Home राज्य कालिंदी कुंज में MCD का एक्शन, ओ-जोन इलाके में अवैध मकानों और झुग्गियों पर चला बुलडोजर

कालिंदी कुंज में MCD का एक्शन, ओ-जोन इलाके में अवैध मकानों और झुग्गियों पर चला बुलडोजर

by Live Times 16 June 2026, 2:55 PM IST
16 June 2026, 2:55 PM IST
Kalindi Kunj Bulldozer Action
  • संवाददाता शालिनी झा की रिपोर्ट

Kalindi Kunj Bulldozer Action: राजधानी दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र यानी ओ-जोन में रहने वाले हजारों परिवारों पर बेघर होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल ही में दिल्ली के कई इलाकों को ओ-जोन के दायरे में चिन्हित किए जाने के बाद प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है. इसी क्रम में कुछ दिन पहले मिलन विहार में बुलडोजर कार्रवाई की गई थी और अब सोमवार सुबह कालिंदी कुंज स्थित खड्डा कॉलोनी में भी बड़े पैमाने पर झुग्गियों पर बुलडोजर चलाया गया.

नोटिस न देने का आरोप

सुबह-सुबह प्रशासनिक टीम बुलडोजर और भारी पुलिस बल के साथ इलाके में पहुंची और कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान लोगों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला. कई परिवार अपने सामान को बचाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ लोगों के घर उनकी आंखों के सामने मलबे में तब्दील हो गए. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं. अधिकांश परिवार खेती-बाड़ी, पशुपालन और मजदूरी जैसे कार्यों से अपना जीवनयापन करते हैं. उनका आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय या स्पष्ट नोटिस नहीं दिया गया और अचानक कार्रवाई शुरू कर दी गई. लोगों का कहना है कि घर टूटने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल रहने की व्यवस्था का है.

बाढ़ का खतरा

कालिंदी कुंज और इसके आसपास का बड़ा हिस्सा यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आता है. इलाके में एमसीडी और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से ओ-जोन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र संबंधी बोर्ड भी लगाए गए हैं. प्रशासन का तर्क है कि यह क्षेत्र संवेदनशील है और हर वर्ष मानसून के दौरान यहां बाढ़ का खतरा बना रहता है. कई बार पूरा इलाका पानी में डूब जाता है, जिससे लोगों की जान और संपत्ति दोनों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है. हालांकि, कार्रवाई के दौरान सामने आए दृश्य काफी भावुक करने वाले थे. महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रोते-बिलखते देखा गया.

रोते-बिलखते लोग

कई परिवारों ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई से यहां घर बनाए थे. एक छोटी बच्ची अपने टूटे हुए घर को देखकर फूट-फूटकर रोती नजर आई. उसका कहना था कि अब उसके परिवार के पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए थी. उनका कहना है कि यदि यह क्षेत्र वास्तव में रहने योग्य नहीं है, तो सरकार को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना चाहिए ताकि परिवार सड़क पर आने से बच सकें. ओ-जोन में चल रही इस कार्रवाई ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण, यमुना के बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने की जरूरत और वहां वर्षों से रह रहे लोगों के पुनर्वास जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया है. एक ओर प्रशासन नियमों और सुरक्षा का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार अपने आशियाने के उजड़ने का दर्द बयां कर रहे हैं.

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