Attack on Terrorism: जम्मू-कश्मीर में दो सरकारी कर्मचारियों के संबंध आतंकियों से पाए गए. दोनों कर्मचारी आतंकियों की मदद करने के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराते थे.
Attack on Terrorism: जम्मू-कश्मीर में दो सरकारी कर्मचारियों के संबंध आतंकियों से पाए गए. दोनों कर्मचारी आतंकियों की मदद करने के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराते थे. दोनों सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर काफी दिनों से थे. दोनों के संबंध लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन सहित आतंकवादी संगठनों से थे. इस बात का खुलासा होने पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को दोनों कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी. उपराज्यपाल ने दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दे दिए. प्रशासन की आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता नीति के तहत संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (सी) के तहत बर्खास्तगी की गई. इसका उद्देश्य सरकारी संस्थानों से आतंकवादी तत्वों को जड़ से उखाड़ फेंकना था.
सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर थे दोनों
उपराज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां सूबे से आतंकवाद को पूरी तरह से समाप्त कर देंगी. उन्होंने बताया कि बर्खास्त किए गए लोगों में से एक फरहत अली खांडे रामबन जिले में शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था. वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था और क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने और नेटवर्क बनाने के लिए अपने सरकारी पद का इस्तेमाल कर रहा था. सूत्रों के अनुसार, खांडे पहली बार 2011 में आतंकवादियों के परिवारों को धन वितरित करने में शामिल हवाला नेटवर्क की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर आया था. उसी वर्ष उसे गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई और उसने कथित तौर पर अपनी गतिविधियां जारी रखीं.
आतंकियों की मदद करता था फरहत
जांच से पता चला कि फरहत अली आतंकवादी नेटवर्क के संपर्क में रहा और मददगार के रूप में काम किया. उसके खिलाफ 2022 में एक विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया था. उपराज्यपाल ने कहा कि हमें नहीं पता था कि फरहत अप्रैल 2011 तक हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था. उसका नाम हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी से पूछताछ के दौरान सामने आया था, जिसे जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सात आतंकवादी परिवारों को आतंक के पैसे बांटने के आरोप में पकड़ा था. पुलिस ने फरहत को उठाया और सलाखों के पीछे डाल दिया, लेकिन अक्टूबर 2011 में वह जमानत पाने में कामयाब रहा और अपनी आतंकी गतिविधियों को जारी रखा.
शफी देता था संवेदनशील जानकारी
अधिकारियों ने कहा कि दूसरा कर्मचारी बांदीपोरा का मोहम्मद शफी डार ग्रामीण विकास विभाग में काम कर रहा था. उसे अनुकंपा के आधार पर नियुक्त किया गया था. वह कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी सहयोगी के रूप में काम कर रहा था. वह आतंकियों को सुरक्षित घरों की व्यवस्था करने, आतंकवादियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और सुरक्षा बलों के बारे में संवेदनशील जानकारी साझा करने सहित सैन्य और परिचालन सहायता प्रदान कर रहा था. अधिकारी ने कहा कि डार को अप्रैल 2025 में एक संयुक्त नाका जांच के दौरान पकड़ा गया था. उसके कब्जे से एक एके-56 राइफल, एक ग्रेनेड सहित हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया.
अब तक 90 से अधिक कर्मी बर्खास्त
आगे की जांच से पता चला कि वह एक सक्रिय आतंकी सहयोगी बन गया था और कथित तौर पर सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बनाने में शामिल था. अधिकारियों ने कहा कि यह एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकी संबंधों वाले 90 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को अब तक बर्खास्त कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद को खत्म करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई है कि राज्य के लिए कोई भी दुश्मन सरकारी तंत्र के भीतर सक्रिय न हो.
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News Source: PTI
