Home Latest News & Updates खत्म हुआ चिता आंदोलन! केन-बेतवा प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने धरनास्थल से हटाया

खत्म हुआ चिता आंदोलन! केन-बेतवा प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने धरनास्थल से हटाया

by Neha Singh 19 July 2026, 10:24 AM IST (Updated 19 July 2026, 10:25 AM IST)
19 July 2026, 10:24 AM IST (Updated 19 July 2026, 10:25 AM IST)
Ken Betwa Project Protest (1)

Ken Betwa Project Protest: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक और दूसरे प्रोजेक्ट्स के खिलाफ 15 दिन से चल रहा प्रदर्शन रविवार को खत्म हो गया. पुलिस ने रविवार सुबह जबरन धरनास्थल से लोगों को हटा दिया और जगह खाली करवा दी. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के नेता अमित भटनागर को हिरासत में लिया गया, जबकि पुलिस ने किसी भी गिरफ्तारी से इनकार किया. यह विरोध प्रदर्शन पिछले दो हफ्ते से छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे हो रहा था. प्रदर्शनकारी बीते 15 दिनों से प्रतीकात्मक रूप से ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता आंदोलन’ और ‘फांसी सत्याग्रह’ कर रहे थे.

सुबह 5 बजे पहुंची पुलिस

इस प्रदर्शन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे थे, जो पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. वे प्रोजेक्ट को लागू करने में कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई और पर्यावरण और कानूनी नियमों का पालन करने की मांग कर रहे थे. प्रदर्शनकारी नेता दिव्या अहिरवार ने आरोप लगाया कि रविवार सुबह करीब 5 बजे बड़ी संख्या में पुलिस वाले साइट पर पहुंचे और भटनागर और दूसरे प्रदर्शनकारियों को मीडिया से बात करने से पहले ही हिरासत में ले लिया. अहिरवार ने दावा किया कि अगर भटनागर या किसी भी प्रदर्शनकारी को कोई नुकसान होता है तो प्रशासन जिम्मेदार होगा और उन्होंने लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने की अपील की.

प्रदर्शनकारियों को गांव भेजा गया

एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस आदित्य पटले ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को बसों में उनके गांवों पहुंचाया गया. पन्ना जिले के लोगों को वहां से गांव भेज दिया गया, जबकि छतरपुर और आस-पास के इलाकों के लोगों को उनके गांवों बसों में छोड़ दिया गया. पाटले ने इस बात से इनकार किया कि किसी भी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया था.

क्या है केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट, नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत देश का पहला रिवर इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद केन के पानी को बेतवा नदी में ट्रांसफर करना है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई और पीने के पानी की सुविधा दी जा सके. कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे 3 जुलाई को शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में केन-बेतवा नदी जोड़ने के प्रोजेक्ट और दूसरे डेवलपमेंट कामों का विरोध किया गया. पिछले दो हफ़्ते से इस आंदोलन ने सबका ध्यान खींचा था, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास, पर्यावरण सुरक्षा उपायों और प्रोजेक्ट को लागू करने से जुड़े उल्लंघन का आरोप लगाया था.

प्रदर्शनकारियों का आरोप

भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट, साथ ही मझगांव और रुंझ सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि बेघर हुए परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल, पानी के साधन, रोजी-रोटी और सांस्कृतिक पहचान खो दी है, जबकि कुछ पर झूठे क्रिमिनल केस किए गए, गैर-कानूनी तरीके से निकाला गया, बिजली सप्लाई काट दी गई और स्कूल गिरा दिए गए. उन्होंने मांग की कि प्रशासन गांव वालों को डराना बंद करे और प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों की लिस्ट हर गांव में सबके सामने दिखाए.

प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा है कि प्रोजेक्ट कानून के मुताबिक चल रहा है. प्रशासन का कहना है कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट देश के लिए जरूरी है और इससे बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई, पीने के पानी की सप्लाई और पूरे विकास को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रशासन ने जो आश्वासन दिए थे, वे पूरे नहीं किए गए.

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News Source: PTI

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