CJP Protest : जंतर मंतर पर 28 जून से कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) का चल रहा विरोध-प्रदर्शन अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है. पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद अब प्रदर्शन स्थल पर लगातार लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. इसी बीच सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च करने का ऐलान किया है और युवाओं की नजर इस बात पर टिकी है कि ‘चलो संसद’ के दौरान कैसी परिस्थिति हो सकती है? इसी बीच दिल्ली पुलिस ने आज शाम तक जंतर मंतर खाली करने को लेकर अनाउंसमेंट करना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें ऐलान किया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर शाम 7 बजे तक ही प्रदर्शन की अनुमति है. इसलिए सात बजे के बाद इस स्थल को खाली कर दिया जाए. दूसरी तरफ वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या पुलिस आज रात तक इस एरिया को खाली करवा देगी.
20 मार्च को चलो संसद का ऐलान
सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली पुलिस ने कहा था कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता को यहां से हटाया गया है. शनिवार को सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल का 21वां दिन था और वह लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. वहीं, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने ऐलान किया था कि वह अब अनिश्चितकालीन के लिए अनशन पर बैठ गए हैं. 20 जुलाई को होने वाला चलो संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा. मामला यह है कि सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन चले संसद अभियान के तहत शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया था. वहीं, बुधवार को एक वीडियो जारी करके वांगचुक ने लोगों से अपील की थी कि वह भी इस अभियान में शामिल होने के लिए आए हैं और हमारे साथ स्टूडेंट के न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं.

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यातायात के लिए किए गए विशेष इंतजाम
इसी बीच संसद के मॉनसून सत्र और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार को विशेष एडवाइजरी जारी की. प्रशासन ने संसद परिसर के आसपास भारी ट्रैफिक और सख्त पाबंदियों की चेतावनी दी है. नई दिल्ली क्षेत्र में यातायात सुचारु रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. यात्रियों को समय से पहले सफर की योजना बनाने और अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है. इस दौरान रफी मार्ग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, मौलाना आज़ाद रोड, रायसीना रोड, राजेंद्र प्रसाद रोड, पार्लियामेंट स्ट्रीट, अशोक रोड और पंडित पंत मार्ग सहित आसपास के कई प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक प्रभावित रहेगा.
वैकल्पिक रास्तों की दी सलाह
ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को मुख्य जंक्शन और गोल-चक्करों से बचने की सलाह भी दी है. इनमें विजय चौक, बोट क्लब, रेल भवन गोल-चक्कर, सुनहरी मस्जिद गोल-चक्कर, पटेल चौक गोल-चक्कर, बूटा सिंह गोल-चक्कर, प्राइम चौक गोल-चक्कर, GRG गोल-चक्कर और जलेबी चौक गोल-चक्कर शामिल हैं. वैकल्पिक रास्तों के तौर पर यात्रियों को जनपथ, मान सिंह रोड, अकबर रोड, तीन मूर्ति मार्ग, शांति पथ, मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद रोड, कमाल अतातुर्क मार्ग, पंचशील मार्ग, विनय मार्ग, कनॉट प्लेस में आउटर सर्कल, बाबा खड़क सिंह मार्ग, RML गोल-चक्कर, मदर टेरेसा क्रिसेंट रोड, 11 मूर्ति और सरदार पटेल मार्ग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. गाड़ी चलाने वालों से कहा गया है कि वे सब्र रखें, ट्रैफिक नियमों का पालन करें और अहम चौराहों पर तैनात ट्रैफ़िक कर्मियों का सहयोग करें.

रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को किया तैनात
नई दिल्ली से आने वाली हर गाड़ी की बारीकी से जांच की जा रही है. अहम जगहों पर अतिरिक्त पिकेट बनाए गए हैं और रिजर्व फोर्स को स्टैंडबाय पर रखा गया है. संवेदनशील इलाकों में CCTV निगरानी भी बढ़ा दी गई है. सूत्रों ने बताया कि जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस, शंकर चौक और दूसरी अहम जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई हैं. पुलिस सूत्रों ने कहा कि संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली में किसी को भी विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी. यह कड़ी निगरानी इसलिए बढ़ाई गई है कि CJP ने NEET में कथित गड़बड़ियों के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को ‘चलो संसद’ मार्च का ऐलान किया है.
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आंदोलन को लेकर क्या कह रही CJP?
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने शनिवार को कहा था कि उनके पति का अनशन अभी जारी है. उन्होंने अभी तक किसी प्रकार का शुगर का इस्तेमाल नहीं किया है. गीतांजलि की तरफ से यह बयान वांगचुक के अस्पताल में भर्ती करने के बाद आया था. इसके बाद सीजेपी के संस्थापक दीपके ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान कर दिया था. वहीं, आंदोलन के पहले ही दिन से विश्लेषण कर रहे योगेंद्र यादव ने कहा कि जिन लोगों को इस आंदोलन के भविष्य क्या होगा? यह सवाल है उन्हें एक बार जंतर-मंतर पर जरूर आना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को आंदोलन से हटाकर एक कायराना हरकत की है. उन्हें सफेद चादर में इस तरह से ले जाया गया कि ऐसे कभी भी किसी जिंदा आदमी को नहीं लेकर जाया जाता है. बहाना ये लगाया कि कोर्ट ने ऐसा ऑर्डर दिया है. लेकिन कोर्ट का ऑर्डर यह नहीं कहता है कि किसी व्यक्ति को इस तरह से घसीटकर ले जाया जाए. साथ ही अभी तक किसी डॉक्टर ने नहीं कहा था कि उनके वाइटल्स डाउन थे. उन्होंने आगे कहा कि एक समय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा जा रहा था लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इस्तीफा मांगा जा रहा है. इसका सीधा मतलब है कि अब यह आंदोलन व्यवस्था के विरुद्ध हो गया है.

आंदोलन को मिल रही है गति
वर्तमान समय में सोनम वांगचुक की जगह तीन अन्य लोग AISA की नेहा, मनीष और आमीन भी 28 जून से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं. ये लोग भी युवा छात्रों का समर्थन कर रहे हैं, जिसमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शामिल हैं. सोनम को प्रदर्शन स्थल से ले जाने के बाद भी इन स्टूडेंट्स ने अभी तक अपनी भूख हड़ताल जारी रखी है. इसी बीच दिल्ली पुलिस के एक्शन की चर्चा भी तेज हो गई है और लोग कह रहे हैं कि अगर इस तरह की कार्रवाई होती है तो यह अच्छा नहीं होगा. अब आम लोग दिल्ली पुलिस के एक्शन की वजह से भारी संख्या में जंतर-मंतर पर लोग पहुंच रहे हैं. युवाओं में सरकार के प्रति लगातार गुस्सा बढ़ता जा रहा है. पुलिस एक्शन के खिलाफ युवाओं में लगातार गुस्सा बढ़ता जा रहा है. उनका कहना है कि हाई कोर्ट ने यही कहा था कि सोनम वांगचुक की मेडिकल निगरानी रखनी है. साथ ही यह नहीं कहा था कि आप लोग जबरदस्ती यहां से उठाइए और फिर उनका अनशन तुड़वा दीजिए. हालांकि, अभी तक इस आंदोलन को समर्थन सोनम वांगचुक की वजह से मिल रहा है और सबसे ज्यादा लोगों का समर्थन भी वांगचुक की भूख हड़ताल की वजह से ही मिल रहा था.
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भारी संख्या में लोग पहुंच रहे जंतर-मंतर
मानसून सत्र का अब एक दिन बचा है और युवा भारी संख्या में लगातार जंतर मंतर पर पहुंच रहे हैं. अगर पुलिस इन लोगों को हटाने के लिए बल प्रयोग का इस्तेमाल करती है तो उसका खामियाजा भी सरकार को ही भुगतना पड़ेगा. अगर नहीं भी हटाते हैं तो विपक्षी सांसद इस आंदोलन को अपना समर्थन दे चुके हैं. साथ ही सोमवार को हो सकता है कि दिल्ली आने वाले सांसद इस आंदोलन में शामिल हो सकता है. अगर इस दौरान पुलिस कार्रवाई करते हैं तो इसका सीधा प्रभाव केंद्र सरकार पर देखने को मिल सकता है. वहीं, सोनम वांगचुक को हटाने के बाद से ही सीजेपी लगातार इस बात को कह रही है कि दिल्ली पुलिस कभी भी बल प्रयोग कर सकती है. शनिवार को कई बार सीजेपी ने लोगों से ज्यादा से ज्यादा तदाद में जंतर-मंतर पर पहुंचने की अपील की थी. साथ ही इससे पहले जब पहलवान बृजभूषण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे तब भी दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग करके उन्हें हटाने का काम किया था. साथ ही जब अवारा कुत्तों पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदर्शन हुए उस वक्त भी ऐसा ही हुआ था. हैरान करने वाली बात यह है कि अभी तक दिल्ली पुलिस ने ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया है.

क्या हो पाएगा मार्च सफल?
सीजेपी का 20 जुलाई को होने वाले मार्च को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है. फिलहाल, जिस तरह से दिल्ली पुलिस ने कमर कस ली है. उसके हिसाब से लोगों का कहना है कि मुश्किल है कि चलो संसद अभियान सफल हो पाए या फिर इन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जाए. फिलहाल रविवार को भी जनता का आना जारी है और अगर सरकार को लगा कि ये मूवमेंट किसान आंदोलन की तरह बढ़ने लगा है तो सरकार बल प्रयोग करने वाले कदम को भी पीछे हटा सकती है. साथ ही आंदोलन इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा ऐसा नहीं लग रहा है और वह लगातार इस अभियान को आगे बढ़ाने की भी बात कह रहे हैं.
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