Home Latest News & Updates जेन-Z के नारों की सियासी गूंज, अखिलेश ने अपनाया ‘कचौड़ी-समोसा’ स्लोगन; 11 MLC सीटों से मिलेंगे संकेत

जेन-Z के नारों की सियासी गूंज, अखिलेश ने अपनाया ‘कचौड़ी-समोसा’ स्लोगन; 11 MLC सीटों से मिलेंगे संकेत

by Rajeev Ojha 2 October 2026, 5:08 PM IST (Updated 2 October 2026, 5:15 PM IST)
2 October 2026, 5:08 PM IST (Updated 2 October 2026, 5:15 PM IST)
Akhilesh adopts Kachori-Samosa slogan

Jantar Mantar Protest: नई दिल्ली में जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के बाद से जेन-जी सियासत के केंद्र में आ गए हैं. केंद्र और प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) जेन-जी को साधने में जुटी है तो विपक्ष उसके आक्रोश के रथ पर सवार होकर सत्ता तक पहुंचने का मंसूबा पाल बैठा है. विपक्षी दल तो जेन जी के नारों का भी सहारा लेने लगे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अभी हाल ही में छात्राओं के प्रदर्शन से निकले एक नारे को अपने पक्ष में बदल दिया. अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं के बीच कहा कि एक कचौड़ी दो समोसा, बीजेपी का नहीं भरोसा’. हालांकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव में यूपी के स्नातकों और शिक्षकों का सियासी रुझान सामने आने वाला है.

राज्यसभा का चुनाव निर्विरोध हो जाएगा

उत्तर प्रदेश में इसी महीने राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव होने वाले हैं. समाजवादी पार्टी के दोनों प्रत्याशियों का नामांकन होने के बाद ऐसी संभावना लग रही है कि राज्यसभा का चुनाव निर्विरोध हो जाएगा. विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा आठ और सपा दो सीटें जीत सकती है. यदि दोनों में से किसी एक ने अतिरिक्त प्रत्याशी खड़ा कर दिया तो ही चुनाव की नौबत आएगी. सपा ने पहले 3 प्रत्याशी उतारने की बात जरूर कही थी लेकिन अभी नामांकन केवल दो ही प्रत्याशियों का कराया है.

धनराज परिमल नाथवानी का नामांकन कराया

सपा ने प्रोफेसर राम गोपाल यादव के अलावा प्रमुख उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी का नामांकन कराया है. धनराज रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और उन्हें अंबानी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है. उनके पिता परिमल नाथवानी झारखंड से निर्दल उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा सांसद चुने गए थे और उन्हें एनडीए ने अपना समर्थन दिया था. जाहिर है कि भाजपा धनराज की राह में रोड़े नहीं अटकाएगी. इसी तरह सपा भी अपने इन दोनों प्रमुख प्रत्याशियों की आसान विजय सुनिश्चित करने के लिए तीसरे उम्मीदवार के विकल्प पर शायद ही विचार करेगी.

नामांकन पर मायावती ने उठाए सवाल

आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहे अखिलेश यादव ने राज्यसभा के चुनाव में पर्दे के पीछे से भाजपा से हाथ मिलाकर सियासी चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है. बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने के सपा के फैसले पर सवाल भी खड़ा किया है. उधर, भाजपा अभी अपने राज्यसभा उम्मीदवारों का नाम घोषित नहीं कर पाई है. यूपी भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नाम का पैनल तैयार करके शीर्ष नेतृत्व के पास भेजा गया है.

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दोनों दलों की तैयारियां हुईं तेज

विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर दोनों दलों की अलग तैयारी है. इन 11 सीटों में से 5 सीटें स्नातक निर्वाचन और 6 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं. समाजवादी पार्टी अपने सभी 11 प्रत्याशियों की घोषणा पहले ही कर चुकी है, जबकि भाजपा ने अपने 6 उम्मीदवारों की घोषणा गत 29 सितंबर को की. अपने पांच उम्मीदवारों की घोषणा भाजपा ने भी पहले ही कर दी थी. इनमें लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरेली मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों, लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्रीचंद शर्मा शामिल हैं. शेष 6 उम्मीदवारों में भाजपा ने वाराणसी स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल, इलाहाबाद झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर, वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर- फैजाबाद स्नातक सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया है.

11 सीटों के चुनाव में शिक्षकों और स्नातकों का रुझाने पता चलेगा

विधान परिषद की इन सीटों पर चुनाव के लिए भी मंगलवार से नामांकन शुरू हो गया है. इन 11 सीटों के चुनाव में शिक्षकों और स्नातकों का रुझान पता चलेगा. यदि चुनाव परिणाम सत्तारूढ़ भाजपा के विपरीत होता है तो यह उसके लिए एक बड़ी चुनौती होगी. इसी तरह यदि विपक्ष चुनाव हारता है तो उसे भी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ेगा. इनमें स्नातक सीटों का चुनाव परिणाम जेन-जी के रुख का संकेत भी देगा. वैसे भाजपा साल 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2024 के लोकसभा चुनाव में जनादेश में आई कमी को पाटने को कोशिश में है. अखिलेश यादव अपने पीडीए रथ के साथ चुनाव अभियान की शुरुआत कर चुके हैं तो भाजपा का चुनावी अभियान नवरात्र के बाद तेज होने वाला है. भाजपा के प्रदेश प्रभारी बनाए गए विनोद तावड़े अपने चार सह प्रभारियों के साथ लखनऊ में डेरा डाल चुके हैं.

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