Home Latest News & Updates कुलगाम हमला और कश्मीर की हकीकत: 2004 से 2026 तक कितनी बदली तस्वीर, जानें क्या कहते हैं आंकड़े

कुलगाम हमला और कश्मीर की हकीकत: 2004 से 2026 तक कितनी बदली तस्वीर, जानें क्या कहते हैं आंकड़े

by Neha Singh 2 August 2026, 4:16 PM IST (Updated 2 August 2026, 4:20 PM IST)
2 August 2026, 4:16 PM IST (Updated 2 August 2026, 4:20 PM IST)
terror attack data

JK Terror Attack Data: जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर आतंकियों द्वारा दो मजदूरों की हत्या ने घाटी में सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल खड़ा कर दिया है. यह घटना जब 5 अगस्त से ठीक पांच दिन पहले हुई. सात साल पहले केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त कर दिया था. तब से केंद्र सरकार लगातार दावा करती रही है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर प्रभावी नियंत्रण से विकास परियोजनाओं और सामान्य जनजीवन की बहाली हुई है.

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन, निवेश और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं, वहीं दूसरी ओर समय-समय पर होने वाले आतंकवादी हमलों से यह सवाल भी कायम हैं कि क्या घाटी पूरी तरह सामान्य हो पाई है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पिछले 2004 से 2026 तक जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कितनी कमी आई है.

मजदूरों को मारा

शनिवार को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में एक ईंट के भट्टे पर आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ के दो मजदूर मारे गए. अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने शुक्रवार देर शाम दक्षिण कश्मीर जिले के केलम इलाके में ईंट भट्टे पर मजदूरों को निशाना बनाया. आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने हमले की जिम्मेदारी ली है. सिक्योरिटी फोर्स ने इलाके को घेर लिया और हमलावरों का पता लगाने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया.

मारे गए मजदूरों में से एक की पहचान दीपक रात्रे के तौर पर हुई, जिसने अस्पताल ले जाने से पहले ही दम तोड़ दिया था. दूसरे बोपिंदर को पहले GMC अनंतनाग ले जाया गया और बाद में सौरा के SKIMS अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि दोनों मजदूर बीस साल के थे और छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे. इस हमले से ठीक 10 दिन पहले एक आतंकी हमला हुआ था, जिसमें आतंकवादियों ने कथित तौर पर अनंतनाग शहर में एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इससे पहले, 2024 में जम्मू-कश्मीर की गर्मियों की राजधानी में दो मजदूरों की हत्या कर दी गई थी. 7 फरवरी, 2024 को, पंजाब के दो बाहरी मजदूरों, अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह को श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में एक आतंकवादी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

कितनी बदली जम्मू-कश्मीर की तस्वीर

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2004 से 2014 के बीच 7,217 आतंकवादी घटनाएं हुईं, लेकिन 2014 से 2024 तक यह संख्या घटकर 2,242 हो गई. इस दौरान कुल मौतों की संख्या में 70% की कमी आई, आम लोगों की मौतों की संख्या में 81% की कमी आई और सुरक्षाकर्मियों की मौतों में 50% की कमी आई. 2010 से 2014 तक हर साल औसतन 2,654 संगठित पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, लेकिन 2024 में ऐसी एक भी घटना नहीं हुई. पत्थरबाज़ी की घटनाओं में 112 आम लोग मारे गए, और 6,000 घायल हुए, लेकिन अब पत्थरबाजी न के बराबर हो गई है. 2004 में 1,587 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर सिर्फ 85 रह गई. 2004 में आम लोगों की मौत की संख्या 733 थी, लेकिन 2024 में यह घटकर 26 हो गई, और सुरक्षा बलों की मौतों की संख्या 2004 में 331 से घटकर 2024 में 31 हो गई.

2025 और 2026 का डेटा

जम्मू-कश्मीर पुलिस के डेटा के मुताबिक, 2020 से अब तक आतंकवादी घटनाओं में लगभग 75% की कमी आई है. पत्थरबाजी की घटनाओं में लगभग 90% की कमी आई है. जम्मू-कश्मीर पुलिस के डेटा से पता चलता है कि 2020 से हर साल सुरक्षा की स्थिति में सुधार हो रहा है. डेटा के मुताबिक, 2022 और 2025 के बीच आतंकवादी घटनाएं 151 से घटकर 35 हो गईं, जो लगभग 77% की गिरावट है. इसी दौरान, सिक्योरिटी ऑपरेशन में मारे गए आतंकवादियों की संख्या भी 193 से घटकर 46 हो गई. शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों की संख्या 2022 में 30 से घटकर 2025 में 17 हो गई.

डेटा यह भी दिखाता है कि इस साल (2026) अब तक सिर्फ 11 आतंकवादी मारे गए हैं, जबकि 2020 में यह संख्या 232 थी. ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, जनवरी में तीन, फरवरी में तीन, मार्च में दो, मई में एक और जुलाई में तीन घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि अप्रैल, जून में कोई घटना नहीं हुई. इस साल 12 घटनाओं में चार आम नागरिक मारे गए हैं, दो सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं और 11 आतंकवादी मारे गए हैं. कुल मिलाकर गिरावट के बावजूद, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकवाद का पैटर्न बदल गया है. पिछले दो सालों में ज़्यादातर हमलों में राजौरी, पुंछ, रियासी, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़ और उधमपुर के पहाड़ी जिलों में सक्रिय छोटे आतंकवादी ग्रुप शामिल रहे हैं.

अनुच्छेद 370 का हटना

जम्मू और कश्मीर में भारत के अन्य राज्यों से अलग नियम लागू होते थे. इसकी वजह से इस राज्‍य की मुख्‍यधारा से दूरी बनी हुई थी. अनुच्‍छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्‍मू–कश्‍मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार था, लेकिन किसी अन्‍य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केन्‍द्र को राज्‍य सरकार की मंजूरी लेनी होती थी. भारत की संसद जम्‍मू–कश्‍मीर के संबंध में सीमित क्षेत्र में ही कानून बना सकती थी. अनुच्‍छेद 370 की वजह से जम्‍मू–कश्‍मीर राज्‍य पर भारतीय संविधान की अधिकतर धाराएं लागू नहीं होती थीं. भारत के दसरे राज्यों के लोग जम्‍मू–कश्‍मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे. भारतीय संविधान की अनुच्छेद 360 के तहत देश में वित्‍तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है. यह जम्‍मू–कश्‍मीर पर लागू नहीं होता था.

5 अगस्‍त 2019 को संसद द्वारा अनुच्‍छेद 370 और 35ए को हटाने को मंजूरी दी गई. नोटिफिकेशन जारी करते ही 31 अक्‍टूबर, 2019 से जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख को दो अलग केन्‍द्र शासित प्रदेश में पुनगर्ठित कर दिया गया. इसके साथ ही केन्‍द्र सरकार के 170 कानून जो पहले लागू नहीं थे, अब वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए हैं. यहां के स्‍थानीय निवासियों और दसरे राज्यों के नागरिकों के बीच अधिकार समान कर दिए गए. राज्‍य के 334 कानूनों मे से 164 कानूनों को निरस्‍त किया गया और 167 कानूनों को भारतीय संविधान के अनुरूप अनुकूलित किया गया.

370 हटने के बाद कितने बदले हालात

अनुच्छेद 370 के हटने के बाद का डेटा देखें तो भी आतंकी घटनाओं में बड़ी गिरावट देखने को मिलती है. 2009 से 4 अगस्त 2019 तक जम्मू-कश्मीर में 1,435 आतंकवादी घटनाएं हुईं. इन घटनाओं में 382 आम लोगों और 672 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई, जबकि 1,827 आतंकवादी मारे गए. इसके उलट, 5 अगस्त 2019 से 1 अगस्त 2026 तक 652 आतंकवादी घटनाएं रिकॉर्ड की गईं. इस दौरान 191 आम लोग मारे गए, 213 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 858 आतंकवादी मारे गए. डेटा साफ दिखाता है कि आतंकवाद का दायरा और उसकी क्षमता दोनों कम हुई है.

पत्तथरबाजी अब न के बराबर

अधिकारियों का यह भी दावा है कि अगस्त 2019 के बाद से सबसे बड़े बदलावों में से एक संगठित हिंसा (पत्थरबाजी) का पूरी तरह से खत्म होना है. पिछले कई सालों में पत्थरबाजी की घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है. घाटी में बड़े पैमाने पर बंद, हिंसक प्रदर्शन और सुरक्षा बलों पर हमले अब बहुत कम हो गए हैं. एक अधिकारी ने आगे कहा, “बड़े विरोध प्रदर्शनों को हवा देने वाला पूरा सिस्टम काफी कमजोर हो गया है. इंटेलिजेंस-बेस्ड पुलिसिंग, रोकथाम की कार्रवाई और लगातार ऑपरेशन ने आतंकवादी ग्रुप्स की पब्लिक सभाओं का फायदा उठाने की क्षमता को कम कर दिया है.” हालांकि अधिकारियों का मानना ​​है कि पिछले सात सालों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन वे यह भी चेतावनी देते हैं कि खतरा खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसका नेचर बदल गया है. एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, “आंकड़े सुधार दिखाते हैं, लेकिन लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है. हमारा मकसद अब छिटपुट हमलों को बड़ी सुरक्षा चुनौतियों में बदलने से रोकना है.”

गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन एक्ट, 2019

UAPA संशोधन ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की शक्तियों को बढ़ाकर भारत के आतंकवाद-रोधी कानूनी ढांचे को मजबूत किया. यह इस दशक का सबसे बड़ा कानूनी सुधार है, जिसे संसद ने 2 अगस्त 2019 को पास किया और 14 अगस्त 2019 को नोटिफ़ाई किया गया. इस संशोधन ने केंद्र सरकार को एक्ट के तहत सिर्फ़ संगठनों को ही नहीं, बल्कि व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार दिया. इस संशोधन ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के इंस्पेक्टर और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों को भी आतंकवाद के मामलों की जांच करने का अधिकार दिया. इसने NIA के डायरेक्टर-जनरल को आतंकवाद से जुड़ी संपत्ति को जब्त करने या अटैच करने की मंज़ूरी देने का भी अधिकार दिया. इस एक्ट ने मानव तस्करी, नकली करेंसी, साइबर आतंकवाद और भारत के बाहर किए गए अपराधों से जुड़े मामलों की जांच के लिए NIA के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाया, जो भारतीय हितों को प्रभावित करते हैं.

जब से यह संशोधन लागू हुआ है, सरकार ने 57 से ज़्यादा व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है. इनमें मसूद अज़हर (JeM), हाफिज सईद (LeT), जकी-उर-रहमान लखवी (LeT), दाऊद इब्राहिम, और गुरपतवंत सिंह पन्नून (सिख्स फॉर जस्टिस), हरदीप सिंह निज्जर (खालिस्तान टाइगर फोर्स) और वधावा सिंह बब्बर (बब्बर खालसा इंटरनेशनल) जैसे मुख्य खालिस्तानी ऑपरेटिव शामिल हैं.

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकी हमला, छत्तीसगढ़ के 2 मजदूरों की मौत, लश्कर ने ली जिम्मेदारी

News Source: PTI

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