Punjab Government: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो गई है.लगभग 85,000 सरकारी कर्मचारियों को मान सरकार ने जन्माष्टमी का तोहफा दिया है. पंजाब सरकार 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए लगभग 85,000 सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करेगी. कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारियों के लिए बनाई गई कैबिनेट सब-कमेटी ने इस बारे में सिफारिश की थी. यह घोषणा इसलिए अहम है क्योंकि 17 जुलाई, 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान के बराबर वेतन और 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा था. यह वेतन जुलाई 2020 से पहले भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतनमान से काफी कम था, जिन्हें पंजाब वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिलता था.
दो तरह के वेतनमान से कर्मचारियों में था भ्रम
अरोड़ा ने कहा कि पंजाब में दो तरह के वेतनमान थे, जिससे हितों का टकराव और भ्रम पैदा हो रहा था. पंजाब के मूल वेतनमान और केंद्रीय मूल वेतनमान (7वें केंद्रीय वेतन आयोग के अनुसार) के बराबर वेतनमान. उन्होंने कहा कि पंजाब के मूल वेतनमान, जो पारंपरिक रूप से अधिक है, केंद्रीय मूल वेतन से 30 से 70 प्रतिशत तक अधिक है. जब इसमें महंगाई भत्ता (DA) जोड़ा जाता है, जो अभी 42 प्रतिशत है, तो वेतन केंद्रीय वेतनमान से काफी अधिक हो जाता है. उन्होंने कहा कि जब हम गणना और तुलना करते हैं तो केंद्रीय मूल वेतन में 60 प्रतिशत DA जोड़ने के बाद भी पंजाब के वेतनमान और हाथ में आने वाला वेतन (टेक होम सैलरी) अधिक रहता है.
कैबिनेट सब-कमेटी का फैसला होगा लागू
अरोड़ा ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने 17 जुलाई, 2020 के बाद केंद्रीय वेतनमान पर कर्मचारियों की भर्ती करने का फैसला किया था. पिछले छह वर्षों में 85,000 कर्मचारियों की भर्ती की गई है. मान सरकार उन्हें जन्माष्टमी का तोहफ़ा देगी क्योंकि तीन सदस्यों वाली कैबिनेट सब-कमेटी ने फ़ैसला किया है कि इन कर्मचारियों का DA (महंगाई भत्ता) 42% से बढ़ाकर 60% कर दिया जाएगा. अरोड़ा ने कहा कि कमेटी की सिफ़ारिश मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी का फ़ायदा जुलाई 2020 से पहले भर्ती हुए कर्मचारियों को नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही भगवंत मान सरकार हर वर्ग के कल्याण की बात करती रही है.
कर्मचारियों के बिना अच्छे शासन की कल्पना नहींः मंत्री
कहा कि हम अपने कर्मचारियों के बिना अच्छे शासन की कल्पना भी नहीं कर सकते. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब 3 लाख से ज़्यादा सरकारी कर्मचारी अपनी कई मांगों को मनवाने के लिए 27 अगस्त को राज्यव्यापी हड़ताल पर चले गए थे. इन मांगों में उनका बकाया 18% DA जारी करना भी शामिल है. उन्होंने 8 सितंबर को सामूहिक कैज़ुअल लीव (छुट्टी) पर जाने की धमकी भी दी है, अगर राज्य सरकार 27 अगस्त को बिना इजाज़त ग़ैरहाज़िर रहने वालों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का हालिया नोटिस वापस नहीं लेती है. कर्मचारियों ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को जारी नोटिस वापस लेने के लिए राज्य सरकार को 7 सितंबर तक का समय दिया है.
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