China-US Bill: चीन ने रूसी तेल और गैस की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ लगाने के ‘लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन’ (बाहरी दखल) को सिरे से खारिज कर दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, किसी तीसरे देश को उनके सामान्य आर्थिक सहयोग और संप्रभु व्यापारिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने का कोई हक नहीं है. यह प्रतिक्रिया अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ पारित करने के बाद आई है. यह कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के साथ व्यापार करने वाले प्रमुख देशों, विशेषकर भारत और चीन पर भारी टैरिफ व कड़े प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है.
अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ को किया खारिज
इस बिल के बारे में पूछे जाने पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन ऐसी किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है जिसे UN सुरक्षा परिषद की मंजूरी न मिली हो. गुओ ने कहा कि चीन दूसरे देशों के साथ बराबरी और आपसी फायदे के आधार पर सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग करता है. उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की ओर से कोई रुकावट या दबाव नहीं होना चाहिए. चीन ‘लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन’ और एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और जिन्हें UN सुरक्षा परिषद का जनादेश नहीं मिला है.
24-25 सितंबर को है जिनपिंग और ट्रंप की बैठक
अगले हफ्ते ट्रंप के साथ शिखर बैठक के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा से पहले, चीन ने रूस से तेल और गैस खरीदने पर टैरिफ लगाने के किसी भी कदम का विरोध दोहराया. यह शिखर बैठक 24-25 सितंबर को होने की उम्मीद है और यह इस साल उनकी दूसरी शिखर बैठक होगी. ट्रंप ने इस साल मई में बीजिंग का दौरा किया था और शी के साथ व्यापक बातचीत की थी. इस बीच, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि बीजिंग और वॉशिंगटन आपसी टैरिफ व्यवस्था पर समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं. मंत्रालय ने कहा कि चीन और अमेरिका आपसी टैरिफ में कटौती के ढांचे पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें दोनों तरफ से 30 अरब डॉलर के उत्पाद शामिल होंगे.
रूस से तेल और गैस खरीदता है चीन
दोनों देशों की आर्थिक और व्यापारिक टीमें बीजिंग में हुई बैठक के दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बनी सहमति पर गंभीरता से काम कर रही हैं. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, मंत्रालय के प्रवक्ता हुआंग लिंग ने कहा कि इन बातचीत का मकसद जल्द से जल्द आपसी टैरिफ कटौती की व्यवस्था पर पहुंचना है. बीजिंग ने बार-बार एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया है. उसने ईरान से तेल खरीदने पर अमेरिकी प्रतिबंधों को भी नहीं माना. भारत के साथ-साथ चीन भी रूस से तेल और गैस खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है. चीन का ज़्यादातर आयात उसकी ज़मीनी सीमा से गुजरने वाली पाइपलाइनों के ज़रिए होता है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल चीन का रूसी तेल और गैस का आयात 64 अरब डॉलर का था. जबकि इस साल जनवरी से अगस्त के बीच उसका आयात 70 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया. पिछले महीने US सीनेट से पास हुए बिल को बुधवार को हाउस ने 262-159 वोटों से मंज़ूरी दे दी और अब यह बिल कानून बनने के लिए ट्रंप के पास जाएगा. इसका मकसद यूक्रेन के खिलाफ़ युद्ध जारी रखने के लिए रूस को सज़ा देना है.
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News Source: PTI
