Home धर्म शिव-पार्वती की कृपा पानी है तो जरूर रखें शनि प्रदोष व्रत, जानें इसकी तिथि और पूजा विधि

शिव-पार्वती की कृपा पानी है तो जरूर रखें शनि प्रदोष व्रत, जानें इसकी तिथि और पूजा विधि

by Neha Singh 22 June 2026, 12:49 PM IST (Updated 22 June 2026, 12:58 PM IST)
22 June 2026, 12:49 PM IST (Updated 22 June 2026, 12:58 PM IST)
Shani Pradosh Vrat

Shani Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है. यह व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा होती है. हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथी को प्रदोष व्रत रखा जाता है. जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है और इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की भी पूजा की जाती है. हालांकि कई लोगों की शनि प्रदोष व्रत की जानकारी नहीं होती और कुछ लोग तिथि को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं. यहां जानें अगला शनि प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा, उसका शुभ मुहूर्त क्या है और व्रत की पूजा विधि क्या है.

कब है शनि प्रदोष व्रत

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जून को शुरू होगी. रात 10 बजकर 22 मिनट पर तिथि की शरुआत होगी और अगले दिन, 27 जून को रात 12 बजकर 43 मिनट पर तिथि समाप्त हो जाएगी. त्योहार और व्रत उदया तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं. 27 जून को पूरे दिन त्रयोदशी तिथि रहेगी यानी इसी दिन शनि प्रदोष वर्त रखा जाएगा. 27 जून को शाम 7 बजकर 20 मिनट से लेकर 9 बजकर 29 मिनट तक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा.

Shani Pradosh Vrat

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

शनिवार को पड़ने वाला शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और शनिदेव की कृपा पाने के लिए अद्भुत दिन है. इस सच्चे मन से पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से भगवान शिव और पार्वती प्रसन्न होते हैं. यह व्रत जीवन से कर्म बाधाओं को दूर करने में, साढ़ेसाती और ढैय्या के संकटों से राहत पाने के लिए फलदायी माना जाता है. शनिवार के दिन व्रत रखने के कारण व्रती के पापों का नाश होता है और मानसिक शांति मिलती है. इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति आती है. संतान प्राप्ती की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह व्रत बहुत फलदायी माना जाता है.

व्रत की पूजा विधि

शनि प्रदोष व्रत खासकर सूर्यास्त के बाद किया जाता है. इस सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. व्रत का संकल्प लें. दिनभर कुछ न खाएं. आप चाहे तो फलहारी व्रत भी रख सकते हैं. शाम को सूर्यास्त से पहले दोबारा स्नान करें. इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और काले तिल से अभिषेक करें. अब शिवलिंग पर बेलपत्र, शमी के पत्ते, सफेद फूल, भांग, धतूरा और चंदन अर्पित करें. इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. शिव जी की आरती करें और भोग लगाएं. इसके बाद शनिदेव के सामने तेल का दीपक जलाएं और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद फलाहारी भोजन ग्रहण करके व्रत खोलें.

Kailash Mansarovar जर्नी की पूरी गाइड! कैसे पहुंचें, कितना आएगा खर्च और किन बातों का रखें ध्यान

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?