Places to Experience Janmashtami: जन्माष्टमी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, संगीत, रंग, रोशनी और उत्साह का ऐसा शानदार कॉम्बिनेशन है, जिसमें हर उम्र का इंसान खुद को कान्हा के रंग में रंगा हुआ महसूस करता है. कहीं मंदिरों में रात 12 बजे कृष्ण जन्म की घंटियां गूंजती हैं, कहीं रासलीला में कान्हा की कहानियां जीवंत हो उठती हैं. कहीं ऊंची दही हांडी को फोड़ने के लिए युवा मानव पिरामिड बनाते नजर आते हैं. इस साल कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार को पड़ रही है. ऐसे में वीकेंड के साथ छुट्टियों का शानदार मौका बन सकता है. वहीं, अगर आप इस बार जन्माष्टमी को सिर्फ घर में नहीं बल्कि किसी खास जगह जाकर अनुभव करना चाहते हैं, तो भारत में कई ऐसे शहर हैं जहां कान्हा का जन्मोत्सव देखने लायक होता है. मथुरा की आधी रात वाली भक्ति हो, वृंदावन की रासलीला, दिल्ली के मंदिरों की रौनक, द्वारका की भव्य पूजा या मुंबई-पुणे की जोश से भरी दही हांडी, हर जगह जन्माष्टमी का रंग अलग है. ऐसे में आज उन 5 खास जगहों के बारे में जानते हैं, जहां जाकर आप जन्माष्टमी को जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बना सकते हैं.

मथुरा
अगर जन्माष्टमी पर घूमने की बात हो और सबसे पहले मथुरा का नाम न आए, तो लिस्ट अधूरी लगती है. भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मानी जाने वाली मथुरा में जन्माष्टमी का माहौल कई दिनों पहले से ही बदलने लगता है. यमुना किनारे बसा ये शहर त्योहार के दौरान रोशनी, फूलों और भक्ति के रंग में सज जाता है. मंदिरों में खास सजावट की जाती है और लड्डू गोपाल के लिए सुंदर झूले तैयार किए जाते हैं. झूलनोत्सव के दौरान कान्हा की प्रतिमाओं को सजे हुए झूलों में विराजमान किया जाता है. जन्माष्टमी की रात मथुरा का सबसे खास पल वो होता है, जब आधी रात को कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है. मंदिरों में घंटियां बजती हैं, शंखनाद होता है और भक्त ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ खुशी मनाते हैं.
यहां आपको सिर्फ धार्मिक माहौल ही नहीं, बल्कि ब्रज संस्कृति की खूबसूरत झलक भी देखने को मिलती है. रंग-बिरंगी झांकियां, कृष्ण लीला और रासलीला के आयोजन शहर की रौनक बढ़ा देते हैं. अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो यात्रा की प्लानिंग पहले से बना लेना बेहतर हो रहता है, क्योंकि त्योहार के दौरान मथुरा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है. लेकिन अगर आप भक्ति के साथ ब्रज की असली संस्कृति महसूस करना चाहते हैं, तो मथुरा से बेहतर जगह शायद ही कोई हो.

वृंदावन
मथुरा से लगभग 17 किलोमीटर दूर वृंदावन नगरी जन्माष्टमी के दौरान किसी खूबसूरत धार्मिक फिल्म के सेट जैसा नजर आता है. यहां पहुंचते ही गलियों में बजते भजन, मंदिरों की घंटियां और राधे राधे की आवाज आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती है. जन्माष्टमी से कई दिन पहले ही यहां तैयारियां शुरू हो जाती हैं. भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और राधा-कृष्ण की प्रेम कथाओं पर आधारित रासलीला का आयोजन अलग-अलग स्थानों पर किया जाता है. वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव वहां का सबसे खास आकर्षण होता है. इसके अलावा इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर भी इस त्योहार पर रोशनी और फूलों की सजावट में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत नजर आते हैं.
अगर आप इंस्टाग्राम के लिए तस्वीरें लेने वाले ट्रैवलर हैं, तो यहां का हर मंदिर और हर सजी हुई गली आपको अपनी तरफ खींचेगी. लेकिन वृंदावन की असली खूबसूरती कैमरे में नहीं, बल्कि वहां की हवा में महसूस होने वाली भक्ति में है. रात के समय मंदिरों में होने वाले कीर्तन और भजन आपको लंबे समय तक याद रह सकते हैं. परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं तो, वृंदावन जन्माष्टमी के समय जाने के लिए बढ़िया जगह है.

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दिल्ली का बिरला मंदिर
हर कोई जन्माष्टमी पर मथुरा या वृंदावन नहीं जा सकता. दिल्ली और आसपास रहने वालों के लिए लक्ष्मी नारायण मंदिर, जिसे आमतौर पर बिरला मंदिर कहा जाता है, जन्माष्टमी के रंग को करीब से महसूस करने का शानदार ऑप्शन हो सकता है. जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है. शाम होते-होते मंदिर परिसर में भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ बढ़ने लगती है. इसके बाद वहां का माहौल पूरी तरह भक्ति के रंग में डूब जाता है. रात के खास समय पर पूजा-अर्चना, आरती और अभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. भगवान कृष्ण जन्म के अवसर पर होने वाली विशेष आरती में शामिल होना भक्तों के लिए एक अलग ही तरह का और खास अनुभव हो सकता है. बिरला मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि आपको बड़े धार्मिक आयोजन का अनुभव मिलता है, लेकिन यात्रा के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके पास सिर्फ एक दिन या एक शाम का समय है, तो यहां जन्माष्टमी का माहौल परिवार के साथ महसूस किया जा सकता है. दिल्ली में त्योहार के दौरान ट्रैफिक और भीड़ को देखते हुए मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना ज्यादा अच्छा ऑप्शन हो सकता है.

द्वारका
अगर आप जन्माष्टमी को एक शानदार ट्रैवल एक्सपीरियंस में बदलना चाहते हैं, तो गुजरात की द्वारका आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. भगवान कृष्ण से जुड़ी सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण धार्मिक नगरी में से एक द्वारका जन्माष्टमी पर बहुत ही ज्यादा भव्य रूप में सजती है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर भी कहा जाता है, त्योहार के समय हजारों श्रद्धालुओं से भर जाता है. सुबह की मंगल आरती से शुरू होने वाला धार्मिक उत्सव दिनभर अलग-अलग पूजा और श्रृंगार कार्यक्रमों के साथ आगे बढ़ता रहता है. मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है. इसके बाद चारों तरफ भजन-कीर्तन की आवाज गूंजती रहती है. देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु यहां कृष्ण जन्मोत्सव का हिस्सा बनने पहुंचते हैं.
द्वारका की यात्रा की सबसे खास बात ये है कि यहां आपको आध्यात्मिकता के साथ समुद्र किनारे एक अलग तरह का सुकून भी मिलता है. मंदिर दर्शन के बाद शहर की गलियों और समुद्र किनारे समय बिताना आपकी यात्रा को और यादगार बना सकता है. यानी अगर आप लंबी दूरी की यात्रा कर रहे हैं, तो होटल और ट्रेवल बुकिंग पहले से करना समझदारी हो सकती है, क्योंकि जन्माष्टमी के आसपास यहां काफी ज्यादा भीड़ रहती है.
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मुंबई और पुणे
अगर मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी भक्ति और रासलीला के लिए मशहूर है, तो महाराष्ट्र में ये त्योहार अपने अलग अंदाज के लिए जाना जाता है. मुंबई और पुणे में जन्माष्टमी का सबसे बड़ा अट्रैक्शन दही हांडी उत्सव होता है. बाल कृष्ण की माखन और दही के लिए उनके प्यार से प्रेरित इस परंपरा में ऊंचाई पर मिट्टी की हांडी बांधी जाती है. इसके बाद गोविंदा पथक के सदस्य एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर लोगों का पिरामिड बनाते हैं और हांडी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. हांडी में दही, मट्ठा और सूखे मेवे जैसी चीजें रखी जाती हैं. संगीत, ढोल, जयकारों और भक्तों की एक्साइटमेंट के बीच ये आयोजन किसी बड़े फेस्टिवल जैसा माहौल बना देता है. मुंबई में दही हांडी सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़ा सांस्कृतिक तमाशा भी बन जाती है. अलग-अलग इलाकों में टीमें अपनी तैयारी और ताकत के साथ मैदान में उतरती हैं. पुणे में भी जन्माष्टमी और दही हांडी का सेलिब्रेशन देखने लायक होता है. अगर आपको त्योहारों का हाई-एनर्जी माहौल पसंद है और आप सिर्फ मंदिर दर्शन से ज्यादा एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव का अनुभव लेना चाहते हैं, तो मुंबई और पुणे शानदार विकल्प हो सकते हैं.

किस ओर जाएंगे आप
भारत की खूबसूरती यही है कि एक ही त्योहार अलग-अलग शहरों में अलग रंग लेकर आता है. मथुरा में आपको कृष्ण जन्मभूमि की भक्ति मिलेगी, वृंदावन में राधा-कृष्ण की प्रेम और रासलीला की झलक, दिल्ली में मंदिरों की भव्यता, द्वारका में समुद्र और आध्यात्मिकता का संगम और मुंबई-पुणे में जोश से भरी दही हांडी. अगर आप शांति और भक्ति चाहते हैं तो मथुरा-वृंदावन की यात्रा चुन सकते हैं. अगर एक छोटी और सुविधाजनक धार्मिक यात्रा चाहिए तो दिल्ली का बिरला मंदिर अच्छा विकल्प हो सकता है. वहीं लंबी छुट्टी में आध्यात्मिकता के साथ यात्रा का मजा लेना है तो द्वारका शानदार अनुभव दे सकती है. वहीं, अगर आपको भीड़, संगीत, ऊर्जा और उत्सव का पूरा रोमांच पसंद है, तो मुंबई या पुणे की दही हांडी का माहौल अलग ही दुनिया में ले जाएगा. इस जन्माष्टमी कान्हा का जन्मोत्सव सिर्फ घर की सजावट और भोग तक सीमित रखने के बजाय किसी ऐसी जगह जाकर मनाने की योजना बनाई जा सकती है, जहां त्योहार की धड़कन हर गली में महसूस हो. आखिर यात्रा वही सबसे यादगार होती है, जिसमें सिर्फ नई जगह नहीं दिखती, बल्कि एक नया अनुभव भी साथ लेकर घर लौटा जाता है.
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