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आंध्र प्रदेश में ‘मुरसु’ तूफान का कहर : बाढ़ और आंधी-तूफान के कारण रेल सेवाएं ठप, रेड अलर्ट

by Sanjay Kumar Srivastava 3 November 2026, 3:22 PM IST
3 November 2026, 3:22 PM IST
आंध्र प्रदेश में 'मुरसु' तूफान का कहर : बाढ़ और आंधी-तूफान के कारण रेल सेवाएं ठप, फसल और नमक उत्पादन को भारी नुकसान

Murasu Cyclone: आंध्र प्रदेश में मुरसु तूफान ने भारी तबाही मचाई है. भारी बारिश के कारण मंगलवार को भी जनजीवन प्रभावित रहा. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आंध्र प्रदेश के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है. मुरसु के असर से ओंगोल और उसके आसपास के इलाकों में नमक के खेतों (सॉल्ट पैन) और कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है. तेज बारिश और आंधी-तूफान की वजह से नमक उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है और खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों और नमक बनाने वाले श्रमिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. तूफान और भारी बारिश का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा है.

ओंगोल-गुडूर सेक्शन पर परिचालन प्रभावित

मंगलवार को दक्षिण तटीय रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन के अधिकारी ने बताया कि करावडी स्टेशन पर तेज हवाएं चलने के कारण विजयवाड़ा-ओंगोल-गुडूर सेक्शन पर ट्रेनों की आवाजाही को रोक दिया गया है. अगले आदेश तक इस सेक्शन पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा. कुल 29 ट्रेनों के आवागमन को नियंत्रित (रेगुलेट) किया गया है. तूफान के कारण कुछ ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, उनके मार्ग बदल दिए गए हैं या उनके समय में बदलाव किया गया है. यात्रियों से कहा गया है कि घर से निकलने से पहले वे ट्रेनों की सही स्थिति की जानकारी कर लें.

15 जिलों में 30,661 एकड़ क्षेत्र में फसलें बर्बाद

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है. मुरासु तूफान का असर फसलों पर भी पड़ा. 15 जिलों में 30,000 हेक्टेयर से अधिक की खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं. इसका सबसे ज्यादा असर कृष्णा, बापटला और नंड्याल जिलों में देखने को मिला. अधिकारियों का अनुमान है कि धान, कपास और मक्के की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, 15 जिलों में 30,661 एकड़ क्षेत्र में फसलें बर्बाद हुई हैं. मुरासु का असर 15 जिलों के 132 मंडलों में देखा गया और 10,805 लोगों को सुरक्षित निकालकर चक्रवात आश्रय स्थलों (साइक्लोन शेल्टर) में पहुंचाया गया.

NDRF की 11 और SDRF की 13 टीमें तैनात

राज्य सरकार ने 171 राहत शिविर लगाए हैं और 14,810 भोजन के पैकेट बांटे हैं. राहत कार्यों के लिए NDRF की 11 और SDRF की 13 टीमों को तैनात किया गया है, साथ ही 613 जनरेटरों की व्यवस्था भी की गई है. अग्निशमन विभाग ने उखड़े हुए पेड़ों को हटाने और जमा पानी को निकालने के लिए 185 टीमें तैनात की हैं. चक्रवात के दक्षिणी राज्य से टकराने से पहले एहतियाती कदम उठाते हुए 3,066 गर्भवती महिलाओं और 1,008 स्तनपान कराने वाली माताओं को अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया.

कई इलाके पानी में डूबे

13 जिलों में 725 चिकित्सा टीमें भेजी गईं और 362 एम्बुलेंस को रिजर्व में रखा गया. बापटला और प्रकाशम सहित कई जिलों में भारी बारिश हुई और तेज हवाएं चलीं, जिससे खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा और कई इलाके पानी में डूब गए. प्रकाशम जिले के कोथापटनम के रहने वाले मछुआरे कृष्णम्मा ने बताया कि पिछले 14 सालों में हमने जो चक्रवात देखे हैं, उनमें से यह सबसे खतरनाक है. सरकार ने हमारे गांव से लगभग 400 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों ने भी हमें सुरक्षित जगहों पर जाने में मदद की.

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News Source: ANI

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