Home Latest News & Updates आय में 25 करोड़ का उछाल: अयोध्या राममंदिर में चढ़ावा विवाद के बीच भक्तों के दान से भरा महाकाल का खजाना

आय में 25 करोड़ का उछाल: अयोध्या राममंदिर में चढ़ावा विवाद के बीच भक्तों के दान से भरा महाकाल का खजाना

by Nitin Thakur 25 June 2026, 4:51 PM IST (Updated 25 June 2026, 4:57 PM IST)
25 June 2026, 4:51 PM IST (Updated 25 June 2026, 4:57 PM IST)
आय में 25 करोड़ का बंपर उछाल: अयोध्या राम मंदिर में चढावा विवाद के बीच भक्तों के दान से भरा महाकाल का खजाना

Mahakaleshwar Temple: महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों के दान से बाबा महाकाल के खजाने में रिकार्डतोड़ बढ़ोतरी हुई है. मंदिर में पिछले साल से ज्यादा चढ़ावा आया है. इस साल महाकाल मंदिर समिति को 142 करोड़ रुपए की आमदनी हुई, जबकि दान में 80 करोड़ रुपए मिले हैं. इसके अलावा 4.65 करोड़ का गुप्तदान हुआ है. पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब 25 करोड़ रुपए ज्यादा आय हुई है. ये आंकडे दान की गिनती में सामने आए हैं.दरअसल महाकाल मंदिर में महाकाल लोक बनने के बाद 2022 से श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है.

4.65 करोड़ मिला गुप्त दान

मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ साथ आमदनी के रास्ते भी खुले हैं. महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा ऑनलाइन, ऑफलाइन, रसद सामग्री का तो दान लिया ही जाता है, साथ साथ मंदिर प्रशासन के द्वारा लड्डू प्रसाद भी विक्रय किया जाता है, जिससे मंदिर समिति को कमाई होती है. इसके अलावा सशुल्क दर्शन व्यवस्था, सशुल्क भस्म आरती, संध्या आरती और शयन आरती से भी कमाई होती है. मंदिर समिति के अनुसार, मंदिर को दान पेटियों से 62 करोड़ रुपए, नगद काउंटर पर 5 करोड़ 50 लाख रुपए, मनी ऑर्डर से 1.23 लाख रुपए, ऑनलाइन माध्यम से 3 करोड़ 60 लाख रुपए, अन्नक्षेत्र से 3 करोड़ 38 लाख रुपए ओर गुप्त दान के रूप में 4 करोड़ 65 लाख रुपए प्राप्त हुए हैं.

करोड़ों के आभूषण भी दान में मिले

वहीं लड्डू प्रसाद की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय दर्ज की गई है. इसके अलावा श्रद्धालुओं ने करोड़ों रुपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण भी दान स्वरूप बाबा महाकाल को भेंट किए हैं. उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ते हैं. सावन के पावन महीने और विशेष पर्वों पर भक्तों की यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है, जिससे पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठता है.

दक्षिणमुखी विराजमान हैं भगवान शिव

भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, यह मंदिर एकमात्र ऐसा स्थान है जहां भगवान शिव दक्षिणमुखी रूप में विराजमान हैं. तांत्रिक परंपराओं में इस रूप का विशेष महत्व है. मंदिर की सबसे मुख्य और अनूठी विशेषता यहां तड़के होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती है, जिसमें ताजी भस्म से बाबा महाकाल का श्रृंगार किया जाता है. हाल ही में बने ‘महाकाल लोक’ कॉरिडोर ने मंदिर की भव्यता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को कई गुना बढ़ा दिया है.

शिव-पार्वती की कृपा पानी है तो जरूर रखें शनि प्रदोष व्रत, जानें इसकी तिथि और पूजा विधि

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?