Newborn Study: जयपुर के जेके लोन अस्पताल में डॉक्टरों ने एक कमाल की स्टडी की है. उन्होंने पाया कि एक आसान स्कोरिंग सिस्टम, जिसे CRIB-II (क्लिनिकल रिस्क इंडेक्स फॉर बेबीज़-II) कहते हैं, समय से पहले और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की जान बचाने में वरदान साबित हो सकता है. सवाई मान सिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 181 बच्चों पर यह रिसर्च की. इस सिस्टम से अस्पताल में भर्ती होते ही बच्चे के स्वास्थ्य जोखिमों की तुरंत पहचान हो जाती है. यह रिसर्च प्रसिद्ध ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक रिसर्च’ में भी छपी है. बच्चों के डॉक्टर और रिसर्च करने वालों में से एक, डॉ. योगेश यादव ने कहा कि इस स्कोर का इस्तेमाल करके शुरुआती आकलन से इलाज के बारे में फ़ैसले लेने में मदद मिल सकती है.
CRIB-II स्कोर से पता चलेगा मौत का जोखिम
उन्होंने कहा कि अगर हम भर्ती होने के समय CRIB-II स्कोर का हिसाब लगाते हैं, तो हम बच्चे की स्थिति की गंभीरता को समझ सकते हैं. इससे डॉक्टरों को इलाज की सही दिशा तय करने में जल्दी मदद मिलती है और बच्चे को बचाने की संभावना बढ़ जाती है. स्टडी में पाया गया कि जिन बच्चों का CRIB-II स्कोर ज़्यादा था, उनमें मौत का जोखिम भी ज़्यादा था. स्टडी में शामिल बच्चों की औसत जेस्टेशनल उम्र (गर्भावस्था की अवधि) लगभग 28.88 हफ़्ते थी और जन्म के समय औसत वज़न 1.01 किलोग्राम था, जो सामान्य से बहुत कम है. स्कोरिंग सिस्टम के बारे में बताते हुए डॉ. यादव ने कहा कि 0-5 स्कोर का मतलब कम जोखिम, 6-10 का मतलब मध्यम जोखिम, 11-15 का मतलब ज़्यादा जोखिम और 15 से ऊपर का मतलब बहुत ज़्यादा जोखिम है. स्कोर जितना ज़्यादा होगा, गंभीर बीमारी और मौत का जोखिम उतना ही ज़्यादा होगा.
उन्होंने बताया कि CRIB-II स्कोर पांच कारकों पर आधारित है: जन्म के समय वज़न, जेस्टेशनल उम्र, भर्ती होने के समय शरीर का तापमान, रक्त में एसिड का स्तर और बच्चे का लिंग. इसकी अहमियत बताते हुए डॉ. यादव ने कहा कि CRIB-II सिर्फ़ मौत के जोखिम का पता लगाने वाला स्कोर नहीं है, बल्कि NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में फ़ैसले लेने के लिए एक ज़रूरी वैज्ञानिक टूल भी है. शुरुआती कुछ घंटों में ही हम पहचान सकते हैं कि किस नवजात शिशु को ज़्यादा जोखिम है. उन्होंने आगे कहा कि यह सिस्टम तब और भी काम का होता है जब मेडिकल संसाधन सीमित हों.
इलाज में CRIB-II की भूमिका महत्वपूर्ण
डॉ. यादव ने कहा कि जब बेड, वेंटिलेटर या ट्रेंड स्टाफ़ कम हों, तो NICU में ज़्यादा स्कोर वाले बच्चों को प्राथमिकता दी जा सकती है. इससे यह तय करने में भी मदद मिलती है कि किन नवजात शिशुओं को तुरंत बड़े सेंटर्स में रेफर करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि यह स्कोर डॉक्टरों को परिवारों के साथ बेहतर बातचीत करने में भी मदद करता है. उन्होंने कहा कि CRIB-II के ज़रिए हम माता-पिता को बच्चे की हालत, संभावित नतीजों और इलाज की ज़रूरतों के बारे में साफ़ और सटीक जानकारी दे सकते हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह टूल भारत में अहम भूमिका निभा सकता है.
मृत्यु दर को कम करने में मिल सकती है मदद
उन्होंने कहा कि भारत जैसे सीमित संसाधनों वाले देश में CRIB-II का नियमित इस्तेमाल नवजात शिशुओं की देखभाल की क्वालिटी को बेहतर बना सकता है और मृत्यु दर को कम करने में मदद कर सकता है. इससे हमें शुरुआती घंटों में ही ज़्यादा जोखिम वाले बच्चों की पहचान करने में मदद मिलती है. जानकारों का कहना है कि समय से पहले जन्म भारत में नवजात शिशुओं की मौत की मुख्य वजहों में से एक है, और CRIB-II जैसे आसान और भरोसेमंद टूल्स का इस्तेमाल समय पर इलाज और बेहतर नतीजे सुनिश्चित कर सकता है. मालूम हो कि सवाई मान सिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज मुख्य कॉलेज और प्रशासनिक संस्थान है, जबकि जेके लोन अस्पताल उसी मेडिकल कॉलेज के अधीन आने वाला और उससे संबद्ध एक विशेष बाल व शिशु रोग अस्पताल है.
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News Source: PTI
