CM Mohan Yadav: कहते हैं राजनीति में बड़ी-बड़ी बातें करना बहुत आसान होता है… लेकिन जब खुद के घर पर बात आए तो इरादे डगमगा जाते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसकी चर्चा आज हर जुबान पर है. उज्जैन में सिंहस्थ के भव्य आयोजन से पहले जब सडक चौड़ीकरण की बात आई तो सीएम मोहन ने किसी और का इंतजार नहीं किया… बल्कि खुद अपने हाथों में कुदाली थाम ली और अपने ही पैतृक मकान को हटाने की शुरुआत कर दी.
“नियम सभी के लिए एक”
डॉ. मोहन यादव अपने पैतृक घर के बाहर खड़े थे, चेहरे पर यादों की भावुकता थी लेकिन आंखों में संकल्प. वे कुदाली से दीवार का हिस्सा हटा देते हैं. बता दें उज्जैन का वो घर सीएम डॉ. मोहन यादव का पैतृक घर था, जहां उनका बचपन बीता, जहां की दीवारों में अनगिनत यादें सिमटी थीं. सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत जब सडक़ें चौड़ी करने का नक्शा तैयार हुआ तो सीएम डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान भी इस विस्तार की जद में आ गया. नियम सबके लिए बराबर हैं, इसी सोच को सही साबित करते हुए डॉ. यादव ने किसी पद का फायदा नहीं उठाया, बल्कि खुद मिसाल बन गए.
कुदाली चलाते वक्त मुख्यमंत्री थोड़े भावुक जरूर नजर आए, आखिर अपने घर से जुड़ी स्मृतियों को अलग करना आसान नहीं होता, लेकिन अगले ही पल उनका संदेश साफ था, विकास कार्यों में जनहित और धर्मकार्य सर्वोपरि हैं. अगर शहर का विकास अपने घर से शुरू होता है तो इसमें पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता.
सार्वजनिक हित सबसे आगे
सीएम ने कहा कि सिंहस्थ का आयोजन पूरे प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय है. श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो, इसके लिए सड़कों का चौड़ा होना जरूरी है. सार्वजनिक हित के आगे व्यक्तिगत भावनाएं गौण हैं और विकास की शुरुआत अपने आप से ही होनी चाहिए. बता दें एक तरफ जहां लोग अपने एक इंच निर्माण के लिए अदालतों के चक्कर काटते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक मुख्यमंत्री का अपने ही घर पर कुदाली चलाना यह साबित करता है कि नेतृत्व केवल आदेश देने का नाम नहीं, बल्कि खुद उदाहरण बनने का नाम है. डॉ. मोहन यादव का यह कदम सिंहस्थ 2028 के लिए उनकी प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा प्रमाण है.
उज्जैन ने पेश किया उदाहरण
सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि जब मैं पहली बार साइंस कॉलेज से चुनाव जीतकर आया, तब जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव लड़ा, फिर प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा और उसके बाद भी जब-जब चुनाव लड़ा, हर चुनाव में मेरे सामने एक बात रही. आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए हमें अपने आचरण और कार्यों से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए. मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दृष्टि से एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं. वे व्यक्तिगत हितों से परे रहकर नियम, कानून और सुशासन के लिए आवश्यक सभी विषयों को प्राथमिकता देते हैं. उनके सार्वजनिक जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है. उज्जैन के लोगों ने अपना मकान खुद पीछे हटाया, ये आदर्श उदाहरण है. उज्जैन की आबादी 8 लाख है, लेकिन 40 करोड़ लोगों के आने का बोझ है. सबने योगदान दिया. मैं अपनी सरकार को भी धन्यवाद देता हूं, जिसने बिना भेदभाव के चाहे वो हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, पारसी, सबने अपने देवस्थान तक पीछे किए. इससे सरकार पर विश्वास बनता है. यही उज्जैन का आदर्श है, इसी से सरकार पर भरोसा बनता है.
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