Home Latest News & Updates UP चुनाव के लिए BJP हाईकमान ने संभाली कमान, MP-MLA से लेकर संगठन तक के लिए तय किए 10 सूत्र

UP चुनाव के लिए BJP हाईकमान ने संभाली कमान, MP-MLA से लेकर संगठन तक के लिए तय किए 10 सूत्र

by Kamlesh Kumar Singh 3 November 2026, 1:57 PM IST (Updated 3 November 2026, 1:59 PM IST)
3 November 2026, 1:57 PM IST (Updated 3 November 2026, 1:59 PM IST)
BJP high command takes charge UP elections

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं. चुनावी मैदान में समाजवादी पार्टी और दूसरे विपक्षी दलों को चुनौती देने के लिए बीजेपी हाईकमान ने खुद मोर्चा संभाल लिया है. पार्टी नेतृत्व ने संगठन की निष्क्रियता दूर करने नेताओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट रखने के लिए 10 सूत्रीय रणनीति तैयार की है. पार्टी ने सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है.

अमित शाह भी सक्रिय नजर आ रहे

इस चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सक्रिय नजर आ रहे हैं. अमित शाह उत्तर प्रदेश बीजेपी की कार्यकारिणी बैठक में शामिल हुए और पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं से सीधे संवाद किया. इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, यूपी प्रभारी विनोद तावड़े और संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का फीडबैक लिया. क्षेत्रवार बैठकों से मिले फीडबैक के आधार पर ही पार्टी ने नेताओं के लिए चुनावी दिशा-निर्देश तय किए हैं.

रामभक्तों पर गोली से राम मंदिर तक, योगी ने सपा को घेरा; बोले- ‘यूपी के लिए शाप है सपा’

बीजेपी का 10 सूत्रीय चुनावी ब्लूप्रिंट

  • जातीय राजनीति की काट विकास और सुशासन से: बीजेपी की रणनीति है कि चुनावी बहस को केवल जातीय समीकरणों तक सीमित न होने दिया जाए. पार्टी नेताओं को विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समाजवादी पार्टी के PDA नैरेटिव का मुकाबला किया जा सके.
  • गुंडाराज के मुद्दे को फिर बनाएगी चुनावी हथियार: बीजेपी 2017 से पहले के यूपी की याद दिलाकर समाजवादी पार्टी को घेरने की तैयारी में है. इसके लिए 1995 के गेस्ट हाउस कांड, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों, माफिया प्रभाव, अवैध खनन और जमीन कब्जाने जैसे मुद्दों को चुनावी बहस में शामिल करने की रणनीति है.
  • 2017 से पहले और बाद की तुलना: पार्टी नेताओं को निर्देश है कि अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल की तुलना योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज से करें. कानून-व्यवस्था, बिजली, सड़क, एक्सप्रेसवे और निवेश जैसे मुद्दों पर सरकार की उपलब्धियां जनता के सामने रखी जाएं.
  • PDA के मुकाबले व्यापक सामाजिक समीकरण: समाजवादी पार्टी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA समीकरण की काट के लिए बीजेपी सभी समुदायों तक अपनी पहुंच बढ़ाएगी. पार्टी का जोर सरकारी योजनाओं, कल्याणकारी योजनाओं और विकास के जरिए व्यापक सामाजिक समर्थन तैयार करने पर रहेगा.
  • छह क्षेत्रों में मेगा रैलियों की तैयारी: पश्चिमी यूपी, ब्रज, रोहिलखंड, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में बड़े स्तर पर क्षेत्रीय रैलियों के जरिए चुनावी माहौल बनाने की रणनीति है. इसके जरिए हर क्षेत्र में पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार किया जाएगा.
  • मोदी-योगी मॉडल को बनाएगी चुनावी नैरेटिव: बीजेपी केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को चुनावी मुद्दा बनाएगी. एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच को प्रमुखता से प्रचारित किया जाएगा.
  • खास वोटर वर्गों पर विशेष फोकस: किसान, युवा, महिलाएं, सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, पिछड़े और दलित वर्ग बीजेपी की रणनीति के केंद्र में रहेंगे. अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच को पार्टी एक अलग राजनीतिक चुनौती के रूप में देख रही है.
  • बूथ स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट: चुनाव जीतने के लिए बीजेपी बूथ कमेटियों और पन्ना प्रमुखों के नेटवर्क को मजबूत करेगी. हर विधानसभा क्षेत्र और बूथ से फीडबैक लेने, मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने और संगठन की सक्रियता सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा.
  • गुटबाजी पर लगाम, नेताओं में तालमेल: पार्टी हाईकमान की प्राथमिकता संगठन को एकजुट रखना है. सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और स्थानीय नेताओं के बीच मतभेद खत्म करने और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं.
  • युवा और किसान होंगे चुनावी रणनीति के केंद्र में: बीजेपी युवाओं के बीच भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और रोजगार के अवसरों को प्रमुखता से उठाएगी. वहीं, किसानों के बीच पीएम किसान सम्मान निधि, गन्ना भुगतान और कृषि से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार का पक्ष मजबूत करने की तैयारी है.

BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती PDA नैरेटिव

2027 के चुनाव में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती समाजवादी पार्टी के PDA समीकरण को कमजोर करना है. अखिलेश यादव लगातार पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक राजनीतिक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में बीजेपी की रणनीति जातीय राजनीति के मुकाबले विकास, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का व्यापक सामाजिक समीकरण खड़ा करने की है. बीजेपी की इस पूरी कवायद का मकसद सिर्फ चुनावी रैलियों और प्रचार तक सीमित नहीं है. पार्टी नेतृत्व संगठन की निष्क्रियता दूर करने, नेताओं की जवाबदेही तय करने और बूथ स्तर तक चुनावी मशीनरी को सक्रिय करने पर जोर दे रहा है. अमित शाह की सक्रियता और राष्ट्रीय नेतृत्व की लगातार बैठकों से साफ है कि बीजेपी 2027 के यूपी चुनाव को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती.

मिशन यूपी 2027: PM मोदी से बूथ कार्यकर्ताओं तक जिम्मेदारी तय करेगी BJP, घर-घर संपर्क अभियान पर जोर

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?