Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को एक बार फिर हलचल तेज रही. उप-मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शिवसेना-UBT के कई सांसदों के शामिल होने की अटकलों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया. बीते कुछ दिनों से चर्चा में रहे ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए और दिनभर बयानबाजी का दौर चलता रहा.
संजय राउत का पलटवार
शिवसेना-UBT के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनकी पार्टी के सांसदों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है. राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को 15 करोड़ों रुपये के ऑफर दिए जा रहे हैं और कुछ नेताओं को चार्टर्ड विमान से दिल्ली ले जाया गया. उन्होंने कहा कि अगर कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो पहले जनता के बीच जाकर इस्तीफा दे और फिर चुनाव लड़कर अपनी ताकत साबित करे.
पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं सभी सांसद
राउत ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे गुट कमजोर नहीं है और 2022 जैसी स्थिति दोहराना आसान नहीं होगा. उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों के संपर्क में है और कार्यकर्ताओं को अफवाहों से बचना चाहिए.
शिवसेना-यूबीटी से राज्यसभा सांसद रहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने भी पार्टी के पक्ष में मजबूती से मोर्चा संभाला. उन्होंने कहा कि शिवसेना (UBT) विचारधारा और कार्यकर्ताओं की ताकत पर खड़ी है तथा राजनीतिक दबाव या प्रलोभन से पार्टी को कमजोर नहीं किया जा सकता. उन्होंने BJP और शिंदे गुट पर लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि जनता सब कुछ देख रही है. साथ ही अगर जिन्हें जाना ही है वो जाये लेकिन इस्तीफा देकर जाएं.
ऑपरेशन टाइगर नहीं, ऑपरेशन प्रगति
दूसरी ओर शिंदे गुट की नेता Shaina NC ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह किसी प्रकार का ‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं बल्कि ‘ऑपरेशन प्रगति’ है. उनका कहना था कि कई जनप्रतिनिधि विकास की राजनीति के कारण उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं.
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शाइना एनसी ने कहा कि शिंदे सरकार ने राज्य में विकास कार्यों को गति दी है और यदि कोई सांसद या नेता विकास के एजेंडे के साथ जुड़ना चाहता है तो उसे राजनीतिक साजिश बताना गलत होगा. उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना (UBT) अपने आंतरिक संकट को छिपाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है.
क्या टूट सकता है UBT का संसदीय दल?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद दिल्ली में सक्रिय संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में बड़ा फैसला सामने आ सकता है. वहीं, उद्धव ठाकरे खेमे का दावा है कि सभी सांसद पार्टी के साथ हैं और टूट की खबरें केवल अफवाह हैं.
19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस और संसद के मानसून सत्र से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में घटनाक्रम और तेज होने की संभावना है. यदि सांसदों का कोई समूह वास्तव में शिंदे गुट का रुख करता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है. वहीं, अगर यह ऑपरेशन सफल नहीं होता, तो ठाकरे गुट इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश करेगा.
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘ऑपरेशन टाइगर” सचमुच अंतिम चरण में है या फिर शिंदे गुट के शब्दों में यह केवल ‘ऑपरेशन प्रगति’ है? आने वाले कुछ दिन इस राजनीतिक रहस्य से पर्दा उठा सकते हैं.
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