Home Latest News & Updates स्विस कंपनी विक्टोरिनॉक्स को 7 साल बाद मिली बड़ी राहत, इंश्योरेंस कंपनी देगी 8 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा

स्विस कंपनी विक्टोरिनॉक्स को 7 साल बाद मिली बड़ी राहत, इंश्योरेंस कंपनी देगी 8 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा

by Sanjay Kumar Srivastava 13 September 2026, 3:17 PM IST
13 September 2026, 3:17 PM IST
स्विस कंपनी विक्टोरिनॉक्स को 7 साल बाद मिली बड़ी राहत, इंश्योरेंस कंपनी देगी 8 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा

Consumer Court: सात साल बाद भारत में काम कर रही स्विट्जरलैंड की कंपनी को राहत मिली है. एक इंश्योरेंस कंपनी को अब इस स्विस कंपनी को आठ करोड़ रुपए देने होंगे. स्विट्जरलैंड की कंपनी विक्टोरिनॉक्स AG की सब्सिडियरी, विक्टोरिनॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कस्टम्स बॉन्डेड वेयरहाउस में आग लग गई थी. आग लगने से हुए नुकसान के सात साल बाद मुंबई के एक कंज्यूमर कमीशन ने एक इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह कंपनी के फायर इंश्योरेंस क्लेम को गलत तरीके से खारिज करने के लिए 8.06 करोड़ रुपए से ज़्यादा का भुगतान करे. 2 सितंबर को दिए गए अपने आदेश में डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (साउथ मुंबई) ने कहा कि कंपनी के सही क्लेम को सिर्फ़ तकनीकी आधार पर और बिना सोचे-समझे खारिज कर दिया गया था.

भारत में कंपनी बनाती है ट्रैवल बैग, चाकू, लग्जरी घड़ियां

शिकायत करने वाली कंपनी स्विट्जरलैंड की विक्टोरिनॉक्स AG की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी है. यह कंपनी भारत में अपनी पैरेंट कंपनी द्वारा बनाए गए ट्रैवल बैग, चाकू, लग्जरी घड़ियां, कटलरी और दूसरे कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट, इम्पोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करती है. कंपनी ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से ‘स्टैंडर्ड फायर एंड स्पेशल पेरिल्स पॉलिसी’ ली थी. कंज्यूमर पैनल ने कहा कि बिना किसी ठोस असहमति या धोखाधड़ी की मंशा के सिर्फ़ प्रक्रियात्मक नियमों का पालन न करने के आधार पर इंश्योरेंस कंपनी का क्लेम खारिज करना कानूनी रूप से सही नहीं था. कमीशन ने कहा कि इस तरह इंश्योरेंस कंपनी ने गलत व्यापारिक तरीका अपनाया और शिकायतकर्ता, विक्टोरिनॉक्स इंडिया को सेवा देने में कमी की.

वेयरहाउस में लगी थी भीषण आग

शिकायत के अनुसार, 16 फरवरी 2019 को कंपनी के कस्टम्स बॉन्डेड वेयरहाउस में भीषण आग लग गई थी. यह एक सुरक्षित और सरकार द्वारा रेगुलेटेड स्टोरेज सुविधा होती है जहां इम्पोर्ट किए गए सामान को रखा जा सकता है. शिकायतकर्ता ने कहा कि आग बुझाने के लिए वेयरहाउस में मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत सभी ज़रूरी कदम उठाए. हालांकि, जैसे-जैसे आग बढ़ती गई, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) की फायर सर्विस की मदद ली गई. शिकायत में कहा गया है कि तमाम कोशिशों के बावजूद आग की तीव्रता के कारण वहां रखे सामान का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ. इसमें बताया गया कि बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने कुल नुकसान का आकलन 8,06,49,573 रुपए किया था.

45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान

बीमा कंपनी ने जनवरी 2021 में कुछ खास इंटरनल एग्रीमेंट और इनवॉइस जमा न करने के कारण क्लॉज़ 6(i) के उल्लंघन का हवाला देते हुए क्लेम को खारिज कर दिया. कमीशन ने कहा कि एक बार जब आग से हुए नुकसान/क्षति का आकलन कर लिया गया और किसी भी पक्ष ने उस पर कोई आपत्ति नहीं जताई, तो पॉलिसी के क्लॉज़ 6(b) का हवाला देकर क्लेम को खारिज करना कानूनी रूप से सही नहीं है. कमीशन ने निष्कर्ष निकाला कि बीमा कंपनी ने बिना किसी ठोस या उचित कारण के, केवल तकनीकी आधार पर क्लेम को खारिज कर दिया था. इसलिए, शिकायतकर्ता ₹8,06,49,573 का इंश्योरेंस क्लेम पाने का हकदार था. इंश्योरेंस कंपनी को 45 दिनों के भीतर भुगतान करने के लिए कहा गया.

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News Source: PTI

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