदी किनारे बना यह आश्रम करीब 45 वर्षों से अस्तित्व में है. शुरुआती दौर में सरकार द्वारा कुछ शर्तों के साथ जमीन आवंटित की गई थी. लेकिन समय के साथ आरोप लगे कि आश्रम प्रशासन ने आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया और नदी क्षेत्र की अतिरिक्त जमीन पर भी कब्जा कर लिया. यही विवाद धीरे-धीरे कानूनी लड़ाई में बदल गया. जिला कलेक्टर ने जांच के बाद आदेश दिया था कि आश्रम ने सरकारी नियमों का पालन नहीं किया और जमीन वापस ली जानी चाहिए. इस आदेश को आश्रम प्रशासन ने अदालत में चुनौती दी थी.

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने कलेक्टर के आदेश को सही माना. इसके खिलाफ आश्रम ने डबल बेंच में अपील की थी. लेकिन अब डबल बेंच ने भी स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा वैध नहीं माना जा सकता. नदी क्षेत्र का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है. नदी की जमीन का नियमितीकरण संभव नहीं है. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक संसाधनों पर किसी भी संस्था या व्यक्ति का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जा सकता. इस फैसले ने प्रशासनिक कार्रवाई को पूरी कानूनी मजबूती दे दी है. सुनवाई के दौरान आश्रम की ओर से 4 सप्ताह का स्टे मांगा गया था ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सके.

हालांकि, अदालत ने साफ कहा कि राहत तभी दी जा सकती है जब आश्रम प्रशासन जमीन खाली करने का हलफनामा दे यानी कोर्ट का रुख स्पष्ट था कानून से ऊपर कोई नहीं. सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि गुजरात लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 202 के तहत आश्रम को नई नोटिस जारी की जाएगी. इस प्रक्रिया में सामान्यतः ये कदम शामिल होंगे.

साबरमती रिवरफ्रंट और अवैध कब्जे

पिछले कुछ वर्षों में साबरमती रिवरफ्रंट अहमदाबाद की पहचान बन चुका है. शहर के सौंदर्यीकरण, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के लिए नदी क्षेत्र को विशेष ज़ोन घोषित किया गया है. सरकार की नीति साफ रही है कि नदी किनारे किसी भी तरह का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह फैसला भविष्य में अन्य मामलों के लिए भी मिसाल बन सकता है. फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है. कुछ लोग इसे कानून की जीत बता रहे हैं, जबकि आश्रम से जुड़े समर्थकों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती, तब तक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ती रहेगी.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तुरंत बुलडोजर कार्रवाई होगी? कानूनी प्रक्रिया के अनुसार पहले नोटिस जारी होगी और जवाब का मौका दिया जाएगा. तय समय सीमा पूरी होने के बाद कार्रवाई संभव है. लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि आश्रम को खाली कराना अब सिर्फ समय की बात है.

45 साल पुराना ढांचा अब विवादों के केंद्र में

करीब 4 दशक से ज्यादा समय तक मौजूद रहा यह आश्रम अब कानून, जमीन और पर्यावरण विवाद का बड़ा उदाहरण बन गया है. शहर के विकास और सार्वजनिक हित बनाम निजी कब्जे की बहस फिर से तेज हो गई है. आने वाले समय में सरकार नदी किनारे मौजूद अन्य विवादित निर्माणों की भी समीक्षा कर सकती है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या आश्रम सुप्रीम कोर्ट में अपील करता है और वहां से कोई अंतरिम राहत मिलती है या नहीं. अगर सुप्रीम कोर्ट से स्टे नहीं मिलता है, तो प्रशासन कभी भी जमीन कब्जे में लेकर ढांचा हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है.

अहमदाबाद के साबरमती किनारे स्थित आसाराम आश्रम पर आया यह फैसला सिर्फ एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि सार्वजनिक जमीन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा न्यायिक संदेश माना जा रहा है. गुजरात हाईकोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी संस्था को राहत नहीं दी जा सकती.

यह भी पढ़ें- बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा, 17 जून को तय होगा आरोप

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?