Home Top News क्या सातवीं बार PM बनेंगे नेतन्याहू या बदलेगा इजरायल का नेतृत्व, आज इन मुद्दों पर हो रही वोटिंग

क्या सातवीं बार PM बनेंगे नेतन्याहू या बदलेगा इजरायल का नेतृत्व, आज इन मुद्दों पर हो रही वोटिंग

by Neha Singh 27 October 2026, 11:09 AM IST (Updated 27 October 2026, 11:14 AM IST)
27 October 2026, 11:09 AM IST (Updated 27 October 2026, 11:14 AM IST)
Israel Election Voting

Israel Election Voting: 27 अक्टूबर 2026 का दिन इजरायल के लिए बहुत अहम है. आज इजरायल में आम चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. 73 लाख से ज्यादा पंजीकृत मतदाता वोट डालने जा रहे हैं, जो यह तय करेंगे कि बेंजामिन नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रहेंगे या देश में कोई नया नेतृत्व सामने आएगा. यह चुनाव केवल एक आम राजनीतिक मुकाबला नहीं है. चुनाव के नतीजों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसके परिणाम मिडिल-ईस्ट की भू-राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर डालेंगे.

रात 10:00 बजे तक होगा मतदान

इजरायल में मंगलवार को सुबह 7:00 बजे से रात 10:00 बजे तक पूरे देश में मतदान होगा. कुल 7,336,553 नागरिक पंजीकृत हैं और वोट डालने के योग्य हैं. मतदाताओं की सुविधा के लिए, अधिकारियों ने पूरे देश में 12,018 मतदान केंद्र बनाए हैं. मतदाताओं की पहुंच को आसान बनाने पर खास ध्यान दिया गया है. कुल 6,209 मतदान केंद्र ऐसे हैं जहां पहुंचना आसान है, जिनमें 3,621 विशेष रूप से सुलभ (एक्सेसिबल) मतदान केंद्र शामिल हैं. ये चुनाव पश्चिम एशिया में नाजुक दौर के बीच हो रहे हैं. इजरायल इस समय ईरान के साथ संघर्ष में उलझा हुआ है और दक्षिणी सीमा पर हिजबुल्लाह के साथ झड़पों का सामना कर रहा है.

गादी आइसेनकोट के साथ नेतन्याहू का मुकाबला

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट हैं. उन्होंने ‘यशार’ नाम से एक नई मध्यमार्गी पार्टी बनाई है और ओपिनियन पोल में वे नेतन्याहू की ‘लिकुड’ को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. इसके अलावा, विपक्ष नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट हो गया है. मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए चुनावी नैरेटिव बहुत साफ है. वे खुद को एकमात्र ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो ईरानी खतरे से निपट सकता है. चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने बी नेतन्याहू को पूरा समर्थन दिया है. ट्रंप ने नेतन्याहू की तारीफ करते हुए कहा है कि उन्होंने मुश्किल हालात के बावजूद बहुत अच्छा काम किया है.

इन मुद्दों पर हो रहा चुनाव

इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व मेजर एरियल एवरबुच ने बताया कि इन अहम चुनावों में राष्ट्रीय सुरक्षा, अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की अनिवार्य सैन्य भर्ती और युद्ध के बाद की अनिश्चितता जैसे मुद्दे मतदाताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “चूंकि हम अभी युद्ध के बीच में हैं, इसलिए कई नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. सबसे पहली और अहम चिंता इजरायली लोगों की सुरक्षा और बचाव की है. दूसरी बात जिस पर काफी चर्चा हो रही है, वह है ऑर्थोडॉक्स यहूदियों का सेना में शामिल होना. तीसरी बात, कई लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आगे क्या होगा… इन सभी बातों से ही कल के नतीजे तय होंगे… मुझे चिंता है कि शायद कोई स्पष्ट विजेता न निकले (टाई हो जाए) और फिर दूसरे दौर में नेतन्याहू संभवतः सत्ता में बने रहें.”

61 सीटों की बहुमत पाना मुश्किल

इजरायल की संसद, जिसे ‘नेसेट’ कहा जाता है में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने और बहुमत साबित करने के लिए, किसी भी पार्टी या गठबंधन को ‘मैजिक नंबर’ यानी कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है. इजरायल के चुनावी इतिहास में कोई भी एक पार्टी कभी अपने दम पर 61 सीटें हासिल नहीं कर पाई है. यही वजह है कि वहां गठबंधन सरकारें ही बनती हैं. चुनाव के बाद, नतीजा इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा नेता अलग-अलग पार्टियों के साथ बातचीत करके बहुमत के इस आंकड़े को हासिल करने में सफल रहता है. शुक्रवार को समाप्त हुए ओपिनियन पोल में आइसेनकोट को नेतन्याहू से आगे दिखाया गया. हालांकि, कोई भी गठबंधन बहुमत की सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के जादुई आंकड़े तक पहुंचने की स्थिति में नहीं था.

फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन के बीच झुकी मैक्रों सरकार! छात्रों की मांगों का दिया जवाब; कही ये बात

News Source: ANI

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?