Ajnar River: कहते हैं कि समंदर भी बूंद-बूंद से बनता है और तबाही मचाने के लिए कोई बड़ी सेना नहीं, सिर्फ एक इरादा ही काफी होता है, लेकिन ठहरिए… अगर नाम में तबाही हो और काम जिंदगी बचाने का हो तो इसे आप क्या कहेंगे. मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले का ब्यावरा शहर. कभी ब्यावरा की पहचान और लाइफ लाइन कही जाने वाली अजनार नदी प्लास्टिक, थर्माकोल और पूजा सामग्री के बोझ तले दम तोड़ रही थी. बहता हुआ नीला पानी एक काले गंदे नाले में तब्दील हो चुका था.
जुनून के आगे हार गया दर्द
प्रशासन सुस्त था और लोग मजबूर. लेकिन तभी इस कहानी में एंट्री होती है 20 साल के एक छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बिट्टू तबाही की. 26 जनवरी 2026… बीएससी के छात्र बिट्टू ने संकल्प लिया कि वो अजनार को उसका पुराना स्वरूप लौटाकर रहेगा. चौंकाने वाली बात बिट्टू को तैरना तक नहीं आता था, फिर भी बिना डरे, बिना सेफ्टी गियर्स के वो बदबूदार और केमिकल युक्त पानी में उतर गया. शुरुआत में दोस्त साथ आए, लेकिन कीचड़ और बदबू देखकर धीरे-धीरे सब पीछे हट गए. बिट्टू अकेले रह गया. पानी के जहरीले बैक्टीरिया ने शरीर पर हमला किया, हाथों-पैरों की चमड़ी निकलने लगी, स्किन इंफेक्शन हुआ. लेकिन इस जुनून के आगे हर दर्द हार गया.
लोग कहते थे पागल, ताने सहकर भी बदला अजनार का नक्शा
रास्ते में जब कोई अकेला चलता है तो दुनिया अक्सर हंसती है. लोगों ने बिट्टू को पागल कहा, किसी ने नाला साफ करने वाला कहकर मजाक उड़ाया. जब उसने वीडियो बनाए तो सोशल मीडिया पर लोगों ने तंज कसा कि ये सब फेम और लाइक्स का चक्कर है. पर बिट्टू ने ज़ुबान से नहीं, अपनी मेहनत से जवाब दिया. पॉकेट मनी से 30 हजार रुपये खर्च किए, डस्टबिन लगाए, 500 मीटर लंबे घाट को कांच की तरह चमका दिया और नदी से निकली पूजा सामग्री से जैविक खाद बनाना शुरू कर दिया. जब मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने कहा कि ये है असली मंडे मोटिवेशन और फिर आया वो लम्हा, जिसने पूरी दुनिया की सोच बदल दी.
देश के दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने की तारीफ
देश के दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने बिट्टू का वीडियो देखकर लिखा अगर सोशल मीडिया पर ध्यान और लाइक्स पाने की चाहत किसी को ऐसा सार्थक काम करने के लिए प्रेरित करती है तो यह सोशल मीडिया का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल है.आज ब्यावरा की अजनार नदी फिर से मुस्कुरा रही है. बिट्टू तबाही ने साबित कर दिया कि नदियां सिर्फ सरकारों के वादों से साफ नहीं होतीं, उनके लिए नीयत और एक कदम की जरूरत होती है. नाम भले ही तबाही हो, लेकिन इस युवा ने प्रदूषण की तबाही को रोककर एक मिसाल पेश की है. अगर आपके आसपास भी ऐसी ही कोई कहानी या जलस्रोत दम तोड़ रहा है तो इंतजार मत कीजिए… पहला कदम उठाइए.
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