Home Latest News & Updates इंटरनेशनल यूथ डे पर जानें मोदी सरकार की वो 4 योजनाएं, जिनसे युवाओं के सपनों को मिल रही नई उड़ान

इंटरनेशनल यूथ डे पर जानें मोदी सरकार की वो 4 योजनाएं, जिनसे युवाओं के सपनों को मिल रही नई उड़ान

by Neha Singh 9 August 2026, 4:39 PM IST
9 August 2026, 4:39 PM IST
Youth Schemes in India

Youth Schemes in India: हर साल 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है. भारत जैसे युवा देश में यह दिन और भी ज्यादा खास हो जाता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी युवा है. आज की Gen-Z जेनरेशन पढ़ाई, नौकरी और पारंपरिक करियर के साथ-साथ स्टार्टअप, डिजिटल काम, स्किल और एंटरप्रेन्योरशिप जैसे नए रास्ते भी तलाश रही है. इस पीढ़ी के सामने मौकों के साथ-साथ कई चुनौतियां भी हैं जैसे- रोजगार, स्किल, आर्थिक आत्मनिर्भरता और बेहतर शिक्षा. युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है. इनके जरिए युवाओं को पढ़ाई से लेकर रोजगार और अपना बिजनेस शुरू करने तक मदद की जाती है. इंटरनेशनल यूथ डे के मौके पर जानिए मोदी सरकार की उन खास योजनाओं के बारे में, जो देश के युवाओं, खासकर नई पीढ़ी के करियर को नई उड़ान दे रही हैं. लेकिन उससे पहले जानें अतंर्राष्ट्रीय युवा दिवस का इतिहास, महत्व और इस साल की थीम.

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है, ताकि युवाओं के मुद्दों पर दुनिया का ध्यान खींचा जा सके. अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का आइडिया सबसे पहले 1991 में ऑस्ट्रिया के वियना में संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड यूथ फोरम के पहले सेशन में इकट्ठा हुए युवाओं ने दिया था. इसके बाद 8 से 12 अगस्त 1998 तक ’12 अगस्त’ को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर घोषित करने की सिफारिश की. 1998 में 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित करने का एक प्रस्ताव वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ मिनिस्टर्स रिस्पॉन्सिबल फॉर यूथ के पहले सेशन में पास किया गया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने इस सिफारिश को अपनाया और 17 दिसंबर 1999 को प्रस्ताव 54/120 पास किया, जिससे 12 अगस्त को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया गया. दुनिया भर में पहला अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त 2000 को मनाया गया.

2026 की थीम

इंटरनेशनल यूथ डे 2026 की आधिकारिक थीम है ‘विभिन्न परिस्थितियां, साझा आकांक्षाएं’. यह थीम इस जरूरी सच्चाई को दिखाती है कि दुनिया भर के युवा भले ही अलग-अलग देशों, संस्कृति, आर्थिक और भौगोलिक हालात में रहते हों, लेकिन एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य के लिए उनके सपने और मूल जरूरतें एक समान हैं. चाहे युवा किसी विकसित देश में रहते हों या किसी पिछड़े देश में, उनकी मुख्य मांगें इज्जतदार नौकरी, अच्छी शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी हैं.

भारत सरकार की योजनाएं

भारत सरकार ने युवाओं को बेहतर रोजगार के मौके देने, उन्हें इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग देने और स्वरोजगार के लिए आर्थिक मदद देने के लिए कई जरूरी योजनाएं शुरू की हैं. इन योजनाओं का मकसद न सिर्फ युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करना है, बल्कि उन्हें अपना बिजनेस शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करना है. यहां जानें युवाओं के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकारी की खास योजनाएं.

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 15 जुलाई, 2015 को शुरू की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को कम समय में रोजगार से जुड़े स्किल में ट्रेनिंग देना है. इसके अलावा इस योजना के जरिए जिनके पास पहले से काम का अनुभव या स्किल है, उन्हें मान्यता और सर्टिफिकेट दिया जाता है. इससे अलग-अलग शैक्षिक और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं को फायदा होता है. इसमें विनिर्माण, निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और खुदरा जैसे कई सेक्टर में युवाओं को ट्रेनिंग दी जाती है.

गांव और दूर-दराज के इलाकों में ट्रेनिंग सेंटर बनाकर इस स्कीम ने युवाओं के लिए रोजगार के मौकों तक पहुंच बढ़ाने में मदद की है. यह स्कीम सबको साथ लेकर चलने पर भी जोर देती है. इस योजाना के लाभार्थियों में लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के युवाओं ने भी इसमें काफी हिस्सा लिया है. बदलती टेक्नोलॉजी और भविष्य की रोजगार की जरूरतों को देखते हुए, इस स्कीम का दायरा लगातार बढ़ाया गया है. रोबोटिक्स, मेक्ट्रोनिक्स, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे नए एरिया से जुड़े स्किल्स को अब इसमें शामिल किया गया है. 31 अक्टूबर, 2025 तक, कुल 17,611,055 कैंडिडेट्स ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत एनरोल किया था, जबकि 16,433,033 कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग दी गई थी.

स्कीम के अलग-अलग फेज

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 1.0: शुरुआती फेज में 2015-16 में, लगभग 19.85 लाख कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग दी गई थी.

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2.0: इस फेज में, लगभग 1.10 करोड़ कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग दी गई.

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 3.0: इस फेज में दो स्पेशल प्रोग्राम शुरू किए गए. COVID-19 महामारी के दौरान हेल्थ सेक्टर में काम करने के लिए लोगों को तैयार किया गया, जिसके लिए COVID वॉरियर्स नाम का एक स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया. इसके अलावा नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत वोकेशनल एजुकेशन को जनरल एजुकेशन के साथ जोड़ने के लिए स्किल सेंटर इनिशिएटिव शुरू किया गया. इस फेज में कुल 7.37 लाख कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग मिली. इनमें से लगभग 1.20 लाख कैंडिडेट्स को COVID वॉरियर्स के लिए स्पेशल प्रोग्राम के तहत और लगभग 1.8 लाख कैंडिडेट्स को स्किल सेंटर इनिशिएटिव के तहत ट्रेनिंग दी गई.

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0: वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2024-25 के बीच, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 लाख 80 हजार मिलियन से ज़्यादा कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग दी गई. महिलाओं, दिव्यांग लोगों और स्पेशल एरिया के कैंडिडेट्स को रहने, खाने और ट्रांसपोर्टेशन की भी सुविधा दी जाती है.

स्टार्टअप इंडिया

स्टार्टअप इंडिया 16 जनवरी, 2016 को लॉन्च किया गया था. इसका मकसद देश में इनोवेशन और नए बिजनेस के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाना है. यह पहल उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा लागू की गई है. यह स्कीम युवाओं को सिर्फ़ नौकरी ढूंढने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले एंटरप्रेन्योर बनने के लिए बढ़ावा देती है. यह नए बिजनेस के लिए आर्थिक मदद, कम्प्लायंस की जरूरतों को आसान बनाना, ट्रेनिंग, गाइडेंस, मार्केट लिंकेज और नेटवर्किंग देती है. पहली पीढ़ी के एंटरप्रेन्योर और ग्रामीण इलाकों के इनोवेटिव युवाओं के लिए मौके बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया गया है.

31 अक्टूबर, 2025 तक उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 197,692 बिजनेस को स्टार्टअप के तौर पर मान्यता दी थी. स्टार्टअप एक्टिविटी अब सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है. कई नए मान्यता प्राप्त बिजनेस छोटे और मीडियम साइज के शहरों से भी चल रहे हैं, जिससे ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए एंटरप्रेन्योरशिप के मौके बढ़ रहे हैं. इस पहल में आसान रेगुलेशन और सेल्फ-सर्टिफिकेशन दिया गया है. योग्य स्टार्टअप को लगातार तीन वित्तीय वर्षों तक टैक्स में छूट मिल सकती है. शुरुआती स्टेज के बिजनेस को फाइनेंशियल मदद देने के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड भी बनाया गया है. बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर के लिए भी खास पॉलिसी बनाई गई हैं.

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)

    प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) 8 अप्रैल, 2015 को शुरू की गई थी. इसका मकसद छोटे बिजनेस और माइक्रो-एंटरप्राइज को बिना किसी कोलैटरल या गिरवी रखे लोन देना है. लोन पोल्ट्री, डेयरी फार्मिंग और मधुमक्खी पालन जैसे खेती के कामों के लिए भी दिए जा सकते हैं. यह स्कीम बिजनेस चलाने के लिए टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल, दोनों तरह की जरूरतों को कवर करती है.

    इस स्कीम के तहत चार लोन कैटेगरी हैं-

    • शिशु: ₹50,000 तक के लोन.
    • किशोर: ₹50,000 से ज़्यादा और ₹5 लाख तक.
    • तरुण: ₹5 लाख से ज़्यादा और ₹10 लाख तक.
    • तरुण प्लस: ₹10 लाख से ज़्यादा और ₹20 लाख तक. यह सुविधा उन एंटरप्रेन्योर्स के लिए है जिन्होंने 24 अक्टूबर, 2024 से पहले तरुण कैटेगरी के तहत लोन लिया है और उसे सफलतापूर्वक चुका दिया है.

    इस स्कीम के तहत, पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंक, रीजनल रूरल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां और माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन लोन देते हैं. 28 फरवरी 2025 तक, मुद्रा स्कीम के तहत 52.07 करोड़ लोन अकाउंट मंजूर किए जा चुके हैं. इन अकाउंट के लिए कुल ₹33.19 लाख करोड़ मंजूर किए गए हैं, जबकि ₹32.40 लाख करोड़ दिए जा चुके हैं.

    नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS)

    नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम अगस्त 2016 में शुरू की गई थी. इसका मकसद युवाओं को इंडस्ट्री में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देकर उन्हें नौकरी के लिए ज़्यादा तैयार बनाना है. इस स्कीम में बेसिक क्लासरूम ट्रेनिंग के साथ-साथ प्रैक्टिकल ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग भी शामिल है. स्कीम के दूसरे फेज में, सरकार प्रशिक्षु को मिनिमम तय रकम का 25 प्रतिशत तक मदद देती है. यह मदद हर अप्रेंटिस के लिए ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,500 हर महीने तक हो सकती है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस स्कीम के तहत 13 लाख अप्रेंटिस को ट्रेन करने का टारगेट है. जुलाई 2025 तक, 3.99 लाख अप्रेंटिस एनरोल हुए थे. वहीं, 2016-17 से 31 अक्टूबर, 2025 तक, इस स्कीम के तहत कुल 49.12 लाख अप्रेंटिस को ट्रेन किया गया.

    इन सभी स्कीम का मुख्य मकसद युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है. स्किल डेवलपमेंट स्कीम युवाओं को नौकरी के काबिल बनाती है, स्टार्टअप इंडिया उन्हें अपना बिजनेस शुरू करने के लिए बढ़ावा देती है, मुद्रा स्कीम छोटे बिजनेस के लिए पैसे की मदद देती है और नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम युवाओं को प्रैक्टिकल, ऑन-द-जॉब एक्सपीरियंस देती है. इस तरह, ये स्कीमें मिलकर भारत के युवाओं के लिए स्किलिंग, रोजगार, एंटरप्रेन्योरशिप और आत्मनिर्भरता के मौकों की एक मजबूत नींव बनाती हैं.

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