Ruhullah Resign: श्रीनगर से लोकसभा सांसद और प्रभावशाली शिया नेता सैयद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने यह घोषणा अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक रैली के दौरान की. पार्टी नेतृत्व के साथ महीनों से चल रहे मतभेदों के बाद, उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला किया और इसके तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सांसद पद से अपना इस्तीफा भी भेज दिया. रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए रुहुल्लाह ने पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोला.
सड़कों पर संग्राम: 29 विधायकों संग सड़कों पर उतरी BJP, फूंका उमर का पुतला, पुलिस ने रोका रास्ता
2024 में श्रीनगर से बने थे MP
आगा रुहुल्लाह मेहदी ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व ने चुनाव के दौरान किए गए अहम वादों को भुला दिया है, विशेष रूप से अनुच्छेद 370 को बहाल करने की लड़ाई को छोड़ दिया है. रुहुल्लाह ने अपने 80 मिनट के भाषण में कहा कि चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और मुफ्त बिजली देने जैसे किए गए सभी दावे महज झूठ थे, और वे अब इन झूठों का हिस्सा नहीं बने रह सकते. उन्होंने पार्टी से अपने इस इस्तीफे को ‘आज़ादी का फरमान’ बताया. इसके साथ ही, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में एक नए राजनीतिक संगठन के गठन का संकेत भी दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है. रुहुल्लाह 2024 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गए थे.

मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा अपना इस्तीफा
रुहुल्लाह ने अपना इस्तीफा मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा. मोहम्मद अशरफ मट्टू, किशोर तुफैल मट्टू के पिता हैं, जो 2010 की शुरुआत में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान मारे गए थे. रुहुल्लाह ने उनसे यह इस्तीफा फारूक अब्दुल्ला तक पहुंचाने के लिए कहा. तुफैल की मौत के बाद उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसमें रुहुल्लाह एक कैबिनेट मंत्री थे. यह आज़ादी का एक घोषणापत्र है. मैं इसे (इस्तीफे को) फारूक अब्दुल्ला को नहीं भेजूंगा. उनकी कोई ऐसी हैसियत या अहमियत नहीं है कि मैं उन्हें यह भेजूं. यह इस धोखेबाज़ और भ्रष्ट संगठन से आज़ादी का संदेश है. मैं यह इस्तीफा मोहम्मद अशरफ मट्टू साहब को सौंप रहा हूं. मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि वे इसे अपने हाथों से आगे पहुंचा दें.ये बातें रुहुल्लाह ने अपने समर्थकों की ज़ोरदार तालियों के बीच कही.
उमर को सिर्फ सत्ता में दिलचस्पी
लोकसभा सदस्य ने उमर अब्दुल्ला का ज़िक्र करते हुए उन्हें एक अयोग्य राजनेता बताया, जिसका ज़मीनी हकीकतों से कोई लेना-देना नहीं है. आपने लोगों से वादे किए, लेकिन उसे पूरा नहीं किया. आपको सिर्फ सत्ता में दिलचस्पी थी. चुनाव से पहले, आप वोट के लिए लोगों के सामने गिड़गिड़ा रहे थे. सत्ता में आने के बाद, आपने विधानसभा में कहा कि आपको अपना चुनावी घोषणापत्र बनाने पर पछतावा है, क्योंकि अब उसी की वजह से आपको जवाबदेह ठहराया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि आपको इसलिए चुना गया था कि आप उन कामों को पलट सकें जो BJP और RSS ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ किए थे, लेकिन आपने बस उन लोगों को शॉल भेंट की, जिन्होंने हमारे लोगों की भावनाओं और सम्मान को ठेस पहुंचाई है.
उमर अब्दुल्ला ने छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों को डराया-धमकाया
लोकसभा सदस्य रुहुल्लाह ने कहा कि इसके उलट, उमर अब्दुल्ला ने आरक्षण को लेकर छात्रों को, नियमितीकरण को लेकर दिहाड़ी मजदूरों को और स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मेडिकल इंटर्न को डराया-धमकाया. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष को लिखे अपने दो पन्नों के इस्तीफे में, रूहुल्लाह ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 का हटाया जाना, हैरानी की बात है कि, एक मौका था – अपनी राजनीतिक जगह और अधिकारों को वापस पाने का, लेकिन ऐसा करने के लिए संघर्ष, बलिदान और कीमत चुकाने के जज्बे की जरूरत थी. उन्होंने कहा कि उस समय मेरी सोच यह थी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस , जो कश्मीर की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी है, इस संघर्ष के लिए सबसे उपयुक्त है, जिसकी उस हालात में जरूरत थी.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के बदले रुख से दुखी
रूहुल्लाह ने बताया कि उन्होंने विधानसभा चुनावों के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए जोर-शोर से प्रचार किया था, और लोगों ने भी पार्टी को भारी जनादेश देकर अपना गुस्सा जाहिर किया था. हालांकि, उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पूरी तरह से अपना रुख बदल लिया. उन्होंने आगे कहा कि व्यक्तिगत रूप से, मैं इसे एक विश्वासघात मानता हूं. मुझे सबसे ज़्यादा दुख इस बात का हुआ कि लोगों की उम्मीदों को तोड़ा गया है. यह ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर के अस्तित्व पर ही ख़तरा मंडरा रहा है. रुहुल्लाह ने बताया कि हालांकि कुछ लोग चाहते थे कि वे एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएं, लेकिन उनकी दिलचस्पी जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा और सम्मान को बहाल करने के लिए एक आंदोलन शुरू करने में ज़्यादा थी.

आतंकियों पर शिकंजा! श्रीनगर में आतंकी मोहम्मद लतीफ भट के पोस्टर लगाए, लोगों से सहयोग की अपील
NC के लिए वोट मांगना सबसे बड़ी गलती : रुहुल्लाह
उन्होंने आगे कहा कि हमने 2024 के चुनावों में उनके (NC के) लिए समर्थन मांगा था, जो कि एक ग़लती साबित हुई. हो सकता है कि उन्होंने हार मान ली हो, लेकिन हमने नहीं मानी है. हम एक ऐसा आंदोलन शुरू करेंगे जिसमें ईमानदार और संवेदनशील लोग आगे आएंगे, ताकि हमसे छीनी गई चीज़ों को वापस पाने के संघर्ष का नेतृत्व कर सकें. इस बात पर ज़ोर देते हुए कि उनकी मुख्यमंत्री बनने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, रुहुल्लाह ने नई पीढ़ी के ऐसे नेताओं की ज़रूरत बताई जो लोगों के दुखों को समझें और उनकी गरिमा को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हों. उन्होंने कहा कि मुझे अच्छे चरित्र वाले, सच्चे युवा दीजिए, जिनके उसूल स्पष्ट हों, जो कश्मीरियों का दर्द महसूस करते हों और जो जम्मू-कश्मीर के लोगों की तकलीफ़ों को जानते हों. मुझे ऐसे ईमानदार नेता दीजिए, और आप देखेंगे कि वे किस तरह गरिमा के साथ आपका नेतृत्व करते हैं.
फारूक अब्दुल्ला ने जनता के भरोसे को तोड़ा
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल बदलने से तब तक कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, जब तक कि नेतृत्व के पदों पर बैठे लोगों के चरित्र में बदलाव न आए. उन्होंने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों से संपर्क करेंगे और एक ऐसा आंदोलन खड़ा करेंगे, जिससे अयोग्य नेताओं की जगह ईमानदार और नेक लोगों को लाया जा सके. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के लंबे जीवन की कामना करते हुए रूहुल्लाह ने उम्मीद जताई कि वे तब तक जीवित रहेंगे जब तक कि ऐसे नए नेता सामने न आ जाएं. उन्होंने फारूक अब्दुल्ला पर जनता के भरोसे को तोड़ने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि अब UK का पासपोर्ट आपको नहीं बचा पाएगा. विदेशी नागरिकता होने से कोई मदद नहीं मिलेगी. आपने लोगों के भरोसे को तोड़ा है. रूहुल्लाह ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का इतिहास रहा है कि उसने लोगों की गरिमा और अधिकारों के मामले में समझौता किया है.
कहा- यह देश RSS की जागीर नहीं
2024 के लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी द्वारा उनसे किए गए आग्रह का जिक्र करते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने अपने राजनीतिक हितों के लिए उनका इस्तेमाल किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पार्टी अपने वादों से मुकरती है, तो वह सारी पोल सबके सामने खोल देंगे. BJP और RSS को संबोधित करते हुए, रूहुल्लाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखना होगा. उन्होंने कहा कि यह देश RSS की जागीर नहीं है. साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचला जा रहा है और मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर आप जम्मू-कश्मीर के लोगों का दिल जीतना चाहते हैं, तो भारत को सच में ‘भारत’ बनाइए. एक ऐसा भारत जिसे मुसलमानों, हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों ने अपने पसीने और खून से सींचा है.

अधिकार के लिए लड़ने की कही बात
उन्होंने कहा कि कश्मीर, जम्मू और लद्दाख के लोग अपनी गरिमा या संवैधानिक अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर अपना राजनीतिक एजेंडा खुद तय करेगा, न कि केंद्र द्वारा थोपे गए एजेंडे को स्वीकार करेगा. उन्होंने कहा कि हम अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए किसी भी ताकत के खिलाफ लड़ेंगे, चाहे वह कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो. हम लड़ेंगे और अपने अधिकार वापस लेकर रहेंगे.
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहले ही दिन हंगामा, विधायकों ने की हाथापाई, रोकने उतरे मार्शल
