Janmashtami Routine: कृष्ण के भक्तों का इंतजार खत्म होने वाला है. एक दिन बाद श्री कृष्ण जन्माष्टमी है, जिसकी तैयारियां कई दिनों पहले से शुरू हो जाती हैं. पूरे देश में कृष्ण का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. हर जगह पंडाल सजाए जाते हैं, झांकियां निकाली जाती हैं और मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों से रोशन किया जता है. इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है. कई लोग जन्माष्टमी पर व्रत रखते हैं और रात में भजन-कीर्तन करते हैं. जन्माष्टमी पर पूजा और व्रत से जुड़े कई नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है.
घरों में भी कृष्ण के लिए खास तैयारियां की जाती हैं. माताएं सुबह से ही पूजा, प्रसाद और भोग की तैयारी में लगी रहती हैं. ऐसे में पूजा के मुहूर्त और प्रसाद से जुड़ी कुछ न कुछ गलतियां जरूर हो जाती हैं. सुबह उठने से लेकर रात में कृष्ण के जन्म के समय तक, हर पूजा का अपना एक अलग तरीका होता है. अगर आप भी हमेशा कुछ भूल जाते हैं, तो जान लें कि सुबह से लेकर रात तक आपका पूरा रूटीन कैसा होना चाहिए, व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, कान्हा का अभिषेक कैसे करना चाहिए और आखिर में व्रत कब और कैसे तोड़ना चाहिए.
सुबह पूजा कैसे और कब करनी है
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह की पूजा और व्रत का संकल्प बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस दिन व्रत रखने वाले को ब्रहा मुहूर्त में उठकर पूजा करनी चाहिए. सुबह 4:30 बजे से लेकर 5:15 बजे तक स्नान कर लें और साफ पीले या लाल रंग के कपड़े पहन लें. सूर्योदय के बाद पूजा शुरू करें. मंदिर की सफाई करें. लड्डू गोपाल को घंटी बजाकर “जय श्री कृष्णा” बोलते हुए प्रेम से जगाएं. गोपाल को किसी पात्र में बैठाकर गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद साफ पानी से अभिषेक करके उन्हें एक मुलायम कपड़े से पोंछ लें. कान्हा को सुंदर पीले वस्त्र पहनाएं. उन्हें चंदन लगाएं और सजाएं. मोरपंख मुकुट और बांसुरी धारण कराएं. धूप और घी का दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें.

मन में व्रत का संकल्प करते हुए बोले- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय. हे भगवान श्रीकृष्ण, मैं श्रद्धापूर्वक आपका जन्माष्टमी व्रत करने का संकल्प लेता/लेती हूं. कृपया मेरा व्रत एवं पूजन स्वीकार करें और मुझे अपनी भक्ति प्रदान करें.” इसके बाद भोग में उन्हें माखन-मिश्री, फल और मिठाई अर्पित करें. भोग में तुलसी का पत्ता डालना न भूलें. इसके बाद जन्माष्टमी की अन्य तैयारियों में लग जाएं. दिनभर काम करते हुए भी “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का मानसिक जाप करते रहें.
दोपहर में लगाए भोग
दोपहर के समय में कान्हा को फल या मेवे का भोग लगाएं और धूप-दीप जलाएं. अगर आप फलाहारी व्रत रख रहे हैं तो दोपहर में दूध, चाय फल या कुट्टू के आटे का फलाहार ले सकते हैं. आज के दिन गुस्सा करने, झूठ बोलने, तुलसी के पत्ते तोड़ने या घर में तामसिक भोजन से परहेज करें. वहीं दोपहर में आप मंदिर और गोपाल के झूले की सजावट कर सकते हैं. इसके अलावा दोपहर के समय में घर में भजन-कीर्तन भी कर सकते हैं.
शाम की आरती
सूर्यास्त के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं और श्री कृष्ण की आरती करें. ताजे फूल और तुलसी चढ़ाएं. श्री कृष्ण की जन्मकथा या भजन पढ़ें. सजावट का सारा काम खत्म कर लें. इसके बाद आप भगवान के लिए रात का भोग तैयार करना शुरू कर दें, क्योंकि उसमें बहुत समय लगता है. पूजा की थाली सजाएं, पंचामृत, माखन, धनिया पंजीरी और छप्पन भोग तैयार करें.
रात की मुख्य पूजा
रात में 11:57 बजे से 12:43 बजे तक मुख्य पूजा करें. ठीक रात 12:00 बजे खीरे को सिक्के से काटकर और शंख बजाकर कन्हैया का जन्मोत्सव मनाएं. इसके बाद लड्डू गोपाल का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें. फिर गंगाजल से शंख से जरिए स्नान कराएं. उन्हें नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, वैजयंती माला और मोरपंख पहनाकर झूले में बैठाएं. भगवान को झूला झुलाएं. अब कान्हा को माखन-मिश्री और धनिया पंजिरी का भोग लगाएं. कपूर जलाकर कान्हा की आरती करें.

झूला झुलाते समय इन 3 बातों का रखें खास ध्यान
कान्हा को झूले में बिठाने से पहले उनकी बांसुरी उनके पास रखें और झूले में कुछ तुलसी के पत्ते भी रख दें. झूले को कभी भी सीधे हाथ से झटके से न खींचे. रेशमी या सूती डोरी से झूले को प्रेम से धीरे-धीरे खींचे. जब आप कन्हैया को झूला झुलाएं, तब चुप रहने के बजाय “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की. हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” का जयघोष जरूर लगाएं.
पारण का समय
जन्माष्टमी के अगले दिन, सुबह नहाने के बाद, भगवान कृष्ण की रोजाना की तरह पूजा करें. भगवान से किसी भी तरह की भूल के लिए क्षमा मांगे. ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अनाज, फल या कपड़े दान करें. सूरज उगने के बाद (या जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र खत्म हो जाए) भगवान का प्रसाद खाकर अपना व्रत खोलें.
व्रत और खान-पान के नियम
जन्माष्टमी के व्रत में अनाज (गेहूं, चावल, वगैरह) खाना पूरी तरह मना है. आप साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा और मौसमी फल (जैसे सेब, केला, और अनार) खा सकते हैं. इस दिन सफेद नमक इस्तेमाल करने से बचें. सिर्फ सेंधा नमक का इस्तेमाल करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत में मूली, गाजर, चुकंदर, और लौकी जैसी सब्जियों नहीं खानी चाहिए. अगर आप व्रत नहीं भी कर रहे हैं, तो भी इस दिन घर पर तामसिक खाना (प्याज, लहसुन, मीट, या शराब) बनाने से बचें.
लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार
सुबह उठने के बाद, लड्डू गोपाल की मूर्ति को गंगाजल या पवित्र जल से नहलाएं. भगवान कृष्ण को “पीतांबर-धारी” के नाम से जाना जाता है, इसलिए उन्हें पीले कपड़े और गहने पहनाएं. भगवान कृष्ण को मक्खन, मिश्री, खीर या मिठाई चढ़ाते समय उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना वे प्रसाद स्वीकार नहीं करेंगे. आधी रात को जन्मोत्सव और आरती के बाद, भगवान को कुछ समय एकांत में रहने दें और इसके बाद उन्हें सुलाने की नियम पूरे करें. कान्हा के पास छोटा तुलसी का पौधा लाकर रख दें.
इस दिन क्या न करें
जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विकता और संयम बनाए रखना चाहिए. इस दिन मांसाहारी भोजन, अंडे, शराब और नशीली चीजों से पूरी तरह दूर रहें. भगवान को भोग लगाए बिना भोजन न करें. पूरे दिन गुस्सा, झगड़ा, गाली-गलौज और किसी का अपमान करने से बचें. मन को शांत रखते हुए श्री कृष्ण का नाम, भजन, कथा या मंत्र का जाप करें. बेवजह तुलसी के पत्ते न तोड़ें. एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें. पूजा के दौरान साफ-सफाई पर खास ध्यान दें. अगर आपने जन्माष्टमी का व्रत रखा है, तो अपनी परंपरा के अनुसार श्री कृष्ण के जन्म और पूजा के बाद या अगले दिन तय पारण के समय पर ही व्रत खोलें.

जन्माष्टमी पर इन मंदिरों में करें कान्हा के दर्शन
जन्माष्टमी पर आप श्री कृष्ण के मंदिरों में भी घूम सकते हैं. इस दिन मंदिरों का नजारा बहुत मनमोहक होता है. यहां कुछ प्रसिद्ध मंदिरों की लिस्ट दी गई है.
श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर- मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है और जन्माष्टमी पर यहां होने वाले उत्सव एक खास आकर्षण होते हैं. भगवान के जन्म, पूजा और अभिषेक का आधी रात का भव्य उत्सव देखा जाता है.
बांके बिहारी मंदिर- वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित सबसे मशहूर मंदिरों में से एक है, जहां जन्माष्टमी पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर में खास धार्मिक समारोह और आधी रात का खास उत्सव होता है.
कृष्ण-बलराम मंदिर, इस्कॉन, वृंदावन- यह मंदिर भारत और विदेश के कृष्ण भक्तों के लिए पूजा का एक बड़ा केंद्र है, जहां कृष्ण और बलराम के दर्शन होते हैं. जन्माष्टमी पर भजन, कीर्तन और खास पूजा होती है.
प्रेम मंदिर, वृंदावन- सफेद मार्बल से बना प्रेम मंदिर अपनी खूबसूरत नक्काशी और कृष्ण लीला दिखाने वाली कलाकृतियों के लिए मशहूर है. जन्माष्टमी के दौरान मंदिर की सजावट और भक्ति का माहौल खास तौर पर भक्तों को आकर्षित करता है.
द्वारकाधीश मंदिर- द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण के राजसी रूप से जुड़ा एक बड़ा तीर्थ स्थल है.
गोविंद देव जी मंदिर- जयपुर में गोविंद देव जी मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित एक मशहूर मंदिर है, जहां रेगुलर तौर पर बड़ी आरती और दर्शन होते हैं. मंदिर में होने वाली खास पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों की वजह से जन्माष्टमी पर भक्तों की संख्या बढ़ जाती है.
इस्कॉन मंदिर ( ईस्ट ऑफ कैलाश) -दिल्ली का यह मशहूर कृष्ण मंदिर जन्माष्टमी पर एक बड़ा आकर्षण होता है. यहां जन्माष्टमी पर महाभिषेक, कीर्तन, आरती और आधी रात का कृष्ण जन्मोत्सव होता है.
इस्कॉन मंदिर (द्वारका)- द्वारका में इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पर भगवान रुक्मिणी और द्वारकाधीश को समर्पित खास पूजा और भक्ति कार्यक्रम होते हैं. जन्माष्टमी त्योहार के कीर्तन, सजावट और भक्ति का माहौल भक्तों को आकर्षित करता है.
इस्कॉन मंदिर (पंजाबी बाग)- वेस्ट दिल्ली का यह मशहूर राधा-कृष्ण मंदिर जन्माष्टमी पर अपनी खास पूजा और भजन-कीर्तन के लिए जाना जाता है. जन्माष्टमी पर मंदिर को खूबसूरती से सजाया जाता है और आध्यात्मिक माहौल होता है.
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर – बिरला मंदिर दिल्ली के सबसे मशहूर धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां जन्माष्टमी पर भगवान विष्णु और कृष्ण से जुड़ी खास पूजा होती है. जन्माष्टमी पर मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
