MP News: मध्य प्रदेश के मैहर जिले का बिगौड़ी गांव एक बार फिर खौफ और तनाव के साए में है. 16 सितंबर की रात हुई भैयालाल कोल की बेरहमी से हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया है. पुरानी रंजिश के नाम पर बुनी गई साजिश, कुएं के पास बुलावा और फिर गला दबाकर दी गई दर्दनाक मौत. पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपी अफसर खान, इस्माइल उर्फ पप्पू खान और अजमेर खान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी से गांव का खौफ खत्म हो गया है. बता दें कि बिगौड़ी गांव में सन्नाटा है, लेकिन इस सन्नाटे के पीछे भारी आक्रोश और खौफ छिपा है.
भैयालाल कोल की हत्या कर कुएं में फेंका शव
परिजनों के मुताबिक 16 सितंबर की रात भैयालाल कोल को गांव के ही एक कुएं के पास बुलाया गया. वहां उसके साथ मारपीट की गई, गला घोंटा गया और वारदात को छिपाने के लिए शव को कुएं में फेंक दिया गया. घटना के सामने आते ही ताला थाना पुलिस हरकत में आई और तीन आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. लेकिन भैयालाल के जाने के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. यह पहली बार नहीं है जब बिगौड़ी गांव खून के छीटों से लाल हुआ हो. इससे पहले 2025 में शिवनारायण तिवारी की हत्या के बाद भी गांव में भयंकर तनाव फैला था, महापंचायतें हुईं और आगजनी तक की नौबत आ गई थी. अब एक साल बाद भैयालाल की हत्या ने पुराने जख्मों को फिर हरा कर दिया है.
खौफ से गांव छोड़ने को मजबूर हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का एक वर्ग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है. लगातार मिल रही धमकियों और खौफ के माहौल के कारण अब लोग अपने ही गांव से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. दीवारों पर लिखे घर बिकाऊ है, के ये पोस्टर गांव वालों की बेबसी और पुलिस-प्रशासन के सामने उठते गंभीर सवालों का सबूत है. हिंदू नेता लक्ष्मीकांत द्विवेदी कहते हैं कि गांव में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं. हिंदू समाज अपने ही घर में असुरक्षित महसूस कर रहा है. अगर सख्त से सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा. हिंदू नेता राकेश सिंह बताते हैं कि प्रशासन केवल खानापूर्ति न करे. आरोपियों पर ऐसी कठोर कार्रवाई हो कि अपराधियों में डर पैदा हो और जो परिवार पलायन की बात कर रहे हैं, उन्हें तुरंत सुरक्षा और भरोसा दिया जाए.
ग्रामीणों में भरोसा जगा रही पुलिस
बता दें कि इधर गांव में शांति कायम करने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार ग्रामीणों से संवाद कर रही हैं. आश्वासन दिए जा रहे हैं कि सुरक्षा पूरी मिलेगी और किसी को गांव छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन सवाल वही है, क्या कागजी आश्वासनों से खौफ का यह माहौल खत्म हो पाएगा. बिगौड़ी गांव में एक तरफ इंसाफ की मांग है तो दूसरी तरफ दीवारों पर लिखा पलायन का दर्द. पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजकर अपनी शुरुआती कार्रवाई तो पूरी कर दी है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है गांव के भीतर फिर से विश्वास को कायम करना. अब देखना होगा कि प्रशासन इस तनाव को खत्म करने और ग्रामीणों को सुरक्षा का अहसास कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है.
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