JK Flash Flood: हाजी लतीफ़ ने सऊदी अरब में 27 साल तक कड़ी मज़दूरी करके अपने सपनों का घर बनाया. जिससे उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके, लेकिन पुंछ में अचानक आई भयानक बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में सब कुछ मलबे में तब्दील कर दिया. इस त्रासदी ने मुर्राह-बुफ़लियाज़ गांव के हाजी लतीफ़ की दुनिया उजाड़ दी. पुंछ में आई भयानक बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में उनके इस आशियाने को मलबे के ढेर में बदल दिया. इस हादसे में लतीफ़ ने अपनी पत्नी, चार बच्चों, एक बेटी और एक पोती सहित परिवार के आठ सदस्यों को खो दिया. मलबे से अब तक तीन शव निकाले जा चुके हैं, जबकि पांच सदस्य अब भी लापता हैं.
प्रशासन से मदद की गुहार
पूरी तरह टूट चुके भावुक लतीफ़ अपने ढहे हुए घर के पास बैठकर रोते हुए सिर्फ अपने अपनों के शवों की मांग कर रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है. कहा कि अगर मेरे अपनों का एक और शव भी मिल जाए, तो यह मेरे लिए अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत होगी. जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, उनके परिवार के सदस्यों के शव मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है क्योंकि भूस्खलन के कारण प्रभावित इलाके तक जाने वाली सड़कें बंद हो गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि मुर्राह गांव तक जाने वाली सड़क कई जगहों पर बंद है, इसलिए प्रशासन संपर्क बहाल करने और JCB एक्सकेवेटर जैसी मशीनरी को वहां तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है ताकि मलबा हटाया जा सके और शवों को निकाला जा सके.
सपने रह गए अधूरे
लतीफ़ ने कहा कि यह घर सऊदी अरब में एक मज़दूर के तौर पर उनकी लगभग तीन दशकों की कड़ी मेहनत का नतीजा था. उन्होंने कहा कि मैंने सऊदी अरब में 27 साल काम किया. मेरी कमाई का एक-एक पैसा इस घर को बनाने में लग गया. गांव में हर कोई जानता है कि मैंने इसके लिए कितनी मेहनत की थी. यह मेरा सपनों का घर था. ज़िंदगी में मेरे सिर्फ़ दो ही मकसद थे. एक घर बनाना और यह पक्का करना कि मेरे बच्चे अच्छी शिक्षा पाएं. मेरा सबसे बड़ा बेटा जम्मू में 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था. मैं चाहता था कि मेरे सभी बच्चे पढ़ें और ज़िंदगी में बड़ी कामयाबी हासिल करें. उस दुखद रात को याद करते हुए लतीफ़ ने बताया कि तेज बारिश की आवाज़ सुनकर वे सुबह करीब 3 बजे जागे और उन्हें पहाड़ी के नीचे सड़क किनारे नाले के पास खड़ी अपनी गाड़ी की चिंता हुई.
बारिश से ऐसी तबाही कभी नहीं देखी
उन्होंने अपने परिवार से कहा कि मैं गाड़ी हटाने जा रहा हूं. मेरी पत्नी ने मुझे टॉर्च, जूते, चलने वाली छड़ी और कार की चाबियां दीं. गाड़ी को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के बाद उनकी पत्नी और बच्चों ने उन्हें वापस आने के लिए कहा क्योंकि बारिश तेज़ हो गई थी. उन्होंने कहा कि सुबह करीब 3:29 बजे मैंने नाले से एक ज़ोरदार गड़गड़ाहट सुनी. मुझे लगा कि यह उफनते पानी की आवाज़ है. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरा घर तबाह हो जाएगा. हमने बारिश या बाढ़ से ऐसी तबाही कभी नहीं देखी थी. मरने वालों में मोहम्मद लतीफ़ की 59 वर्षीय पत्नी नूर सफ़िया, 16 वर्षीय बेटा सज्जाद अहमद, हकनवाज़ अहमद (11), शाहनवाज़ अहमद (11), बेटी खालिदा कौसर, यासर इक़बाल (25) की पत्नी और 2 साल का पोता सोफ़ियान और अन्य रिश्तेदार बानो बी, मोहम्मद हुसैन (60) की पत्नी और मोहम्मद अकरम, मोहम्मद लियाकत (7) का बेटा शामिल हैं. लतीफ़ ने कहा कि उनका सबसे बड़ा नुकसान घर का नहीं बल्कि उनके परिवार का था. उन्होंने आंसू रोकते हुए कहा कि मेरा परिवार चला गया.
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News Source: PTI
