UP Advocates Fee Increment: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप एवं बहस फीस में वृद्धि की गई है. अधिवक्ता समुदाय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है. राज्य के महाधिवक्ता और उनकी पूरी टीम ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है.
न्यायिक व्यवस्था होगी सक्षम
अधिवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायालयों में राज्य के हितों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की आवश्यकता को समझते हुए इस विषय पर पहल की. अब उनके नेतृत्व में प्रदेश मंत्रिमंडल ने रिटेनरशिप एवं बहस फीस में ऐतिहासिक वृद्धि का निर्णय लेकर अधिवक्ता समुदाय की लंबे समय से चली आ रही अपेक्षा को पूरा किया है. यह निर्णय केवल फीस वृद्धि का विषय नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे न्यायालयों में राज्य सरकार के मामलों की गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध पैरवी को और बल मिलेगा.
जनपद न्यायालयों से उच्च न्यायालयों तक के अधिवक्ताओं को होगा लाभ
अधिवक्ताओं ने कहा कि जनपद न्यायालयों में कार्यरत जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता, उप जिला शासकीय अधिवक्ता, नामित अधिवक्ता, विशेष अधिवक्ता एवं न्याय मित्रों से लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय में राज्य का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता, मुख्य स्थायी अधिवक्ता, स्थायी अधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता, ब्रीफ होल्डर, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड तथा विभिन्न श्रेणी के पैनल अधिवक्ताओं तक इस निर्णय का व्यापक लाभ पहुंचेगा।
एक दशक बाद बढ़ाई गई फीस
उन्होंने कहा कि बदलते न्यायिक परिदृश्य, मुकदमों की बढ़ती संख्या, जटिल विधिक विषयों तथा अधिवक्ताओं की बढ़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए पारिश्रमिक संरचना के पुनरीक्षण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। विशेष रूप से जनपद न्यायालयों के अधिवक्ताओं की फीस में लगभग 10 वर्ष तथा महाधिवक्ता स्तर पर लगभग 14 वर्ष बाद संशोधन किया जाना प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता को दर्शाता है।
50 प्रतिशत तक हुई वृद्धि
अधिवक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा समयानुकूल पुनरीक्षण की अवधारणा को स्वीकार करते हुए रिटेनरशिप एवं प्रति सुनवाई फीस में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि का निर्णय लिया गया है। इससे अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, राज्य के महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी और अधिक प्रभावी होगी तथा न्यायालयों में शासन का पक्ष पूरी मजबूती के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा।
सभी संबंधित अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने अधिवक्ताओं के योगदान का सम्मान करते हुए न्यायिक प्रणाली को सशक्त बनाने का कार्य किया है। यह निर्णय राज्य हितों की रक्षा, सुशासन की मजबूती तथा न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।
नई फीस
जिला शासकीय अधिवक्ता को ₹14000/माह रिटेनर फीस
₹2500 बहस फीस प्रति कार्य दिवस
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता को रिटेनर शिप फीस ₹11000
बहस फीस ₹2300/कार्यदिवस
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता- ₹10000/माह
बहस फीस ₹2300/कार्यदिवस
उप जिला शासकीय अधिवक्ता- ₹9000/माह
बहस फीस ₹2000/कार्यदिवस
नामिका वकील ₹2300
विशेष अधिवक्ता ₹2300
न्याय वित्त दीवानी फौजदारी ₹2300
महाधिवक्ता- ₹1,25000/माह
बहस फीस – ₹60,000/कार्यदिवस
अपर महाधिवक्ता- ₹50,000/माह
बहस फीस- ₹40,000/कार्यदिवस
अपर महाधिवक्ता, मा. उच्चतम न्यायालय- ₹50,000/माह
बहस फीस- ₹50,000/कार्यदिवस
मुख्य स्थायी अधिवक्ता- ₹35,000
बहस फीस- ₹12,000/कार्यदिवस
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, अपर शासकीय अधिवक्ता, अपर लोक अभियोजक- ₹20,000/माह
बहस फीस- ₹8000/कार्यदिवस
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